कांग्रेस-जेडीएस को रहना होगा सावधान, इन चार तरीकों से भाजपा साबित कर सकती है बहुमत

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बेंगलुरु। कर्नाटक में बहुमत साबित करने को लेकर कांग्रेस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवायी की। इस मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए शनिवार को दोनों पक्षों (भाजपा और कांग्रेस+जेडीएस) को विधानसभा में बहुमत परीक्षण के आदेश दिए हैं। जिसके बाद ये तय हो पायेगा कि येदियुरप्पा सीएम पद पर बने रहेंगे या फिर सिर्फ दो दिन के सीएम बने का नया रिकॉर्ड बनाएंगे। वहीं सवाल ये भी उठता है कि भाजपा बहुमत का आंकड़ा कैसे छुयेगी।

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बता दें कि भाजपा के पास 104 विधायक हैं और बहुमत के लिये 112 विधायक चाहिये। वहीं कांग्रेस के 78 और जेडीएस के 38 मिलाकर 116 विधायक हैं। इसके अलावा कांग्रेस का दावा है कि 2 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन है। इन हालात में सीएम येदियुरप्पा के पास 5 विकल्प हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा बहुमत हासिल करने के लिए ये पांच हत्थकंडे अपना सकती है।

भाजपा के पास हैं बहुमत साबित करने चार रास्ते

येदियुरप्पा की पार्टी के कहने पर यदि कांग्रेस और जेडीएस के विधायक वोटिंग के दौरान सदन में अनुपस्थित रहें या फिर अपनी पार्टी के खिलाफ वोट कर दें। लेकिन कांग्रेस और जेडीएस व्हीप जारी कर देती है। तब अगर कोई विधायक अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर बीजेपी के पक्ष में वोट करता है तो इससे उनकी सदस्यता जा सकती है। सदन में वोट गिने जाते हैं, यह नहीं कि व्हिप का उल्लंघन कर कहां वोट दिया। बीजेपी को वोट देने वालों के खिलाफ बाद में कार्रवाई होती रहेगी।

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भाजपा को बहुमत के आंकड़े के पास लाने के लिए कांग्रेस और जेडीएस के 15 विधायकों को इस्तीफा दिलवाना होगा। अगर येदियुरप्पा की पार्टी ये करने में सफल होती है तो सदन के सदस्यों की कुल संख्या 222 से 208 हो जाएगी और इस आंकड़े पर बीजेपी आसानी से बहुमत पा जाएगी।

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येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय के बड़े नेता हैं। कांग्रेस के पास 21 और जेडीएस के 10 लिंगायत विधायक हैं। अगर वह लिंगायत के नाम पर इन विधायकों को मनाने में कामयाब हो जाते हैं तो इन विधायकों को कांग्रेस के खिलाफ खड़ा किया जा सकता है।

बीजेपी अगर कांग्रेस और जेडीएस के दो तिहाई विधायकों को तोड़ ले जाने में कामयाब हो जाती है तो वह दल-बदल कानून से बच जाएगी। इसके लिए कांग्रेस के 52 और जेडीएस के 26 विधायकों को राजी करना होगा।

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