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Chaitra Navratri 2026: मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है नवरात्रि का दूसरा दिन, पढ़ें ये कथा

Maa Brahmacharini

Maa Brahmacharini

नवरात्रि 2025 का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी ( Maa Brahmacharini) को समर्पित है। उनके नाम का अर्थ समझें तो ‘ब्रह्म’ का अर्थ तप और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली होता है, यानी वे तप का आचरण करने वाली आदि स्रोत शक्ति हैं। मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में अक्ष माला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। उन्हें साक्षात ब्रह्म का स्वरूप माना जाता है और उनके कठोर तप के कारण उनके मुख पर अद्भुत तेज विद्यमान रहता है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से व्यक्ति को जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा हर कार्य में सफलता के मार्ग खुलते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी ( Maa Brahmacharini) की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी का जन्म पर्वत राज हिमालय के घर पुत्री के रूप में हुआ था। जिसके बाद उन्होंने नारद जी के उपदेश का पालन किया जिसके अनुसार भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए मां माता ने घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया। एक हजार वर्ष तक मां ब्रह्मचारिणी ने सिर्फ फल-फूल खाकर तपस्या की और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। कुछ दिनों तक कठिन व्रत रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहती रही। कई वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाएं और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो मां ब्रह्मचारिणी ने सूखे बिल्व पत्र खाने भी छोड़ दिए। वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं।
( Maa Brahmacharini)
कठिन तपस्या के कारण मां ब्रह्मचारिणी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। माता मैना अत्यंत दुखी हुई और उन्होंने उन्हें इस कठिन तपस्या से विरक्त करने के लिए आवाज़ दी उमां तब से देवी ब्रह्मचारिणी का एक नाम उमा भी पड़ गया। उनकी इस तपस्या से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी देवी ब्रह्मचारिणी की इस तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कार्य बताते हुए उनकी सराहना करने लगे।

माता की तपस्या को देखकर ब्रह्माजी ने आकाशवाणी करते हुए कहा कि देवी आज तक किसी न भी इतनी कठोर तपस्या नही की होगी जैसी तुमने की है। तुम्हारे कार्यों का सराहना चारों ओर हो रही है। तुम्हारी मनोकामना जरूर पूरी होगी जल्दी ही भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हे पति रूप में प्राप्त अवश्य होंगे। अब तुम तपस्या से विरत होकर घर लौट जाओ शीघ्र ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं। इसके बाद माता घर लौट आएं और कुछ दिनों बाद ब्रह्मा के लेख के अनुसार उनका विवाह महादेव शिव के साथ हो गया।

मां ब्रह्मचारिणी ( Maa Brahmacharini) की पूजन विधि

सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद एक वेदी पर मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें सफेद वस्त्र अर्पित करें और फूलों से सजाएं। हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का संकल्प लें। मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करते हुए उनका आह्वान करें। मां को अक्षत, रोली, चंदन, धूप, दीप और इत्र अर्पित करें। मां को सफेद व सुगंधित फूल प्रिय हैं इसलिए उन्हें सफेद फूल जरूर चढ़ाएं। मां ब्रह्मचारिणी के वैदिक मंत्रों का जाप करें।

मां ब्रह्मचारिणी ( Maa Brahmacharini) पूजन मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

मां ब्रह्मचारिणी ( Maa Brahmacharini) प्रिय भोग

मां ब्रह्मचारिणी ( Maa Brahmacharini) को मिश्री और पंचामृत का भोग बहुत प्रिय है। ऐसे में मां को पंचामृत बनाकर अर्पित करें। इसके अलावा मां को सफेद मिठाई या फल भी अर्पित कर सकते हैं।

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