होमगार्ड विभाग में कमांडेंट का आतंक, लूट के खेल में मंत्री व डीजी मौन

कमांडेंट का आतंककमांडेंट का आतंक

लखनऊ। यूपी में होमगार्ड विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। होमगार्डों की मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा लखनऊ के कमांडेंट कृपाशंकर अपने अन्दर तो कर ही रहें हैं। इसके अलवा अवैध वसूली की रकम मंत्री से लेकर मुख्यालय तक पहुंचाई जा रही है। होमगार्ड मंत्री को इस बात की भनक भी नहीं कि उनके नाम पर कमांडेंट आतंक मचा रखा है। उन्होंने सभी जगह पुराने ड्यूटी इंचार्ज को लगा रखा है जिनके माध्यम से माह जनवरी से अब तक 15 से 20 लाख रुपए प्रतिमाह की वसूली की जा रही है।

डीजी ने भ्रष्टाचार की जानकारी होने के बाद सभी का पटल क्यों नहीं बदला

इस मामले में चौंकाने वाली बात तो यह है कि सारी बातें डीजी सूर्य कुमार शुक्ला की जानकारी में है।  इसके बाद भी सालों से जमे अवैतनिक प्लाटून कमांडर,अवैतनिक ब्लॉक आर्गनाइजरों का अभी तक पटल नहीं बदला। इससे साबित होता है कि ये लोग इस विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने पर पूरी तरह से आमादा हैं।

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पटल बदलने के मुद्दे पर डीजी से करेंगे बात: कुमार कमलेेश 

जबकि  इस मसले में प्रमुख सचिव,कुमार कमलेश ने कहा कि यदि पटल नहीं बदला गया तो मैं इस बारे डीजी से बात करूंगा। मेरी जानकारी में जो बात आएगी उसे हर हाल में ठीक करूंगा और भ्रष्टचार को तो किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं करूंगा।

मंत्री जी का उठाना पड़ता है खर्चा, कमीशन दो वर्ना नहीं मिलेगी ड्यूटी

बतातें चलें कि मुख्यमंत्री के सरकारी आवास और कार्यालय पर तैनात होमगार्ड हों या फिर यातायात से लेकर थानों व सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में ड्यूटी लगाने के नाम पर जबरदस्त वसूली की जा रही है। इस खेल के मुख्य सूत्रधार लखनऊ के कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय का जुमला है कि मंत्री जी का पूरा खर्चा उठाना पड़ता है इसलिये ड्यूटी लगाने के एवज में तय कमीशन दो वर्ना नहीं मिलेगी ड्यूटी। आश्चर्य की बात यह है कि होमगार्ड मंत्री को इस बात की भनक भी नहीं कि उनके नाम पर कमांडेंट ने आतंक मचा रखा है। उन्होंने सभी जगह पुराने ड्यूटी इंचार्ज को लगा रखा है जिनके माध्यम से माह जनवरी से अब तक 15 से 20 लाख रुपए प्रतिमाह की वसूली की जा रही है।

फर्जी होमगार्ड तैनात सरकार को लगाया जा रहा है चूना

खास बात यह है कि थानों से लेकर कलेक्ट्रेट, सचिवालय एवं अन्य प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर फर्जी होमगार्ड तैनात किये जा रहे हैं। इनके नाम पर हर माह लाखों रुपए का भुगतान हो रहा है। पूरी रकम पाण्डेय की जेब में जा रहा है। ड्यूटी के दबाव और वसूली से जवानों में आक्रोश है। सवाल यह है कि आखिर कमांडेंट ने पुराने वैतनिक व अवैतनिक ड्यूटी इंचार्जों को क्यों नहीं हटाया? जबकि शासन स्तर पर बार- बार निर्देश दिया जा रहा है कि पुराने ड्यूटी इंचार्ज की जगह नये ईमानदार छवि के वैतनिक व अवैतनिक कर्मचारियों को इंचार्ज बनाया जाये। इस खेल में कमांडेंट पर पूरी तरह से वरदहस्त मुख्यालय के उन भ्रष्ट अधिकारियों का है जिन्हें सभी को मैनेज करना पड़ रहा है। राजधानी होने की वजह से यहां के थानों ,यातायात व्यवस्था, सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को संवारना पुलिस प्रशासन के लिये हमेशा से चुनौती रहा है। लेकिन इन्हें ड्यूटी देने के नाम पर जिस तरह से विभागीय अधिकारी शोषण करते हैं वो बेहद शर्मनाक है।

सरकार बदली ,लेकिन इन बीओ ,कंपनी कमांडर की कुर्सी आजतक नहीं हिली

पूरी तरह से बैखौफ होकर जवानों से ड्यूटी देने के नाम पर वसूली कर रहे हैं। जवानों ने बताया कि पिछली सरकारों के समय से बीओ राजकुमार वर्मा़ इंस्पेक्टर उदय बहादुऱ बीओ ओ पी सिंह़ राजेश सिंह़ कंपनी कमांडर कुलदीप शुक्ला़ इंस्पेक्टर शेर प्रताप सिंह़ हवलदार रंजीत यादव, सुरेश सिंह सहित अवैतनिक कंपनी कमांडर अरूण रावत, सुशील सिंह, सचिवालय देख रहे कंपनी कमांडर जगदीश प्रसाद सालों से तैनात हैं।

डीजी होमगार्ड डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला पर कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय हैं भारी

शासन ने हाल ही में आदेश जारी किया था कि सभी कर्मचारियों का पटल बदल दिया जाये,लेकिन कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने आज तक आदेश का पालन नहीं किया। इसी तरह डीजी, होमगार्ड डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने भी कमांडेंट को लिखित निर्देश दिया कि विभाग के ईमानदार वैतनिक व अवैतनिक कर्मचारियों को इनकी जगह पर तैनात किया जाये,लेकिन ऐसा लगता है। मानों पाण्डेय ने इन लोगों का ताख पर रख दिया है।

जवानों को ड्यूटी देने के नाम पर प्रतिमाह लगभग 15 से 20 लाख रुपए की जा रही है अवैध वसूली

बताया जाता है कि एमसीआर से प्रतिमाह 2 लाख रुपए, कलेक्ट्रेट से 1.50 लाख रुपए, थानों से लगभग 6-7 लाख रुपए एवं अन्य जगहों से मिलाकर जवानों को ड्यूटी देने के नाम पर प्रतिमाह लगभग 15 से 20 लाख रुपए की वसूली की जा रही है। बताया जाता है कि जिसमें से मंत्री अनिल राजभर को 2 लाख रुपए, डीजी को बेगारी करने के नाम पर 60- 70 हजार रुपए, डीआईजी एस के सिंह को 50 हजार रुपए प्रतिमाह जाता है।

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