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CAA-NRC: आज भी नहीं मिला शाहीन बाग प्रदर्शनकारियों को अपना जवाब

नई दिल्ली। पिछले दो महीने से भी ज्यादा दिनों से सीएए-एनआरसी के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में प्रदर्शनकारियों का जोरदार धरना प्रदर्शन हो रहा हैं। आए दिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इसी मुद्दे का हल निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत का समझने के लिए वार्ताकर नियुक्त किया था। जिसपर आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

लेकिन आज सोमवार को इस शाहीन बाग पर फैसला नहीं हो पाया है। सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा नियुक्त तीनों वार्ताकारों ने अपनी रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में सौंप दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह वार्ताकारों की रिपोर्ट पर गौर करेगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई बुधवार यानि 26 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया।

इससे पहले रविवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त किए गए वार्ताकारों में से एक वजाहत हबीबुल्लाह ने शाहीन बाग में सड़क अवरोध पर एक हलफनामा दायर किया था। इस हलफनामे में कहा गया है कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण चल रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने शाहीन बाग के आसपास पांच रास्तों को बंद कर रखा है जिसकी वजह से लोगों को परेशानी हो रही है। वहीं दूसरी तरफ इसी के चलते आज सोमवार को मौजपुर और बाबरपुर मेट्रो स्टेशन बंद किए गए हैं।

बता दें कि शाहीन बाग का रास्ता खाली कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त वार्ताकार संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन अंतिम दिन रविवार को प्रदर्शनस्थल नहीं पहुंचे। उन्हें अब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट देनी है।

अब सभी पक्षों की नजरें एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पर हैं। वार्ताकारों के आने की उम्मीद में भारी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कोर्ट उनके हक में ही फैसला देगा। उधर, अब तक की वार्ता बेनतीजा रहने के पीछे प्रदर्शनकारियों की गुटबाजी को ही कारण बताया जा रहा है।

दयालपुर में फूंके गए तीन ऑटो

दयालपुर इलाके में रविवार देर शाम मामूली कहासुनी पर दो गुट आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर पथराव शुरू कर दिया। बवाल के दौरान एक कार और तीन ऑटो में आग लगा दी गई। साथ ही, कई दुकानों में भी तोड़फोड़ की गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उपद्रव की सूचना पुलिस को तत्काल दी गई थी।

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इसके बावजूद काफी कम संख्या में पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे। उपद्रवियों की भारी संख्या के कारण वे एक किनारे खड़े होकर मूकदर्शक बने सब देखते रहे। कुछ देर बाद अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। इसके बाद पुलिस ने उपद्रवियों पर आंसू गैस के गोले छोड़कर उन्हें तितर-बितर किया।

इसी बीच, भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने सीएए के समर्थन में दोपहर तीन बजे मौजपुर लालबत्ती पर धरना देने का आह्वान कर समर्थकों से वहां जुटने का आह्वान कर दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग एकजुट होने लगे। उनके साथ कपिल मिश्रा भी धरने पर बैठ गए। शाम करीब चार बजे भीम सेना के कुछ समर्थक नारेबाजी करते हुए वहां से गुजर रहे थे। इनके साथ कपिल समर्थकों की कहासुनी हो गई जो हाथापाई में बदल गई। भीम सेना के समर्थकों को पीटने के साथ ही उनकी गाड़ी तोड़ दी गई।

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