Chandrayaan-2 : लैंडर विक्रम से संपर्क की ये है आखिरी उम्मीद

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नई दिल्ली। दुनिया भर की निगाहें इन दिनों भारत के चंद्रयान-2 मिशन पर टिकी है। इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (इसरो)के वैज्ञानिक लगातार लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी है। लैंडर विक्रम से दोबारा संपर्क कायम करने के लिए आखिरी उम्मीद अब एक्स-बैंड है।

X-Band पर नजर, इसके जरिए लैंडर विक्रम और ग्राउंड स्टेशन से साधा जा सकता है संपर्क 

चंद्रयान 2 मिशन से जुड़े एक वैज्ञानिक का कहना है कि कुछ ही ऐसे चैनल है जिसके जरिए लैंडर विक्रम और ग्राउंड स्टेशन से संपर्क साधा जा सकता है। ये है एक्स-बैंड। इसका इस्तेमाल आमतौर पर रडार, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और कम्प्यूटर नेटवर्क के लिए किया जाता है।

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फिलहाल कोई संपर्क नहीं, चांद की सतह पर विक्रम ने कहां लैंड किया है?

शनिवार सुबह लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया था। चांद की सतह पर विक्रम ने कहां लैंड किया है? इसका पता लग गया है, लेकिन अब तक पांच दिन बीत जाने के बाद भी इससे कोई संपर्क नहीं साधा जा सका है।

एंटीना का इस्तेमाल

विक्रम से संपर्क करने के लिए इसरो कर्नाटक के एक गांव बयालालु में लगाए गए 32 मीटर के एंटीना का इस्तेमाल कर रहा है। इसका स्पेस नेटवर्क सेंटर बेंगलुरु में है। इसरो कोशिश कर रहा है कि ऑर्बिटर के जरिये विक्रम से संपर्क किया जा सके।

विक्रम को सिर्फ एक लूनर डे के लिए ही सूरज की सीधी रोशनी मिलेगी, सिर्फ 14 दिन का समय

लैंडर पावर जेनरेट कर रहा है या नहीं इस बारे में फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसरो के चेयरमैन ने कहा है कि वो अभी भी उसके डाटा का एनालिसिस कर रहे हैं। विक्रम को सिर्फ एक लूनर डे के लिए ही सूरज की सीधी रोशनी मिलेगी। इसका मतलब है कि 14 दिन तक ही विक्रम को सूरज की रोशनी मिलेगी। ऐसे में इसरो इन 14 दिन तक अपनी कोशिश जारी रख सकता है। यानी अब लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए इसरो के पास सिर्फ 10 दिनों का समय बचा है।

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