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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: वकील की खुली धमकी, चंपत राय-अनिल मिश्रा 3 दिन में अयोध्या छोड़ें, वरना…

Anil Mishra - Champat Rai

Anil Mishra - Champat Rai

अयोध्या, 29 जून। रामनगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर भारी जन-आक्रोश देखने को मिल रहा है। सोमवार को इस संवेदनशील मुद्दे पर ‘अयोध्या बार एसोसिएशन’ की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वकीलों ने सर्वसम्मति से एक कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए एलान किया है कि अयोध्या का कोई भी अधिवक्ता इस चोरी के आरोपियों का केस नहीं लड़ेगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि राम मंदिर चंदा चोरी मामले में कोई भी वकील आरोपियों का पक्ष कोर्ट में नहीं रखेगा। यदि एसोसिएशन के इस फैसले का उल्लंघन कर कोई भी वकील उनका केस लेता है, तो उस पर 5 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा और साथ ही बार एसोसिएशन से उसकी सदस्यता हमेशा के लिए रद्द कर दी जाएगी।

इस बैठक के दौरान वकीलों का गुस्सा केवल आरोपियों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के आला पदाधिकारियों के खिलाफ भी बेहद मुखर होकर अपनी आवाज बुलंद की। वकीलों ने सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए मांग की है कि ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय (Champat Rai) , सदस्य अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अगले 3 दिनों के भीतर अयोध्या छोड़ना होगा। वकीलों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के अंदर इन पदाधिकारियों ने अयोध्या नहीं छोड़ी, तो बार एसोसिएशन और स्थानीय लोग पूरी अयोध्या को चक्का जाम कर देंगे और किसी भी बाहरी व्यक्ति या वाहन को अयोध्या की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

इस बीच, कानूनी कार्रवाई और तफ्तीश के मोर्चे पर भी सरगर्मी काफी बढ़ गई है। पुलिस की विशेष टीम ने सोमवार को ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय (Champat Rai) का आधिकारिक बयान बंद कमरे में दर्ज कर लिया है, जबकि अनिल मिश्रा और गोपाल राव का स्टेटमेंट रिकॉर्ड होना अभी बाकी है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। जांच टीम का दायित्व बेहद बड़ा है और वे इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने के लिए एक-एक करके करीब 140 संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने की तैयारी में हैं।

जैसे-जैसे पुलिस और एसआईटी (SIT) की संयुक्त जांच आगे बढ़ रही है, इस बड़ी साजिश के पीछे छिपी कई चौंकाने वाली परतें लगातार खुल रही हैं। अब तक की सघन पड़ताल से यह साफ हो चुका है कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे और दानराशि में इतनी बड़ी हेरफेर केवल पैसे गिनने वाले आउटसोर्सिंग कर्मियों के बूते की बात नहीं थी। जांच एजेंसियों को बैंक के दो नियमित कर्मचारियों की भूमिका न सिर्फ संदिग्ध, बल्कि इस पूरी साजिश में बेहद सक्रिय मिली है। अधिकारियों का मानना है कि बैंककर्मियों की सीधी मिलीभगत और तकनीकी शह के बिना इतने लंबे समय तक रिकॉर्ड में हेरफेर करना और दानराशि को गायब रखना नामुमकिन था। इस नए खुलासे के बाद आने वाले दिनों में बैंक के बड़े अधिकारियों और कुछ अन्य सफेदपोशों की गिरफ्तारी होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

चंदा चोरी के इस गंभीर मामले में नामजद सभी 8 गिरफ्तार अभियुक्तों की पुलिस रिमांड की अवधि आज समाप्त हो रही है, जिसके चलते सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच सभी आरोपियों को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। तफ्तीश के नए सूत्रों और कड़ियों को जोड़ने के लिए पुलिस कोर्ट से सभी अभियुक्तों की दोबारा रिमांड की मांग कर सकती है। गौरतलब है कि बीते कल यानी रविवार को पुलिस टीमों ने गिरफ्तार आरोपियों के घरों और ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस के हाथ कई बड़े सबूत लगे हैं, जिनमें भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवरात, लाखों रुपये की नकदी और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज शामिल हैं, जिन्हें जब्त कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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