काशी से राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ; योगी बोले- आंगनबाड़ी केंद्रों की बदली तस्वीर

वाराणसी: रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में बुधवार को नौवें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) , केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर और प्रदेश सरकार की मंत्री बेबी रानी मौर्य मौजूद रहीं।

इस साल अभियान की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है। इसका उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण सामग्री वितरण की जगह बच्चों के स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और समग्र विकास के केंद्र के रूप में विकसित करना है। अभियान में समुदाय की भागीदारी पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के बसियापुर गांव की एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह उनके गांव जा चुके हैं। कार्यकर्ता ने भी मुख्यमंत्री को पहचानने की बात कही।

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति देखी तो हालात खराब थे। उन्होंने दावा किया कि उस समय आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण सामग्री की आपूर्ति में शराब माफिया की भूमिका थी और वह मनमानी करता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पोषण सामग्री दो-तीन महीने में पहुंचने की जानकारी मिलने पर उन्होंने व्यवस्था में बदलाव की जरूरत महसूस की। उन्होंने कहा कि लखनऊ में बैठे लोगों की गलती का खामियाजा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भुगतना पड़ता था, जबकि वे अपना काम पूरी मेहनत से करती थीं।

केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से पूरे देश को पोषण का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने बच्चों के जीवन के शुरुआती दो वर्षों को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए इस अवधि में बेहतर पोषण की जरूरत पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि काशी से राष्ट्रीय पोषण माह का संकल्प पूरे देश में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने स्वस्थ बचपन को विकसित भारत की मजबूत नींव बताते हुए जनभागीदारी को अभियान की सफलता के लिए जरूरी बताया।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने करीब 24 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में आधुनिक वातावरण तैयार किया है। वहीं मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि बच्चों को पोषित करना विकसित भारत के निर्माण की बुनियादी जरूरत है और इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ अभिभावकों व समाज की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।

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