कांग्रेस ने दिया नीतीश को एक और मौका, इस शर्त पर गठबंधन में हो सकते हैं शामिल

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रस्ताव दिया है कि अगर वह भाजपा का साथ छोड़ दे तो उन्हें महागठबंधन में शामिल किया जा सकता है। कांग्रेस का यह बयान उस समय आया है जब हाल ही में हुए विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान जदयू और भाजपा के बीच कुछ विरोधाभासी बयान आए हैं। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों दलों के बीच सब ठीक नहीं चल रहा है।

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पिछड़े व अति पिछड़े वर्गों के खिलाफ है मोदी सरकार : कांग्रेस

बिहार में कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में यह आम धारण बनी हुई है कि मोदी सरकार पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों के खिलाफ है। इसी कारण पिछड़ों और अति पिछड़ों की राजनीति करने वालों के पास भाजपा का साथ छोड़ने के अलावा कोई और दूसरा विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार भी पिछड़ों और अति पिछड़ों की राजनीति करते हैं अत: उन्हें भी बीजेपी का साथ छोड़कर गठबंधन में शामिल हो जाना चाहिए।

कांग्रेस करेगी गठबंधन का नेतृत्व

गोहिल ने आगे कहा कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर बनने वाले गठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस करेगी। 2019 के लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार को हराने के लिए हम राहुल गांधी की अगुवाई में जनता के बीच जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘अभी नीतीश कुमार फांसीवादी भाजपा के साथ हैं। हमें नहीं पता कि उनकी क्या मजबूरी है कि वह उनके साथ चले गए। जबकि सच तो यह है कि दोनों का साथ बेमेल है।’ जब गोहिल से पूछा गया कि यदि नीतीश कुमार महागठबंधन में वापसी करते हैं इस पर कांग्रेस का क्या रुख होगा? इस पर उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कुछ होने की संभावना बनती है तो हम अपने सहयोगी दलों के साथ इस पर चर्चा करेंगे। हां इतना जरूर है कि उन्हें भाजपा का साथ छोड़ना पड़ेगा।

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तेजस्वी ने कहा था, नीतिश के लिए बंद हो चुके हैं गठबंधन के दरवाजे

बता दें कि अभी कुछ महीने पहले बिहार के कुछ स्थानों पर हुई सांप्रदायिक हिंसा का हवाला देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा था कि नीतिश के लिए महागठबंधन के दरवाजे बंद हो चुके हैं। गोहिल ने कहा, ‘बिहार में यह साफ संदेश जा चुका है कि मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पिछड़ों और अतिपिछड़ों के खिलाफ है। ऐसे में जिन लोगों को भी पिछड़ों और अतिपिछड़ों की राजनीति करनी है उन्हें राजग से अलग होना पड़ेगा। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो राजग तो डूबेगा ही उसके साथ ही उन्हें भी डूबना पड़ेगा।’शक्ति सिंह ने कहा, ‘पासवान और कुशवाहा पिछड़ों और अति पिछड़ों की राजनीति करते हैं। जब लोग उनसे पूछेंगे कि ऊना में दलितों पर अत्याचार होता और भाजपा का एक नेता कहता है कि दलितों को पीटना चाहिए तो इसपर मोदी खामोश क्यों रहते हैं। उनको इसका जवाब देना पड़ेगा।’

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