भिक्षुकों ने पुनर्वास की मांगों को लेकर प्रदर्शन किया

भिक्षुकों
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लखनऊ।  बदलाव संस्था के भिक्षावृत्ति मुक्ति अभियान के अन्तर्गत 30 दिवसीय जागरूकता अभियान के प्रथम चरण के समापन दिवस पर भिक्षुकों ने अपने पुनर्वास की 15 सूत्रीय मांगों को लेकर “हनुमान सेतु मन्दिर से समाज कल्याण निदेशालय तक पैदल मार्च” निकाल कर निदेशालय के सामने धरना दिया।

भिक्षुकों ने पुनर्वास की मांग

इस रैली एवं धरने में डॉ0 संदीप पाण्डेय सरंक्षक बदलाव व रेमन मैग्सेसे अवार्डी, शरद पटेल संयोजक भिक्षावृत्ति मुक्ति अभियान, महेन्द्र प्रताप सहसंयोजक भिक्षावृत्ति मुक्ति अभियान, शुभम सिंह चौहान, मनोज सिंह, रोहित वर्मा, रामजी वर्मा, प्रियंक वर्मा, श्रवण सिंह, मो0 शफीक, मनोज कुमार, दिवाकर सिंह, रोहित सिंह तथा लगभग 90 भिक्षुक साथी मौजूद रहे।भिक्षावृत्ति मुक्ति अभियान के संयोजक शरद पटेल ने धरना स्थल पर मौजूद साथियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बडे खेद के साथ कहना पडता है कि देश को आजाद हुए 70 वर्ष हो गए हैं, लेकिन हमारे देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपना पेट पालने के लिए भीख मांगने को मजबूर है।

तरक्की के संसाधनों पर पंूजीपतियों ने कब्जा कर रखा है, जिसके फलस्वरूप अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। सरकार ने गरीबी उन्मूलन के लिए योजनाएं बनायी हैं उनका मकसद गरीबों को किसी तरह जीवित रखना है। उनके रोजी, रोजगार के लिए स्थाई संसाधन विकसित करना नहीं है। यह इतिहास में पहली बार हो रहा है कि जब भिक्षुक साथी अपने पुनर्वास व अधिकारों के लिए तीन वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक को इस संवेदनशील समस्या के प्रति अवगत कराते हुए भिक्षुक साथियों ने अपने पुनर्वास की मंाग करते हुए कई बार पत्र दिए हैं, लेकिन सरकार के कान पर जूॅ तक नहीं रेंगा है।

भिक्षावृत्ति अभियान से जुड़े कई भिक्षुक साथियों का देहान्त हो गया है, जिनका इलाज संस्था द्वारा कराया जा रहा था। ऐसे ही न जाने कितने भिक्षुक साथियों का लावारिश में देहान्त हो जाता होगा इसका तो केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है। आखिर इन भिक्षुकों की लावरिस में मृत्यु के लिए कौन जिम्मेदार है?

जबकि उ.प्र. सरकार 1959 से भिक्षुकों को पुनर्वासित करने के लिए अधिकारियों,कर्मचारियों को केवल वेतन के रूप में लगभग 40 लाख रू0 दे रही है, जबकि अभी तक एक भी भिक्षुक को पुनर्वासित नहीं किया गया है। हम ऐसे भ्रष्ट व कामचोर अधिकारियों,कर्मचारियों को निलम्बित करने की पुरजोर मांग करते हैं। डॉ0 संदीप पाण्डेय, रेमन मैग्सेसे अवार्डी व संरक्षक बदलाव संस्था ने धरने को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह मांगने-खाने वाले लोग उन अधिकारियों व कर्मचारियों से कई गुना बेहतर हैं जो भिखारियों के नाम पर कई वर्षों से बिना किसी काम के वेतन ले रहे हैं।

भीख मांगना अपराध नहीं एक सामाजिक बुराई है। जब व्यक्ति के पास पेट पालने का कोई उपाय नहीं बचता है तो वह मजबूरी में भीख मांगने लगता है। कई वर्षों से यह भिक्षुक अपने पुनर्वास व हक के लिए संगठित होकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार इनके हक को दबाये हुए है। भिक्षुकगण समाज के सबसे वंचित लोग हैं। इनकी पुनर्वास की मांगों को सरकार को शीघ्र पूरा करना चाहिए, जिससे कि यह भी सम्मानजनक व गरिमापूर्ण जीवन जी सकें। सभा को महावीर प्रसाद मिश्रा, विजय बहादुर सिंह, मो0 शफीक, मनोज कुमार, दिवाकर सिंह आदि लोगों ने भी सम्बोधित किया। इसके बाद निदेशालय के बाहर नुक्कड़ नाटक “सार्थक” का मंचन कर जागरूकता अभियान के प्रथम चरण व धरने का समापन किया गया।

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