बसपा एमएलसी महमूद अली समेत को 4 को बड़ा झटका, घरों पर होगा कब्जा

बसपा एमएलसी
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सहारनपुर। बसपा एमएलसी महमूद अली, पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल, मो. ईनाम और अब्दुल वहीद (मृतक) को एक बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने इन लोगों द्वारा चकरौता रोड ग्राम मिर्जापुर पोल में हरिजन महिला से जमीन खरीद कर बनाए गए मकान की 2564.71 वर्ग गज जमीन को सरकारी संपत्ति घोषित कर जब करने का निर्देश दिया है। जिसके लिए कोर्ट की तरफ से तहसीलदार बेहट को आदेश दिया है कि वह इस जमीन पर कब्जा प्राप्त कर लें।

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बसपा एमएलसी के खिलाफ अखबार की खबर पर कोर्ट ने संज्ञान

जानकारी के मुताबिक एक अख़बार ने इस मामले में हरिजन की खेती की जमीन पर बसपा एमएलसी के घर बनने की खबर छापी थी जिस पर संज्ञान लेते हुए डीएम ने एसडीएम बेहट से जांच कराई थी। जिसकी रिपोर्ट एसडीएम द्वारा बीते जनवरी 2018 में डीएम को दे दी गयी। रिपोर्ट के आधार पर डीएम न्यायालय में वाद संस्थित हो गया था और डीएम ने उसे निस्तारण के लिए अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व के न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया था।

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बिना अनुमति के खरीदी गयी जमीन

कोर्ट ने इस मामले में एमएलसी महमूद अली, पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल, मो. ईनाम और मृतक अब्दुल वहीद के उत्तराधिकारियों को नोटिस भेजकर उनका पक्ष जाना था। वहीं सरकारी अधिवक्ता ने बहस में कहा था कि खुशहाली पत्नी भरथू निवासी मिर्जापुरपोल तहसील बेहट से 22 जुलाई 1999 को एमएलसी महमूद अली के नाम 555.38 वर्गगज, पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल के नाम 187.33 वर्गगज, मो. ईनाम के नाम 846 वर्गगज और अब्दुल वहीद के नाम 960 वर्गगज जमीन 22 जुलाई 1999 में बिना अनुमति के खरीदी गई थी।

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ठोस आधार रखने में असफल रहे विपक्षी अधिवक्ता

वहीं इस मामले में यूपी जमींदारी विनास अधिनियम एवं भू व्यवस्था 1950 की धारा 166-167 और उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 104-105 लागू होती है। हालांकि विपक्षी के अधिवक्ता ने इस मामले में अपनी दलील दी थी कि वह जमीन आबादी की थी इसलिए उत्तर प्रदेश जमींदारी विनास अधिनियम एवं भू व्यवस्था 1950 की धारा 166-167 और उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 104 और 105 लागू नहीं होती है लेकिन वह इसका ठोस आधार कोर्ट में नहीं दे पाए।

जिसके बाद अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व विनोद कुमार ने दोनों अधिवक्ताओं की दलीलें और रिकार्ड आधार पर माना कि खसरा नंबर 252 से उक्त 2564.71 वर्गगज जमीन उक्त लोगों द्वारा सक्षम अधिकारी के बिना अनुमति के खरीदना गलत है, इसलिए न्यायालय ने इसे सरकार में जब्त किए जाने का आदेश पारित किया है। इसके साथ ही न्यायालय ने तहसीलदार बेहट को आदेश दिया है कि वह जमीन उक्त जमीन को सरकारी रिकार्ड में सरकार के नाम पर दर्ज कर उस पर कब्जा प्राप्त कर लें। इस मामले में बात करने पर अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व विनोद कुमार ने बताया कि उनके न्यायालय से उक्त आर्डर पारित किया गया है।

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