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सुप्रीम कोर्ट द्वारा फटकार के बाद डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम कंपनियों के छूटे पसीने

टेक /गैजेट्स डेस्क. सुप्रीम कोर्ट  द्वारा फटकार के बाद डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम  ने सभी कंपनियों को कहा है कि वो आज आधी रात से पहले बकाये का भुगतान करें. टेलिकॉम कंपनियों पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है. जिसके बाद आनन-फानन में टेलिकॉम विभाग द्वारा सभी कंपनियों को आज आधी रात से पहले तक भुगतान करने को कहा जा रहा है.

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शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टेलिकॉम कंपनियों के साथ-साथ टेलिकॉम विभाग को भी फटकार लगाई है,अक्टूबर में सुनवाई के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी तक इन कंपनियों को भुगतान करने का आदेश दिया है.

हालांकि, आज भारती एयरटेल  ने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू को लेकर कहा है कि वो 20 फरवरी तक 10 हजार करोड़ रुपये का भुगतान कर देगी. वहीं, बाकी रकम का भुगतान अगली सुनवाई से पहले करेगी.

कितना है कंपनियों पर कुल बकाया

पिछले साल नवंबर महीने में केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी थी कि टेलिकॉम विभाग के प्रति इन कंपनियों का कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये बकाया है. इसमें कंपनियों का लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज शामिल है. लाइसेंस के तौर पर अक्टूबर महीने तक कुल बकाया रकम 92,642 करोड़ रुपये और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के तौर पर 55,054 करोड़ रुपये बकाया है. सबसे अधिक बकाया भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया का है.

एयरटेल और वोडाफोन आइडिया पर सबसे अधिक बकाया

सरकार द्वारा नवंबर 2019 में दी गई जानकारी के अनुसार, भारती एयरटेल पर कुल 35,585 करोड़ रुपये बकाया है. इसमें 21,682 करोड़ रुपये लाइसेंस फीस और 13,904 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के तौर पर बकाया है. इसमें टाटा टेलिसर्विसेज और टेलिकनॉर नहीं शामिल है. जबकि, वोडाफोन आइडिया का 53,038 करोड़ रुपये बकाया है. इसमें 28,309 करोड़ रुपये लाइसेंस फीस और 24,730 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के तौर पर बकाया है.

भुगतान के लिए 3 महीने का दिया गया था समयसीमा

टेलिकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में कहा था, ‘सुप्रीम कोर्ट ने ग्रॉस रेवेन्यू और एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू की परिभाषा टेलिकॉम विभाग के अनुसार ही बताया है. कोर्ट ने बकाया भुगतान के लिए 3 महीने का समय दिया है.’

उन्होंने आगे कहा कि 24 अक्टूबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेशानुसार लाइसेंस फीस की रकम प्रोविजनल है और यह रिवाइज हो सकती है. उन्होंने इशारा किया था कुल बकाया रकम 1.47 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है.

टेलिकॉम मंत्री से जब पूछा गया कि क्या एजीआर पेमेंट को लेकर सरकार इन टेलिकॉम कंपनियों को पेनाल्टी और ब्याज से राहत देगी, तो इसपर उन्होंने बताया कि अभी तक सरकार की तरफ से ऐसा किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जा रहा है. सरकार ने भुगतान की समयसीमा में राहत देने की बात से इनकार कर दिया था.

सरकार से राहत की उम्मीद में हैं कंपनियां

बता दें कि संकट के दौर से गुजर रही टेलिकॉम कंपनियों लगातार इस कोशिश हैं कि पेनाल्टी और ब्याज के मोर्चे पर उन्हें सरकार से राहत मिल सके. हाल ही में वोडाफोन ने कहा था कि कंपनी की मौजूदा हालत चिंताजनक है और अगर उसे सरकार से राहत की उम्मीद है. 5 फरवरी को वोडाफोन ने कहा था,

‘अक्टूबर महीने में देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एडजस्टेड ग्रॉस रिवेन्यू (Adjusted Gross Revenue) को लेकर जो फैसला सुनया, वो टेलिकॉम इंडस्ट्री के अनुकूल नहीं है. कंपनी ने बयान में आगे कहा कि कंपनी तत्परता से भारत सरकार से कई तरह के राहत की उम्मीद कर रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विभिन्न दरें और ब्याज का पेमेंट समय रहते किया जा सके. ऐसा करने से कंपनी को समय रहते अपनी प्रतिबद्धता को पूरी करने में मदद मिल सकेगी.

क्या होता है AGR

टेलिकॉम कंपनियों को रेवेन्यू का कुछ हिस्सा सरकार को स्पेक्ट्रम फीस जिसे स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज  और लाइसेंस फीस के रूप में जमा करना होता है. टेलिकॉम कंपनियों का डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशन्स से लाइसेंस अग्रीमेंट होता है. अग्रीमेंट में ही एजीआर से जुड़े कंडीशन्स होते हैं.

 

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