देहरादून। 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद की ओर से मुख्य सेवक सदन में आयोजित समारोह में उत्कृष्ट बुनकरों एवं हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बिच्छू घास (नेटल फाइबर) से निर्मित पारंपरिक उत्पाद खरीदकर स्थानीय शिल्पकारों का उत्साहवर्धन किया और प्रदेशवासियों से स्थानीय एवं स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिवस उन बुनकरों और शिल्पकारों के सम्मान का प्रतीक है, जो अपनी कला, कौशल और परिश्रम से देश की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कारीगर केवल उत्पाद नहीं बनाते, बल्कि अपनी रचनाओं में राज्य की संस्कृति, लोकजीवन और परंपराओं की आत्मा को भी संजोते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प उत्पाद अपनी गुणवत्ता और विशिष्टता के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। हर्षिल की ऊनी शॉल, मुनस्यारी और धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी, रंगवाली पिछौड़ा, रिंगाल शिल्प और बिच्छू घास से बने उत्पाद राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे अभियानों ने देश के स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों की प्रभावी ब्रांडिंग और विपणन से राज्य के बुनकरों एवं शिल्पकारों को वैश्विक बाजार में और अधिक अवसर मिल सकते हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत अब तक 278 बुनकरों और शिल्पकारों को चार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण तथा एक करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी उपलब्ध कराई गई है, जिससे लगभग 834 लोगों को रोजगार मिला है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और समग्र हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के माध्यम से आधुनिक मशीनें, बेहतर डिज़ाइन, प्रशिक्षण, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के बुनकरों को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है, जबकि वरिष्ठ शिल्पकारों को पेंशन योजना और उत्कृष्ट कारीगरों को ‘उत्तराखंड राज्य शिल्प रत्न’ सहित विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, राष्ट्रीय मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से उत्तराखंड के हस्तशिल्प उत्पादों को देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। साथ ही राज्य के कई पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग मिलने से उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान और मजबूत हुई है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद को जन आंदोलन बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि हथकरघा या हस्तशिल्प का कोई भी उत्पाद खरीदना केवल एक वस्तु खरीदना नहीं, बल्कि किसी बुनकर परिवार की आजीविका, किसी शिल्पकार के स्वाभिमान और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी, विधायक सविता कपूर, सचिव विनय शंकर पांडे, बड़ी संख्या में बुनकर, हस्तशिल्पी, उद्यमी और महिला शिल्पकार उपस्थित रहे।
