दलित महासभा के इस बड़े फैसले सपा-बसपा गठबंधन को बड़ा झटका, चुनावों पर पड़ेगा असर

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लखनऊ। दलित महासभा ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसका खामियाजा बसपा-सपा गठबंधन तगड़ा झटका लग सकता है। दलित महासभा की तरफ से 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के मौके पर एक समारोह में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को ‘दलित मित्र’ से सम्मानित करने का फैसला लिया है। यह फैसला अंबेडकर महासभा के अध्यक्ष लालजी प्रसाद निर्मल की तरफ से लिया गया है। जिसको लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है। इस मामले में महासभा के दो वरिष्ठ सदस्य हरीश चंद्र और एसआर दारापुरी ने लालजी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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दलित महासभा के फैसले से गठबंधन और लोकसभा चुनाव होगा प्रभावित

जानकारों की माने तो दलित महासभा के इस फैसले से सपा-बसपा गठबंधन को बड़ा झटका लग सकता है। दोनों पार्टियों की मेहनत मशक्कत के बाद अब जाके दलितों का वोट बैंक वापस लौटा है। वहीं सीएम योगी को दलित मित्र से सम्मानित किया जाना दलितों में एक बड़ा सन्देश ले जाएगा। यूपी व अन्य राज्यों में भारत बंद आन्दोलन के दौरान हुई हिंसा को लेकर दलितों का बीजेपी के खिलाफ आक्रोश है जो इस सम्मान के बाद ख़त्म हो जायेगा।

वहीं इस फैसले से दलितों का वोट काटने की पूरी संभावना है। बीजेपी जानते है कि अगर उसे सत्ता में वापसी करनी है तो उसे किसी भी कीमत पर दलित वोट को हासिल करना ही होगा। पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में दलित वोटों का अहम योगदान था।

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लालजी प्रसाद निर्मल के फैसले से नाराज अन्य सदस्य नाराज

दलित महासभा 14 अप्रैल को सीएम योगी को सम्मानित किया जाने के फैसले के खिलाफ आवाज उठने लगी। इस फैसले से महासभा के दो वरिष्ठ सदस्य हरीश चंद्र और एसआर दारापुरी बेहद नाराज हैं। उन्होंने निर्मल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एनुअल जनरल मीटिंग भी बुलाई है. हरीश चंद्र और दारापुरी का कहना है कि निर्मल ने अपनी सीमाओं को लांघा है।

इस मामले में बोलते हुए हरीश चंद्र ने कहा है कि महासभा का गठन अंबेडकर के विचार लोगों तक पहुंचाने के लिए किया गया था न कि किसी के निजी फायदे के लिए। उन्होंने कहा कि निर्मल की यूपी विधान परिषद में बीजेपी की टिकट पर नजर है।

दूसरी तरफ अध्यक्ष लालजी प्रसाद निर्मल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सीएम योगी को ‘दलित मित्र’ अवॉर्ड देने में कुछ भी गलत नहीं है, क्योंकि वो उत्तर प्रदेश में रहने वाले सभी लोगों के मित्र हैं। वो दलितों के भी मित्र हैं।

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विपक्ष ने सरकार पर लगाया दलित विरोधी होने का आरोप

बता दें कि 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान यूपी में भी कई जगहों पर हिंसा हुई, जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। विपक्ष लगातार सीएम योगी आदित्यनाथ पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाता आ रहा है। वहीं इन आरोपों के बीच अपनी छवि सुधारने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बाबा साहेब भीम राम अंबेडकर की तस्वीर हर सरकारी दफ्तर में लगाने का आदेश दिया था।

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