मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया को भारत बनाने के लिए एक नहीं अनेक ऐतिहासिक और स्मरणीय कार्य किए हैं। हमारी न्याय व्यवस्था के निर्णय से जहां अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर का निर्माण बिना किसी की आपत्ति के संभव हुआ वहीं, राष्ट्र गीत वंदे मातरम् की गरिमा लौटाने, पड़ोसी देश को शक्ति का एहसास करवाने से लेकर कोरोना के समय राष्ट्रवासियों और अन्य देशों को भी मैत्री सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत किया गया। इन सभी कदमों से सशक्त भारत का निर्माण हुआ है।
मुख्यमंत्री यादव (CM Mohan Yadav) कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित कार्यक्रम में “इंडिया से भारत: एक प्रवास” पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। पुस्तक की भूमिका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ। मोहन भागवत ने लिखी है। विमोचन कार्यक्रम में मंत्रिमंडल के अनेक सदस्य उपस्थित थे।
पुस्तक लेखन प्रशांत पोल की यात्रा का नया पड़ाव- CM
सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने पुस्तक के लेखक प्रशांत पोल को बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक उनकी लेखन यात्रा का नया पड़ाव है। उन्होंने इस के लेखन में काफी परिश्रम किया है। यह सत्य है कि वर्ष 2014 से वर्ष 2026 तक के प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को देखें तो इसे राष्ट्र के लिए स्वर्णिम काल कह सकते हैं। हमारे जवान अभिनंदन की पड़ोसी देश से जब ससम्मान वापसी होती है तो राष्ट्र की शक्ति पर गर्व का अनुभव होता है।
लेखक प्रशांत पोल ने 11 अध्याय की लिखी पुस्तक
कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक प्रशांत पोल ने कहा कि उन्होंने ग्यारह अध्याय में पुस्तक लेखन करते हुए यह रेखांकित करने का प्रयास किया है कि भारत दीन-हीन और लाचार नहीं था। वर्ष 1965 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता की मृत्यु पाकिस्तानी फाइटर पायलट के हमले से हो गई थी। इसे साधारण बात मान लिया गया। स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1977 में आम जनता ने परिवर्तन की राह चुनी। अस्सी के दशक के मध्य से विश्व में बदलाव की सुगबुगाहट हो रही थी। भारत में भी उन दिनों बहुत कुछ हो रहा था। भारत ही नहीं समूचे दक्षिण पूर्व एशिया के आराध्य प्रभु श्रीराम अपनी जन्म भूमि में ताले में बंद थे। वर्तमान शताब्दी की चर्चा करें तो गत 12 वर्ष में इंडिया को भारत बनाने का अहम कार्य हुआ है।
कार्यक्रम में दीपक शर्मा ने पुस्तक के केंद्रीय भाव पर अपने विचार व्यक्त किए। प्रज्ञा प्रवाह के धीरेन्द्र चतुर्वेदी, विद्या भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कान्हेरे और प्रभात प्रकाशन के राकेश सिंह कार्यक्रम में उपस्थित थे।
