प्रिटिंग प्रेस से लीक कराये गये बीटीसी प्रशिक्षण-2015 के चतुर्थ सेमेस्टर के पेपर

- in क्राइम, ख़ास खबर, लखनऊ
गिरप्तार आरोपी आशीष अग्रवाल और अरविंद भार्गव

लखनऊ। बीटीसी प्रशिक्षण-2015 के चतुर्थ सेमेस्टर के प्रश्न-पत्र कोशम्बी की प्रिटिंग प्रेस से लीक कराये गये थे। एसटीएफ ने इस संबंध में छानबीन के बाद पेपर लीक कराने वाले प्रिटिंग प्रेस के दो प्रोपराइटरों को गिरफ्तार कर लिया। बीटीसी की ये परीक्षा आठ अक्टूबर होनी थी। इससे पहले कोशम्बी में प्रश्न पत्र लीक हुए थे।

एसटीएफ के एसएसपी ने बताया कि प्रश्न पत्र लीक कराने वाले आरोपियों में आशीष अग्रवाल निवासी 307 महालक्ष्मी, अपार्टमेन्ट ममफोर्डगंज, थाना कर्नलगंज, इलाहाबाद और अरविन्द भार्गव निवासी 11/4 बाई का बाग थाना-कीडगंज, इलाहाबाद हैं। एसएसपी के मुताबिक बीटीसी प्रशिक्षण-2015 के चतुर्थ सेमेस्टर की 8 अक्टूबर होनी थी लेकिन परीक्षा प्रार भ होने से पूर्व 7 अक्टूबर को प्रथम प्रश्नपत्र व्हाट्सएप पर वायरल हो गया। इसके बाद द्वितीय प्रश्नपत्र से लेकर आठवें प्रश्नपत्र तक के भी व्हाट्सएप पर वायरल होने की सूचना मिलने लगी थी। इसके बाद शासन ने इस मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी दी।

एसटीएफ के एसएसपी ने इस संबंध में इलाहाबाद यूनिंट की एक टीम सुरागरसी में लगायी। जांच टीम ने तहकीकात की तो पता चला कि परीक्षा के सभी प्रश्नपत्र आऊट हो गये थे, जिसे विभिन्न लोगों द्वारा कई लोगों को व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराया गया था। छानबीन में जानकारी मिली कि प्रश्नपत्रों को छापने एवं परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचाने के कार्य के लिये विगत कई वर्षों से दीप्ति इण्टरप्राइजेज, बलरामपुर हाऊस, इलाहाबाद को अधिकृत किया जाता रहा है। इसी क्रम में इस वर्ष भी सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी, इलाहाबाद द्वारा दीप्ति इण्टरप्राइजेज को अधिकृत करते हुए बीटीसी के चतुर्थ सेमेस्टर 2015 से संबंधित प्रश्नपत्र भी छापने एवं परीक्षा केन्द्र पर पहुंचाने के कार्य के लिये आदेश दिया गया था।

दीप्ती इण्टरप्राइजेज की मूल प्रोपराइटर आशीष अग्रवाल की पत्नी दीप्ति है, परन्तु वास्तविक रूप से सभी कार्य इनके पति आशीष अग्रवाल द्वारा ही किया जाता है, जब दीप्ति इण्टरप्राइजेज के बारे में पता लगाया तो पाया गया कि दीप्ति इण्टरप्राइजेज द्वारा मात्र प्रश्नपत्रों को छापने की निविदा प्राप्त कर ली जाती है, लेकिन इनके द्वारा प्रिन्टिंग का सारा कार्य भार्गव प्रेस से कराया गया था, जिसके मालिक अरविन्द भार्गव हैं। अरविन्द भार्गव द्वारा इस प्रिन्टिग का कार्य इलाहाबाद स्थित बाई का बाग और मोहित्सीनगंज में स्थित प्रेसों में कराया गया। इन दोनों जगहों पर जाकर एसटीएफ ने पूछताछ की गयी तो पता चला कि इन प्रिन्टिग प्रेसों पर कोई भी सुरक्षा मानक उपयोग नहीं किये गये थे और जिन क प्यूटरों पर ऑफसेट बेव पे तैयार किया गया, वहां पर कोई भी व्यक्ति आसानी से पहुॅच सकता है।

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प्रेस के गेट पर कोई चेकिंग फ्रिस्किंग की कोई व्यवस्था नहीं थी। प्रेस में अन्दर काम करने वाले कर्मचारियों के पास एन्रोएड मोबाइल फोन मौजूद रहते थे, जिससे वे आसानी से किसी प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर रख सकते हैं। प्रिन्टिग कार्य में लगे क प्यूटरों में सीपीयू में यूएसबी पोर्ट मौजूद पाया गया, जिससे कोई भी कर्मचारी आसानी से पेन डांइव और मोबाइल फोन के माध्यम से प्रश्नपत्रों की कापी कर सकता है। साथ ही क प्यूटरों पर इण्टरनेट कनेक्शन चलता हुआ पाया गया। इससे ई-मेल के माध्यम से भी प्रश्नपत्रों को आसानी से ऑनलाइन कहीं भी भेजा जा सकता है।

लिफाफे में पैक कर पहुंचाये थे प्रश्न पत्र

प्रश्नपत्रों की प्रिन्टिंग के बाद उपरान्त पूरे परीक्षा केन्द्रों पर प्रश्नपत्रों को लिफाफे में पैक कर पहुचाने का कार्य भी दीप्ति इण्टरप्राइजेज द्वारा किया गया। इसमें भी पैकेजिंग की ही कार्रवाई की गयी थी और मानक के अनुसार सील्ड पैक की कार्रवाई नही थी, जिससे किसी भी स्थान पर किसी भी व्यक्ति द्वारा खोला जा सकता था और कोई भी व्यक्ति रास्ते में खोलकर फोटो लेकर पुन: पैकेट में रख सकता है। सारे सबूत एकत्र करने के बाद एसटीएफ की टीम ने शनिवार को दोनों आरोपियों आशीष अग्रवाल और अरविन्द भार्गव को कौशा बी से गिर तार कर लिया।

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