वास्तु शास्त्र के हिसाब से बनाएं अपना घर, जानिए इससें होने वाले कई फायेदे

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लाइफस्टाइल डेस्क। जब हम अपना घर बनाते हैं। तो वास्तु शास्त्र के अनुसार बनाते हैं। बहुत से लोग तो वास्तु नहीं बनाते हैं। लेकिन बहुत अधिक लोग  वास्तु शास्त्र के हिसाब से घर का कोना-कोना बहुत सोच समझ के बनाते हैं। सही बताऊ तो वास्तु शास्त्र के हिसाब से अपना घर बनाना चाहिये। क्योंकि कहीं न कहीं इसका असर तो होता हैं।

वास्तु के नियमों से घर, ऑफिस और व्यापारिक अनुष्ठान में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को दूर किया जाता है। वास्तु शास्त्र का नियम यह स्पष्ट करता हैं, कि शुभता के लिए किस दिशा में कौनसी चीजें होनी चाहिए। लेकिन कई बार वास्तु के नियमों की जानकारी न होने से हम नकारात्मक ऊर्जा से घिरे रहते हैं और हमारे जीवन में तरक्की रुक जाती हैं।

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दिशाओं को लेकर वास्तु का नियम
वास्तु के अनुसार दस दिशाएं होती हैं। पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान (उत्तर-पूर्व), नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम), वायव्य (उत्तर-पश्चिम), आग्नेय (दक्षिण-पूर्व), आकाश (उर्ध्व), पाताल (अधो)। इन दसों दिशाओं का अपना विशेष महत्व है।
पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य देव हैं। सामान्य रूप से इस दिशा में घर का मुख्य द्वार होना चाहिए।

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पश्चिम दिशा के देवता वरूण और ग्रह स्वामी शनि है। यह दिशा भी वास्तु नियमों के अनुसार होना चाहिए। उत्तर दिशा के देवता कुबेर हैं। इस दिशा में घर की तिजोरी होनी चाहिए।दक्षिण दिशा में आप घर का भारी भरकम सामान रख सकते हैं। ईशान कोण बहुत ही शुभ स्थान होता हैं। इसलिए यहाँ घर का मंदिर होना चाहिए। आग्नेय कोण अग्नि देव का स्थान हैं। इस यहाँ घर की रसोई होनी चाहिए। वायव कोण में वायु देवा का स्थान हैं। इस दिशा में खिड़की, वेंटिलेटर आदि होना चाहिए। वायव कोण में वायु देवा का स्थान हैं। इस दिशा में खिड़की, वेंटिलेटर आदि होना चाहिए।

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