कावेरी जल विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की कर्नाटक की दलील

कावेरी जल
Please Share This News To Other Peoples....

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की उस याचिका को बुधवार खारिज कर दिया। जिसमें कहा गया था कि राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में कावेरी जल प्रबंधन योजना के मसौदे को अंतिम रूप देने पर रोक लगाई जानी चाहिए। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि कर्नाटक चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों के व्यस्त रहने की वजह से योजना के मसौदे को मंजूरी देने के लिए मंत्रिमंडल की बैठक नहीं हो सकी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह पूरी तरह से उसके निर्णय की अवमानना है।

केंद्र सरकार को कावेरी जल प्रबंधन योजना में बदलाव करने और मंजूरी के लिए गुरुवार को उसे पेश करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कावेरी जल प्रबंधन योजना के मसौदे के उस प्रावधान में भी सुधार करने को कहा है। जो केंद्र सरकार को चार दक्षिणी राज्यों तमिलनाडु , कर्नाटक, केरल और पुद्दुचेरी के बीच कावेरी जल बंटवारें पर ‘ समय समय पर ’ निर्देश जारी करने का अधिकार देता है।सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से योजना में बदलाव करने और मंजूरी के लिए गुरुवार को उसे पेश करने को कहा। पीठ में न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल हैं।

ये भी पढ़ें :-कर्नाटक में भाजपा की बनी सरकार तो कांग्रेस उठाएगी ये तीन बड़े कदम 

केन्द्र को मसौदा योजना तैयार करने की जिम्मेदारी,  मामले की सुनवाई आज

पीठ ने कर्नाटक की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान के उस अभ्यावेदन को स्वीकार नहीं किया कि राज्य में नयी सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में कावेरी प्रबंधन योजना के मसौदे को अंतिम रूप देने पर जुलाई के पहले सप्ताह तक रोक लगाई जानी चाहिए। दीवान ने अपनी दलील में कहा कि सभी संबंधित राज्य ड्राफ्ट योजना पर अभ्यावेदन दे रहे हैं। मैं जुलाई के पहले सप्ताह तक स्थगन का अनुरोध कर रहा हूं ,क्योंकि मुझे कर्नाटक के मंत्रिपरिषद की ओर से कोई निर्देश नहीं मिला है। इस पर न्यायालय ने कर्नाटक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि केन्द्र को मसौदा योजना तैयार करनी है।  मामले पर गुरुवार को सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जनवरी में एक मैनेजमेंट बोर्ड के गठन करें का दिया था आदेश

इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कावेरी नदी के पानी के बंटवारे के लिए एक मैनेजमेंट बोर्ड के गठन का आदेश दिया था। कोर्ट ने फैसले में कहा था कि नदी के पानी पर किसी भी राज्य का मालिकाना हक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद ट्रिब्यूनल (CWDT) के फैसले के मुताबिक तमिलनाडु को जो पानी मिलना था, उसमें कटौती की गई और बेंगलुरु की जरूरतों का ध्यान रखते हुए कर्नाटक को मिलने वाले पानी की मात्रा में 14.75 टीएमसी फीट का इजाफा किया।

जानिए क्या है कावेरी जल विवाद

भारतीय संविधान के अनुसार कावेरी एक अंतरराज्यीय नदी है। कर्नाटक और तमिलनाडु इस कावेरी घाटी में पड़ने वाले प्रमुख राज्य हैं। इस घाटी का एक हिस्सा केरल में भी पड़ता है और समुद्र में मिलने से पहले ये नदी कराइकाल से होकर गुजरती है, जो पुडुचेरी का हिस्सा है। इसलिए इस नदी के जल के बंटवारे को लेकर इन चारों राज्यों में विवाद चल रहा है।

Related posts:

आधार की अनिवार्यता से जूझे जार्ज फर्नाडीस , केंद्र करे पुनर्विचार: शरद
आधार कार्ड की अनिवार्यता देश की सुरक्षा के लिए खतरा : सुब्रमण्यम स्वामी
वीरेन्द्र दीक्षित का पता लगाए सीबीआई : दिल्ली हाईकोर्ट
बड़ा गैस सिलेंडर लौटाकर, वापस पायें पांच किलोग्राम के दो छोटे सिलेंडर
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद ने कहा- किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं संतों का समाधि स्थल
पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी ने कहा- मेरी हत्या के लिए खाने में जहर मिलाने की कोशिश
उपचुनाव प्रचार में लालू पर बोले नीतीश, कहा- जो पाप करेगा वो भुगतेगा जरुर
प्रिया प्रकाश फिर चर्चा में, पहली बार बना ऐसा रिकॉर्ड
बीजेपी सांसद उमा भारती ने कहा- हम भगवन राम नहीं जो दलितों को पवित्र कर दें
नहर में उतराता मिला महिला का नग्न शव, रेप के बाद हत्या करने की आशंका
RIMS में 800 कर्मचारी हड़ताल पर, डेढ़ दर्जन मरीजों की हुई मौत
लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में बड़ा फेरबदल, इन नेताओं को मिली ये जिम्मेदारी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *