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गलवान घाटी में झड़प के बाद चीनी कंपनी Oppo को लगा झटका

नई दिल्ली। गलवान घाटी में झड़प के बाद सीमा बढ़ते तनाव के बीच चीन को एक झटका लगा है। चीनी मोबाइल हैंडसेट निर्माता ओप्पो ने बुधवार को देश के विभिन्न हिस्सों में चीनी उत्पादों के बहिष्कार के आह्वान के बीच देश में अपने प्रमुख 5 जी स्मार्टफोन की लॉन्चिंग को रद्द कर दिया।

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बता दें  भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी में गतिरोध बना हुआ है। सोमवार रात लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ एक हिंसक झड़प में 20 भारतीय सेना के जवान मारे गए। इससे चीन के प्रति आक्रोश के तहत प्रदर्शनकारियों ने और कुछ व्यापारिक संगठनों ने चीनी सामान का बहिष्कार करने की मांग की।

ओप्पो, जो भारत में शीर्ष पांच स्मार्टफोन विक्रेताओं में शुमार है, ने कहा था कि वह बुधवार को यू ट्यूब के माध्यम से अपने फाइंड एक्स 2 स्मार्टफोन के लॉन्च को लाइवकास्टकरेगा। हालाँकि, बाद में लाइवकास्ट को रद्द कर दिया गया और कंपनी ने पहले से रिकॉर्ड किया गया वीडियो अपलोड किया। हालांकि ओप्पो ने रद्द करने का कारण पूछने वाले सवालों का जवाब नहीं दिया, लेकिन रिपोर्टों से पता चलता है कि विरोध प्रदर्शन को देखते हुए रद्द किया गया था।

सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह आर्थिक मोर्चे पर भी चीन को करारा जवाब दे सकती है। इसके तहत देश में विभिन्न क्षेत्रो में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी की भी समीक्षा की जाएगी। इसमें दिल्ली मेरठ आरआरटीएस की टनल का ठेके का मुद्दा भी अहम है। हाल में चीनी कंपनी शंघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (एसटीईसी) का मुद्दा शामिल है।

एशियाई विकास बैंक द्वारा वित्त पोषित इस परियोजना के तहत 5.6 किलोमीटर लंबी टनल का डिजाइन और निर्माण किया जाना है। इसके लिए 9 नवंबर 2019 को निविदा आमंत्रित की गई थी। पांच कंपनियों एसकेईसी कोरिया और टाटा, एसटीईसी चीन, एल एंड टी भारत, एफकोन भारत और गुलेमेक अगीर तुर्की शामिल है। 12 जून को निविदा खुलने पर सबसे कम बोली चीनी कंपनी की रही है। सरकार ने कहा है कि अभी इस बारे में अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक की जो गाइडलाइन है उनके अनुसार किसी देश और कंपनी को लेकर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है।

दूरसंचार एवं प्रौद्योगिकी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास चीन की जगह दूरसंचार प्रौद्योगिकी उपकरणों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की क्षमता है। इसके लिए सरकार को उचित तरीके से पहल करने, प्रौद्योगिकी उद्योग को वित्तीय संकट से उबार कर मदद करने की जरूरत है।

यह बात फॉरेन करेसपोंडेंट क्लब साउथ एशिया (एफसीसी) के एक वेबिनार के दौरान निकलकर सामने आई। इस वेबिनार में टेक महिंद्रा के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सी.पी. गुरनानी, सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महाप्रबंधक राजन मैथ्यूज और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी एवं सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेस इंडिया लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश त्यागी शामिल हुए।

इस बारे में गुरनानी ने कहा कि ”आत्मनिर्भर भारत का मतलब अंतरराष्ट्रीय व्यापार से दूर होना नहीं है। बल्कि इसका मतलब है कि हमें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आगे आकर नेतृत्व करना है। भारत इसे हासिल कर सकता है, लेकिन उसके लिए हमें सरकार के नेतृत्व करने की जरूरत है ताकि आत्मनिर्भर भारत को वास्तविकता बनाया जा सके। वहीं मैथ्यूज ने कहा कि हमारे पास योग्यता है, हमें अपनी क्षमता का मौद्रिक लाभ उठाना चाहिए। हम शोध एवं विकास में बहुत निवेश नहीं करते हैं और नतीजतन हम बौद्धिक संपदा अधिकार के खेल में पीछे छूट गए। यदि हमें आत्मनिर्भर भारत बनाना है तो हमें अपने शोध एवं विकास को प्रोत्साहन देना होगा। हमें ‘ओपन सोर्स को एक बड़े कारोबारी अवसर के तौर पर देखना होगा।

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अन्य देशों की तरह एक या दो उद्योगों को प्राथमिकता देनी होगी। इतना ही नहीं हमें ऋण को सस्ता करना होगा, लोगों के हाथ में पैसा देना होगा जो वास्तव में मूल्यूवर्द्धन करते हैं। स्टार्टअप कंपनियों के पैसा देना होगा।  वेबिनार के दौरान अन्य विशेषज्ञों ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नीतिगत पहल, लोक-निजी भागीदारी और उद्यम अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा। तभी भारत यह लंबी छलांग लगा सकता है।

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