भ्रष्ट होमगार्ड मेजर और इंस्पेक्टर प्रशिक्षण के नाम पर कर रहे जमकर वसूली

होमगार्ड
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रोहित सिंह 

लखनऊ। यूपी में योगी सरकार की तमाम सख्ती के बावजूद अधिकारियों की हराम की कमाई खाने की आदत सुधर नहीं पायी सरकार से तनख्वा मिलने के बावजूद अधिकारी ऊपरी कमाई के लिए किसी का भी हक मारने से तनिक भी नहीं चूकते हैं। ताजा मामला राजधानी लखनऊ के होमगार्ड विभाग का है। जहां अधिकारियों की भ्रष्टाचार की पोल खुलती दिखाई पड़ रही है। लेकिन इस भ्रष्टाचारियों के शोषण का शिकार 97 जवानों को होना पड़ रहा है। यहां पर प्रशिक्षण के लिए आये जवानों से फर्जी तौर पर अवैध तरीके से पैसे वसूले जा रहे हैं। इस मामले में केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान लखनऊ के इंस्पेक्टर और मेजर आरोप लगा है।

होमगार्ड जवानो से फर्जी तौर पर वसूलते थे पैसे

  • लखनऊ केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान जवान मृतक आश्रित कोटे के हैं जो आर्थिक दिक्कतों के दौर से गुजर रहे हैं।
  • ये जवान अपने घर से दूर यहां पर प्रशिक्षण के लिए आये हैं।
  • जिनसे इंस्पेक्टर एवं मेजर ने प्रशिक्षण में एवं कम परेड कराने के नाम पर 1000 रुपए लेते थे
  • वहीं वर्दी के नाम पर 1600 रुपए एवं शस्त्र पूजन के नाम पर सभी जवानों से 75 रुपए की वसूली की गयी है।
  • कुल मिलकर दोनों आरोपियों ने जवानों से 2 लाख 59 हजार 475 रुपए की वसूली की है।
  • परेड में फेल किये जाने के डर से हर के जवान द्वारा 1000 रुपए के हिसाब से 97000 रुपए वसूले गयी।
  • वहीं वर्दी के नाम पर सभी जवान 1600 रुपए लिये गये। 97 जवानों ने 1600 रुपए के हिसाब से 1,55,200  रुपए जमा किये।
  • शस्त्र पूतन के नाम पर सभी जवानों से 75 रुपए के हिसाब से 7275 रुपए की वसूली की गयी।

सीएम और डीजी को लिखे पत्र में हुआ खुलासा

  • इस भ्रष्टाचार का मामले तब सामने आया जब इस मामले में सीएम और डीजी,होमगार्ड को पत्र लिखे गये।
  • जवानों के तरफ से लिखे पत्र में कहा गया है कि 42 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा उनलोगों के साथ अमानवीय व्यवहार एवं भ्रष्टचार किया गया।
  • आगे लिखा गया कि हमलोग यहां पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से प्रशिक्षण के लिये आये हैं।
  • लेकिन जो बर्ताव हमलोगों के साथ किया गया है,बाध्य होकर इस पत्र को लिखना पड़ रहा है।
  • सभी के सिर से पिता का साया उठ गया है,किसी को अपनी बहन की शादी करानी है तो कई अत्यंत गरीब परिवार से है।

होमगार्ड जवानो से वसूले गए 2 लाख 59 हजार 475 रुपए

  • आरोप लगाया कि सीटीआई,कृष्णानगर में तैनात इंस्पेक्टर दीपक श्रीवास्तव के आदेश पर प्रशिक्षण में शख्ती न करने,
  • कम परेड कराने के नाम पर वसूली की गई।
  • इस मामले में आरोपी शिविर मेजर, हवलदार प्रशिक्षक नीरज पाण्डेय ने प्रत्येक टोली कमंडरों को वसूली के आदेश दिए।
  • इस आदेश में कहा गया कि तुम लोग सभी टोली से प्रति जवान 2000 रुपए मेरे पास जमा करवाओ।
  • नहीं तो परेड में सख्ती कराकर तुम लोगों को मार डालेंगे।
  • फेल करके घर भेज देंगे, फिर दुबारा अपने पैसे से ट्रेनिंग करना।
  • परेड में फेल करने का डर दिखाकर 97 जवानो से 97000 रुपए वसूले गये।
  • पैसा मिलने के बाद कहा गया कि तुम लोगों से परेड कम करायी जायेगी।
  • इसी तरह,वर्दी के नाम पर हर जवान 1600 रुपए लिये गये।
  • 97 जवानों ने 1600 रुपए के हिसाब से 1,55,200  रुपए जमा किये।
  • नाप लेने वाला टेलर दिन के बजाये रात में वर्दी का नाप लेने के लिये बुलाया जाता था।
  • क्योंकि मेजर नीरज पाण्डेय को इस बात का डर था कि दिन में नाप कराने में कहीं कोई देख ना ले।
  • इस तरह से सस्ते दर पर वर्दी सिलवाई गयी।
  • जवानों ने आगे लिखा है कि इंस्पेक्टर और मेजर ने भगवान को भी नहीं छोड़ा।
  • शस्त्र पूतन के नाम पर सभी जवानों से 75 रुपए के हिसाब से 7275 रुपए की वसूली की गयी।
  • यानि, मृतक आश्रितों से 42 दिन की ट्रेनिंग के दौरान इंस्पेक्टर और मेजर ने 2,59,475 रुपए की वसूली की।

बड़े अधिकारियों पर भी उठ रहे हैं सवाल

  • लेकिन इस पत्र सामने आने के बाद जिन अफसरों पर आरोप लगा है।
  • उनके साथ-साथ दूसरे बड़े अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
  • सवाल ये है कि ये भ्रष्टाचार का खेल इतने दिनों से चल रहा था और उन्हें इसकी तनिक भी भनक नहीं लगी।
  • अगर अधिकारियों को इसकी खबर थी तो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
  •  साथ ही उंगली बड़े अधिकारियों पर भी उठती है कि क्या वे भी इस बंदर-बांट में शामिल थे।
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