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भरोसेमंद लोगों ने दिया धोखा… चंपत राय ने सेवा समाप्ति की घोषणा की

Champat Rai

Champat Rai

अयोध्या, 2 जुलाई। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) का एक बेहद भावुक और बड़ा बयान सामने आया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, चंपत राय इस पूरे दान गबन प्रकरण के उजागर होने के बाद से मानसिक रूप से काफी आहत हैं और फिलहाल एकांतवास में रह रहे हैं। उन्होंने अपने कुछ बेहद करीबी और खास सहयोगियों के साथ हुई एक गोपनीय बातचीत के दौरान अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए दो-टूक शब्दों में कहा है कि वे अब इस सामाजिक कलंक और बदनामी के साथ ट्रस्ट में अपनी सेवा को आगे जारी नहीं रखना चाहते हैं।

चंपत राय (Champat Rai) ने भावुक होकर अपने करीबियों से कहा कि जिन लोगों को उन्होंने सबसे अधिक विश्वसनीय माना और जिन पर आंख मूंदकर भरोसा किया, उन्हीं लोगों ने उनके साथ विश्वासघात किया है, जिससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हालांकि, अपनी इस बातचीत में उन्होंने सीधे तौर पर किसी भी व्यक्ति का नाम नहीं लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अयोध्या और प्रभु श्रीराम के मंदिर के लिए उनकी जो भी धार्मिक व प्रशासनिक सेवा थी, वह अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और वे इस तरह के गंभीर आरोपों के साये में अपने पद की जिम्मेदारी संभालने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं।

इस पूरे कथित घोटाले के सामने आने के बाद चंपत राय (Champat Rai) ने स्वयं नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की थी, जिस पर अब वे पूरी तरह अडिग नजर आ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य महत्वपूर्ण सदस्य अनिल मिश्रा द्वारा सौंपे गए इन इस्तीफों पर आगामी 6 जुलाई 2026 को होने वाली ट्रस्ट की उच्च स्तरीय बैठक में गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। दोनों ही वरिष्ठ पदाधिकारियों के भविष्य पर इस बैठक में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत के आधार पर ही कोई अंतिम और बड़ा निर्णय लिया जाएगा। इस बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पिछले महीने गठित की गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की सिफारिशों के मद्देनजर ट्रस्ट के आंतरिक प्रबंधन और सुरक्षा में बड़े बदलावों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का यह बड़ा विवाद पिछले महीने 7 जून को तब शुरू हुआ था, जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मंदिर में दान के पैसों में हेराफेरी का गंभीर आरोप लगाया था। मामले के लगातार तूल पकड़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी गहन जांच के लिए आनन-फानन में एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया था। एसआईटी ने बीते 23 जून को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी, जिसमें वित्तीय गड़बड़ी और लापरवाही की पुष्टि हुई थी। इसके बाद कार्रवाई करते हुए 25 जून को मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई और मंदिर में दान राशि की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस अब तक महासचिव चंपत राय समेत ट्रस्ट के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के आधिकारिक बयान भी दर्ज कर चुकी है।

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