यूपी जिलों के नाम बदलने के लिए अपनी ही सरकार पर दबाव बना रहे हैं भाजपा नेता

लखनऊ। विहिप (विश्व हिंदू परिषद) द्वारा फैजाबाद का नाम अयोध्या करने की मांग को राज्य सरकार के द्वारा पूरा करने के बाद अब भाजपा में भी कई जिलों के नाम बदलने की मांग तेज हो गयी है। भाजपा नेता प्रदेश के कई एक दर्जन से ज्यादा जिलों के नाम बदलने की मांग कर रही है। जिसमें गोरखपुर और आजमगढ़ का नाम भी शामिल है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने व फैजाबाद का नाम अयोध्या किये जाने के एलान के बाद भाजपा में ही दूसरे जिलों का नाम या फिर स्थान बदलने की मांग तेज हो गयी है।

फैजाबाद का नाम अयोध्या करने की मांग विश्व हिंदू परिषद पहले से करती आयी है और दीपावली में योगी आदित्यनाथ ने फैजाबाद का नाम अयोध्या घोषित किया। अब मेरठ के सरधना से पार्टी विधायक संगीत सोम ने तो मुजफ्फरनगर जिले का नाम बदलकर लक्ष्मीनगर करने को सुर बुलंद किया है।

उन्होंने कहा कि हिन्दू संस्कृति को हमेशा दबाने की कोशिश की गयी और जिलों के नाम मुगलों से जोडक़र रखे गये हैं। अब समय आ गया है कि देश अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूती से आगे बढ़ाये। इस फेहरिस्त में सोम अकेले नेता नहीं हैं।

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भाजपा सांसद बृजभूषण शरण ने तो गोण्डा रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी के नाम करने की मांग उन्होंने रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा से की है। भाजपा सरकार में पहले भी चंदौली जिले के मुगलसराय रेलवे जंक्शन का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम से किया गया है। नाम बदलने की मांग में अलीगढ़ भी शामिल हो गया है।

अलीगढ़ को हरिनगर व आजमगढ़ को आर्यमगढ़ करने के पक्ष में पार्टी के नेता अपने तर्क देने लगे हैं। नाम बदलने की इस मुहिम को सोशल मीडिया पर गोरखपुर को गोरक्षनाथ के नाम करने की मांग तेज हो गयी है। ऐसा माना जा रहा है कि योगी सरकार अभी कुछ जिलों के नाम बदले जा सकते हैं, लेकिन इसमें सरकार जल्दबाजी नहीं करने वाली है। विपक्ष भी इस पर ध्यान भटकाने की बात करके सरकार पर आक्रामक रहता है, लेकिन योगी सरकार के आने के बाद अब तक कई नाम बदले जा चुके हैं।

सभी का समर्थन भाजपा ने पुरजोर तरीके से किया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी ने कहा कि पूर्व की अखिलेश सरकार में तो आठ जिलों के नाम बदले गये थे। योगी सरकार ने तो सिर्फ हिंदू अस्मिता से जुड़े जिलों के नामों के पुराने नामों को बहाल कर रही है, इसमें ऐतराज नहीं गर्व की अनुभूति होनी चाहिए।

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