मूंग : कृषी शोध संसथान Varanasi ने दिया भारत के किसान को बड़ा तोहफा

मूंगमूंग

नई दिल्ली ।देश के खेत में अब जल्दी पकने वाली मूंग लहलहाएगी। ये  की नई वैरायटी  जनकल्याणी 55 दिन में पककर तैयार हो जाएगी। आमतौर पर मूंग  की फसल 65-70 दिन में पकती है। इसकी खासियत यह है कि इसके लंबे गुच्छे रहेंगे, फली गहरे हरे रंग की होगी। दाना मोटा, बड़ा और चमकीला भी होगा। जायद सीजन में इसकी बुआई 15 अप्रैल तक कर सकते हैं।

 किस्म की बुआई करने से जमीन की उर्वरा शक्ति में बढ़ोतरी होगी

कृषी शोध संसथान वारणसी ने यह किस्म दो से तीन बार की सिचाई में पककर तैयार हो जाएगी। प्रति एकड़ उत्पादन 6-7 क्विंटल होगा, बीज प्रति एकड़ 6 किलो लगेगा। कुदरत कृषि शोध  संस्था के सूर्यप्रकाश सिंह का कहना है मूंग कल्याणी किस्म की बुआई करने से जमीन की उर्वरा शक्ति में बढ़ोतरी होती है। साथ ही फसल कटने के बाद हरी खाद भी तैयार हो जाती है। पीला मोजेक, चूर्णित आसिता रोग के प्रति लाभकारी होगी । यह किस्म उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, बंगाल, छत्तीसगढ़, पंजाब आदि राज्यों के लिए किस्म तैयार की है।

साढ़े सात हजार रुपए प्रति हेक्टेयर अनुदान

ग्रीष्मकालीन मौसम के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत किसानों को साढ़े हजार रुपए प्रति हेक्टेयर अनुदान दे रही है। बीज ग्राम योजना में किसानों को उड़द बीज का प्रदर्शन के लिए बीज, खाद और दवाई के लिए दिया जा रहा है। बीजों का भंडारण विकासखंड मुख्यालयों पर किया गया है। यह योजना अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों के लिए है।

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बोने के हिसाब

अंतरवर्तीय ज्वा+मूंग को 4:2 या 6:3, मक्का+मूंग को 4:2 या 6:3, अरहर+मूंग को 2:4 या 2:6 के हिसाब से बोए।

फसल चक्र धान क्षेत्रों के लिए : धान-गेंहू-मूंग या धान-मूंग-धान, मूंग-गेंहू-मूंग और कपास-मूंग-कपास फसल चक्र से बोए।

बीजशोधन पांच ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से राइजोबियम कल्चर से बीज का शोधन करें। शोधन के बाद छाया में रखें।

खरपतवार

खरपतवार नियंत्रण के लिए नींदानाशक दवाई बासालीन 800 मिली एकड़ 250-300 लीटर पानी में बुआई के पहले छिड़के।

इतनी डालें खाद 8 किलो नत्रजन 20 किलो स्फुर, 8 किलो पोटाश एवं 8 किलो गंधक प्रति एकड़ बुआई के समय प्रयोग करें।

बीज उपचार एक ग्राम कार्बेंडाजिम और दो ग्राम थाईरम या तीन ग्राम थाईरम प्रति किलो बीज की दर से करें। बीमारी का प्रकोप नहीं होगा।

ग्रीष्म सीजन 25 से 30 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर। बुआई 15 अप्रैल तक करें। कतार से कतार की दूरी 20 से 25 सेमी पर रखें।

खरीफ सीजन 15 से 20 किलो बीज प्रति हेक्टेयर। बुआई जून-जुलाई में करें। कतार से कतार की दूरी 30 व पौधों की दूरी 4 सेमी रखें।

किस्म की खासियत यह है कि लंबी गुच्छों में होगी फली, गहरे हरे रंग के मोटे चमकीले दाने निकलेंगे ।

 

 

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