खाद्य विभाग के अफसर, कर्मचारी और कोटेदार की मिलीभगत करोड़ों रुपये का घोटाला

crores of rupees scam

लखनऊ। खाद्य एवं रसद विभाग की राशन वितरण प्रणाली में सेंध लगाकर करोड़ों रुपये का घोटाला कर डाला गया। इस पूरे घोटाले में खाद्य विभाग के कुछ अफसर, कर्मचारी और कोटेदार की मिलीभगत रही। एसटीएफ ने रविवार को कम्प्यूटर आपरेटर, कोटेदार समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर इस घोटाले से जुड़े कई सनसनीखेज खुलासे किये। एसटीएफ का दावा है कि पड़ताल अभी चल रही है और इसमें कई बड़े लोगों की गिरफ्तारी होगी।

एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि कोटेदारों और आपरेटरों ने आधार कार्ड के नम्बर को सैकड़ों बार बदलकर ई-पास मशीन से हजारों कुन्तल गेंहू-चावल की खरीदफरोख्त दिखा कर करोड़ों का वारा-न्यारा किया। शुरुआती चरण में जांच के बाद गिरफ्तार हुये लोगों में कोटेदार वजीरगंज निवासी मो. आमिर खान, कम्प्यूटर ऑपरेटर मो. अल्तमश और नोएडा का पुष्पेन्द्र पाल शामिल है। आमिर और अल्तमश सर्वर पर आधारकार्ड का नम्बर सम्बन्धित व्यक्ति से बायोमेट्रिक लगाता था। पुष्पेन्द्र भी इनकी कारस्तानी में शामिल रहता था। इनके पास से कम्प्यूटर और दो ई-पास मशीन भी बरामद हुई है। इस घोटाले की भनक इसी साल अप्रैल में विभाग को लग गई थी। लेकिन विभाग के बड़े अफसर इसे पूरी तरह से पकड़ नहीं पा रहे थे।

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जब विभागीय जांच में हर महीने यह गड़बड़ी सामने आने लगी तो सितम्बर में शासन ने एसटीएफ को इसकी जांच में लगाया। खाद्य आयुक्त कार्यालय ने एसटीएफ को उन ट्रांजेक्शन का ब्योरा दिया था जिसमें राशन लेने के लिये एक ही आधार संख्या का इस्तेमाल एक महीने में कई बार किया गया था। इसके बाद ही जांच में यह पूरा गोरखधंधा सामने आ गया। इस सम्बन्ध में एसटीएफ ने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज करायी है। खाद्य विभाग अंगूठा लगवाने के लिये एक ई-पास मशीन को कोटेदार को देता है। इस मशीन से वितरण के लिये उपभोक्ता के राशन कार्ड आईडी के सापेक्ष उसका आधार कार्ड नम्बर डालकर ई-पास मशीन पर अंगूठा लगवा लिया जाता है। एनआईसी के सर्वर पर इस आधार नम्बर और अंगूठे के निशान का मिलान सही होने पर कोटेदार राशन दे देता है। वर्तमान में इसी सिस्टम से राशन वितरण किया जा रहा है। घोटाला करने वालों ने इसी प्रक्रिया में सेंध लगा दी और कई महीनों तक विभाग को भनक तक नहीं लगी।

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