उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में काफी समय से अंदरखाने चल रहा शीतयुद्ध अब पूरी तरह से प्रशासनिक और राजनीतिक पटल पर खुलकर सामने आ गया है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा (AK Sharma) ने अपने ही विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल को एक अत्यंत तल्ख और सख्त पत्र लिखा है। इस पत्र में मंत्री ने अध्यक्ष पर सीधे तौर पर जाति, धर्म और भ्रष्टाचार के आधार पर अनुभवी व कुशल कर्मचारियों की छंटनी करने और उनकी जगह अकुशल लोगों को मनमाने ढंग से भर्ती करने जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मंत्री ने बिंदुवार तरीके से पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए अध्यक्ष को कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि इस पत्र को सीधे तौर पर शासन का सख्त निर्देश समझा जाए और भविष्य में दोबारा इस तरह की मनमानी हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा (AK Sharma) ने पत्र में इस बात का विशेष उल्लेख किया है कि वे वर्ष 2025 में भी विभिन्न तिथियों में इस विषय पर कई बार पत्र लिखकर सचेत कर चुके थे। उन्होंने नाराजगी जताते हुए लिखा कि बिजली विभाग में लंबे समय से पूरी निष्ठा के साथ काम कर रहे अनुभवी और तकनीकी रूप से कुशल संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाला जा रहा है, जबकि भ्रष्टाचार, जाति और धर्म को आधार बनाकर नए और अकुशल लोगों की नियुक्तियां की जा रही हैं। बार-बार मना करने के बावजूद इस गलत प्रक्रिया को नहीं रोका गया, जिसका सीधा खामियाजा आज पूरे प्रदेश को बिजली की घोर अव्यवस्था और तकनीकी खामियों के रूप में भुगतना पड़ रहा है। मंत्री ने सहारनपुर के एक लाइनमैन को हटाए जाने के विशिष्ट मामले का भी जिक्र किया और साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के तानाशाही फैसलों से विभाग के भीतर तकनीकी, प्रशासनिक और राजनैतिक रूप से एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया गया है।
कर्मचारियों की छंटनी के अलावा, बिजली बिलों में की गई गुपचुप बढ़ोतरी को लेकर भी ऊर्जा मंत्री (AK Sharma) ने अध्यक्ष को आड़े हाथों लिया है। पत्र के अनुसार, बीते 29 मई को कॉरपोरेशन द्वारा उपभोक्ताओं पर 10 फीसदी फ्यूल एंड पावर पर्चेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) यानी ईंधन अधिभार लगाने का एकतरफा फैसला ले लिया गया और इसकी वसूली जून माह के बिलों से करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए। मंत्री ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने व्यापक जनहित और वित्तीय असर वाले महत्वपूर्ण विषय पर विभाग के कैबिनेट मंत्री की सहमति लेना तो दूर, उन्हें इसकी पूर्व जानकारी तक नहीं दी गई और इस बड़े फैसले की भनक उन्हें सीधे विभाग से मिलने के बजाय मीडिया और समाचार माध्यमों से लगी। उन्होंने अध्यक्ष को कड़ी चेतावनी देते हुए पूछा है कि क्या ऐसे संवेदनशील निर्णयों से पहले लोकतांत्रिक सरकार को विश्वास में लेना उचित नहीं था? उन्होंने सख्त निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसे फैसलों की पुनरावृत्ति कतई नहीं होनी चाहिए।
प्रशासनिक अनुशासन का मुद्दा उठाते हुए ऊर्जा मंत्री (AK Sharma) ने बिजली संकट और आंधी-तूफान के समय अध्यक्ष के मुख्यालय में मौजूद न रहने पर भी तीखी आपत्ति जताई है। उन्होंने पत्र में लिखा कि मई के महीने में आए भीषण चक्रवाती आंधी-तूफान के कारण पूरे प्रदेश की विद्युत अवसंरचना और सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई थी, लेकिन जब इस संकट से निपटने के लिए 30 मई को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई गई, तब पता चला कि अध्यक्ष महोदय बिना किसी पूर्व सूचना के लखनऊ मुख्यालय से बाहर हैं और आगे भी तीन दिनों तक बाहर ही रहने वाले हैं।
मंत्री (AK Sharma) के काफी दबाव और आग्रह के बाद अध्यक्ष ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए, जिसे मंत्री ने किसी भी शीर्ष लोक सेवक का जनता के प्रति अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना और जनहित के विपरीत आचरण करार दिया। उन्होंने आदेश दिया है कि आगे से मुख्यालय छोड़ने से पहले अध्यक्ष अनिवार्य रूप से उन्हें अवगत कराएंगे। इसके साथ ही, मंत्री ने यह भी जोड़ा कि जहां इस भीषण गर्मी में तमाम बिजली कर्मियों ने सराहनीय कार्य किया है, वहीं जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने लापरवाही बरतकर सरकार को बदनाम करने की कोशिश की है, उनके खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और वर्तमान तबादला सत्र में उनका दूर दराज क्षेत्रों में यथायोग्य तबादला कर उसकी पूरी सूची मंत्री कार्यालय को सौंपी जाए। इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद और तीखे आरोपों पर जब पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने बेहद नपे-तुले शब्दों में केवल इतना ही कहा कि उन्हें ऊर्जा मंत्री के पत्र की जानकारी मिल चुकी है, लेकिन इस संबंध में उन्हें व्यक्तिगत रूप से कुछ नहीं कहना है; उनके लिए केवल उपभोक्ताओं का हित ही हमेशा सर्वोपरि है।
