Site icon 24 GhanteOnline | News in Hindi | Latest हिंदी न्यूज़

20 साल जेल, मौत की सजा और फिर वापसी, 34 करोड़ की ब्लड मनी ने भारतीय की बचाई जान

Blood money worth Rs 34 crore saved an Indian's life.

Blood money worth Rs 34 crore saved an Indian's life.

सऊदी अरब में मौत की सजा का सामना कर रहे केरल के कोझिकोड निवासी अब्दुल रहीम आखिरकार करीब दो दशकों (20 साल) तक विदेशी जेल की सलाखों के पीछे गुजारने के बाद अपने घर लौट आए हैं। बकरीद के पावन मौके पर हुई उनकी इस वतन वापसी ने परिवार की खुशियों को दोगुना कर दिया है। हालांकि, रहीम की रिहाई की राह बेहद कठिन थी। सऊदी अरब के कड़े कानून के तहत उन्हें फांसी के फंदे से बचाने के लिए 34 करोड़ रुपये (15 मिलियन सऊदी रियाल) की भारी-भरकम ‘ब्लड मनी’ (खून के बदले मुआवजा) (Blood Money) चुकानी पड़ी, जिसके बाद ही उनकी सुरक्षित घर वापसी संभव हो सकी।

केरल के लोगों ने 4 दिन में जुटाए 34 करोड़:

अब्दुल रहीम साल 2006 में बेहतर भविष्य और कमाई के मकसद से सऊदी अरब गए थे। वहां उन्हें एक दिव्यांग सऊदी लड़के की देखभाल की नौकरी मिली थी, लेकिन दुर्भाग्यवश उस लड़के की गलती से मौत हो गई और आरोप रहीम पर आ गया। साल 2006 में ही उन्हें जेल भेज दिया गया और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद साल 2018 में सऊदी अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुना दी। लड़के के परिवार ने माफी देने से साफ इनकार कर दिया था और जिंदगी की आखिरी उम्मीद सिर्फ 15 मिलियन रियाल की ‘ब्लड मनी’ (Blood Money) चुकाना था। इसके लिए केरल के लोगों ने अद्वितीय एकजुटता दिखाते हुए 18 अप्रैल 2024 की अदालती समय सीमा से ठीक पहले महज 4 दिनों के भीतर क्राउड फंडिंग के जरिए 34 करोड़ रुपये जुटाकर इतिहास रच दिया।

एयरपोर्ट पर रो पड़े रहीम, बिजनेसमैन बॉबी चेम्मनूर ने किया स्वागत:

कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद जब रहीम विमान से करिपुर एयरपोर्ट पर उतरे, तो वहां का नजारा बेहद भावुक कर देने वाला था। अपनी मातृभूमि पर कदम रखते ही रहीम की आंखों से आंसू छलक पड़े। हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने के लिए मशहूर बिजनेसमैन बॉबी चेम्मनूर पहले से मौजूद थे, जिन्होंने रहीम को गले लगाया।

रहीम ने वहां एकत्रित भारी भीड़ और मीडियाकर्मियों का हाथ हिलाकर और ‘थम्ब्स-अप’ का इशारा कर अभिवादन किया। उन्होंने रुंधे गले से कहा, “मैं दुनिया भर के उन सभी लोगों का दिल से आभारी हूं जिन्होंने एक अनजान शख्स की जान बचाने के लिए अपनी जेबें खोल दीं।”

मां और बेटे का भावुक मिलन:

एयरपोर्ट से रहीम सीधे अपने पैतृक घर कोझिकोड के लिए रवाना हुए, जहां उनकी बूढ़ी मां पिछले 20 वर्षों से अपने बेटे की राह तक रही थीं। जैसे ही गाड़ी रहीम के घर पहुंची, वहां मौजूद स्थानीय निवासियों और दोस्तों ने उनका जोरदार स्वागत किया। दरवाजे पर खड़ी मां को देखते ही रहीम उनसे लिपट गए और दोनों फूट-फूटकर रोने लगे।

मां-बेटे के इस भावुक मिलन को देख वहां मौजूद भीड़ की आंखें भी नम हो गईं। रहीम ने अपनी मां को चूमा और कहा कि आज उन लोगों की वजह से ही उन्हें अपनी मां को दोबारा देखने का यह नया जीवन मिला है। पड़ोसियों ने कहा कि बकरीद के दिन रहीम का वापस आना उनके पूरे इलाके के लिए ईद का सबसे बड़ा तोहफा है।

Exit mobile version