नरेन्द्र मोदी को भाजपा के जन्मदाता परिवार से मिलेगी चुनौती

नई दिल्ली। दिल्ली में गत दिनों संपन्न हुई दो दर्जन से अधिक विपक्षी दलों की संयुक्त बैठक में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को घेरने की रणनीति पर व्यापक विचार विमर्श किया गया। नरेन्द्र मोदी को 2019 में चुनावी शिकस्त देने की योजना तैयार की गयी। ये भी विचार किया गया कि लोकसभा चुनाव में इस बार नरेन्द्र मोदी को उनकी पार्टी के ही जन्मदाता, पंडित दीनदयाल उपाध्याय के परिवार से चुनौती दी जाये।

गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के मुख्मंत्री डॉ. रमन सिंह को घेरने के लिए पूर्व प्रधानमन्त्री अटल वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला को उनके विपरीत प्रत्याशी बनाया था। भले ही करुणा शुक्ला चुनाव हार गयी हों लेकिन इससे एक सन्देश तो गया ही। भाजपा ने पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद उनकी अस्थियां देश भर की नदियों में विसर्जित की थी। लेकिन कांग्रेस ने उनकी भतीजी को अपनी पार्टी में शामिल कर भाजपा के प्रयासों पर पानी फेरने की भी भरपूर कोशिश की। कांग्रेस का प्रयास करुणा शुक्ला को अटल बिहारी वाजपेयी के संसदीय क्षेत्र लखनऊ से चुनाव लड़ाने की है। कुछ इसी तरह का प्रयोग वह मोदी को घेरने के लिए भी करना चाहती है। मोदी जिस किसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे, चंद्रशेखर उपाध्याय को वहां से चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति बनाई जा रही है।

इसके लिए उनके पौत्र चंद्रशेखर उपाध्याय से कुछ राजनीतिक दलों ने सम्पर्क भी साधा है। चंद्रशेखर उपाध्याय हिंदी की गरिमा को बनाये रखने के लिए अपने छात्र जीवन से ही संघर्षरत हैं। हिंदी को रोजी-रोटी से जोड़ने की देशव्यापी अभियान के अगुआ लोगों में चंद्रशेखर उपाध्याय भी एक हैं। उन्हें यूनाइटेड किंगडॉम की वेबसाइट रिकार्ड्स होल्डर्स रिपब्लिक एवं इंडिया बुक ऑफ़ द रिकार्ड्स में शामिल किया गया है। चंद्रशेखर उपाध्याय हिंदी माध्यम से एलएलएम करने वाले पहले भारतीय छात्र हैं।

अपने देशव्यापी अभियान हिंदी से न्याय के चलते देश-विदेश में उन्होंने सात कीर्तिमान स्थापित किये हैं। विद्यार्थी जीवन में वे राष्ट्रीय सेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय पदाधिकारी भी रहे। भाषा के अतिरिक्त स्वदेशी आन्दोलन का दायित्व भी उन्होंने बखूबी संभाला।

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संघ के शीर्ष नेत्रत्व का वरदहस्त भी चंद्रशेखर उपाध्याय को प्राप्त रहा है। उनके पिता भारतीय जन संघ के प्रचारक थे और सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय मंत्री थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के सबसे ख़ास और विश्वस्त सहयोगी थे। पंडित दीनदयाल और डॉक्टर लोहिया के अलावा चौधरी चरण सिंह और राजनारायण भी उनपर अटूट विश्वास करते थे।
चंद्रशेखर उपाध्याय के पिता ने आगरा में सिंचाई कर आन्दोलन के दौरान डॉ. लोहिया की जमानत करवाई थी और अर्दाया आन्दोलन में डॉ. लोहिया के साथ गिरफ्तार हुए थे। नाना जी देशमुख अटल बिहारी वाजपेयी, रज्जू भैया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश के राज्यपाल रहे रामप्रकाश गुप्त की देख-रेख और संरक्षण में चन्द्रशेखर का न केवल पालन-पोषण हुआ बल्कि उनके व्यक्तित्व का विकास भी हुआ।

शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह के गांव खड़खड़ूकला में चंद्रशेखर उपाध्याय की बुआ की शादी हुई है। भगत सिंह के परिवार से उनके परिवार के बेहद आत्मीय ताल्लुकात हैं। भगत सिंह की बहन ने चंद्रशेखर उपाध्याय का नाम रखा था। इसीलिए भगत सिंह के बलिदान सिवास 23 मार्च से उन्होंने अपने अभियान हिंदी से न्याय का आगाज़ किया था।
चंद्रशेखर उपाध्याय देश के पहले और एकमात्र न्यायधीश थे। जिन्होंने एक दिन में सर्वाधिक बार निपटाने का काम किया। हाई कोर्ट में पहली बार हिंदी भाषा का प्रतिशपथ पत्र और याचिका स्वीकार कराने का श्रेय भी उत्तराखंड के एडिशनल एडवोकेट जनरल रहे चन्द्रशेखर उपाध्याय को प्राप्त है।

‘टू सर्वे ऑफ़ इंडिया’ द्वारा वर्ष 2015 में जारी अपने नवीनतम आंकड़ों में हिंदी माध्यम से एलएम उत्तीर्ण करने वाले पहले भारतीय छात्र के रूप में उन्हें चिन्हित किया गया। 23 जुलाई 2000 को एक दिन में मात्र 6 घंटे में 253 बार 22 अक्टूबर को एक दिन में मात्र 6 घंटे में मात्र 7 बार तथा 19 महीने में 3778 वालों का निस्तारण करने वाले वे देश के पहले और एकमात्र न्यायधीश हैं। 19 जनवरी 2005 को उन्हें न्यायिक क्षेत्र का सबसे बड़ा प्रतिष्ठित पुरुस्कार मिला इससे पहले 1983 में अंतिम बार न्यायाधीश सतीश कुमार को यह पुरुस्कार मिला था। यह पुरुस्कार वाद निर्णयों में गुणवत्ता कायम करने वाले , व्यक्ति निरपेक्ष और परिस्थिति निरपेक्ष रहते हुए वादों का तुरंत निस्तारण करने वाले सबसे ईमानदार जज को प्रदान किया जाता है।

24 अगस्त 2004 को देश के सबसे कम आयु के अपर महाधिवक्ता बनने के बाद 12 अक्टूबर 2004 को इलाहबाद उच्च न्यायलय में सरकार/महाधिवक्ता के स्तर से पहली बार हिंदी भाषा में प्रति शपथ पत्र दाखिल करने का कीर्तिमान रचा। इस उपलब्धि के बाद उत्तराखंड तब और अब भी देश का पहला और एकमात्र राज्य है। जिसने सरकार/अधिवक्ता के स्तर पर देश के किसी माननीय उच्च न्यायलय में प्रति शपथ पत्र दाखिल किया है। वर्ष 2010 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के ओएसडी (न्यायिक,विधायी, एवं संसदीय कार्य) रहते हुए हाईकोर्ट में अदालती कार्यवाही हिंदी भाषा में भी सम्पादित कराने का गजट नोटीफिकेशन जारी कराने का श्रेय भी चंद्रशेखर उपद्याय को प्राप्त है।

जुलाई 2013 को नैनीताल हाईकोर्ट में हिंदी भाषा में रिट-याचिका स्वीकार करने का श्रेय तथा बाद में लगभग साढ़े चार लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षरित ज्ञापन मुख्य न्यायधीश को भेजने का श्रेय भी उन्हें प्राप्त है। इस ज्ञापन में मांग की गयी थी कि नैनीताल हाईकोर्ट में फैसले भी हिंदी भाषा में किये जायें।

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