लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते विधायक और बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह का निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से बसपा को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।
उमाशंकर सिंह बलिया जिले की रसड़ा तहसील के खनवर गांव के निवासी थे। उन्होंने पहली बार 2012 में बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद 2017 में भाजपा लहर के बावजूद अपनी सीट बचाने में सफल रहे। वर्ष 2022 में भी उन्होंने बसपा के टिकट पर जीत दर्ज कर लगातार तीसरी बार विधानसभा पहुंचने का गौरव हासिल किया।
राजनीतिक सफर के साथ विवादों से भी रहा संबंध
उमाशंकर सिंह का राजनीतिक जीवन विवादों से भी अछूता नहीं रहा। वर्ष 2013 में उनके खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि विधायक रहते हुए उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD) के ठेके लेकर सड़क निर्माण का कार्य किया, जो जनप्रतिनिधियों के लिए नियमों के विपरीत माना गया।
लोकायुक्त की जांच में उन्हें दोषी पाया गया, जिसके बाद 2015 में उनकी विधानसभा सदस्यता को अयोग्य घोषित कर दिया गया। हालांकि, उन्होंने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। बाद में हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को मामले की जांच कर राज्यपाल को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। इसके बाद जनवरी 2017 में उनकी विधायकी समाप्त कर दी गई थी।
छात्र राजनीति से कारोबार और फिर विधानसभा तक का सफर
उमाशंकर सिंह ने शुरुआती शिक्षा बलिया में प्राप्त की और छात्र जीवन में राजनीति में कदम रखा। छात्र राजनीति में उन्हें विशेष सफलता नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने ठेकेदारी का व्यवसाय शुरू किया। सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में उन्होंने तेजी से पहचान बनाई और बाद में जिला पंचायत चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।
उन्होंने ‘छात्र शक्ति कंस्ट्रक्शन्स’ नाम से कंपनी स्थापित की, जो सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में काम करती थी। इसके अलावा उनकी कारोबारी गतिविधियां माइनिंग, होटल और शिक्षा क्षेत्र तक फैली हुई थीं। उनकी पत्नी पुष्पा सिंह सीएस इन्फ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड की प्रबंध निदेशक हैं।
उमाशंकर सिंह के निधन से पूर्वांचल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चेहरा हमेशा के लिए खामोश हो गया। उनके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
