केंद्र ने स्वीकारा महबूबा मुफ़्ती का प्रस्ताव, रमज़ान में आतंकियों पर एक्शन नहीं

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नई दिल्ली। आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता, आतंकी किसी एक समुदाय के कभी नहीं हो सकते, आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता, इस तरह की बाते बेबुनियादी साबित होने जा रही हैं। जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव दिया था कि रमज़ान के महीने में आतंकियों पर एक्शन ना ली जाये। जिसे केंद्र ने स्वीकार कर लिया है और यह फैसला सुनाया है कि रमजान के महीने में आतंकियों पर एक्शन नहीं लिया जाएगा। केंद्र का यह फैसला कई नए सवाल खड़े कर देता है। बताया जा रहा है कि महबूबा मुफ़्ती ने ऐसा फैसला अमरनाथ यात्रा और रमजान में होने वाली भीड़ को देखते हुए लिया है।

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री का प्रस्ताव स्वीकार किया

रमज़ान का महिना इस्लाम धर्म का सबसे पाक महिना माना जाता है। जिसमें सभी मुसलमान पाक रूप से ईद के पर्व का इन्तेजार करते हैं। पुरे माह रोज़ा रखा जाता है। लेकिन जम्मू-कश्मीर का माहौल इस महीने में भी खौफनाक रहता है। जहां अलगाववादी, आतंकी, पत्थरबाज लगातार सेना पर और स्थानीय लोगों पर हमला करते हैं। इस हालात को देखते हुए वहां की मुख्यमंत्री ने बहार=ड शर्मान फैसला लिया है। उन्होंने केंद्र सरकार को यह प्रस्ताव भेजा था कि, रमजान के महीने में आतंकियों पर कोई कार्यवाही नहीं कि जाए। केंद्र सरकार ने महबूबा मुफ़्ती किस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।

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अमरनाथ यात्रा को देखते हुए लिया फैसला

आतंकियों के खिलाफ कार्यवाही ना करने को लेकर पूछे गए सवाल में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि ईद और अमरनाथ यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। साथ ही श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में सर्वदलीय बैठक के बाद सुश्री महबूबा ने संवाददाताओं से कहा था कि हर कोई इससे सहमत है कि हमें वर्ष 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासन काल में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान पर एकतरफा रोक लगाने जैसे कदम उठाने की अपील केंद्र सरकार से करनी चाहिए।

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