1090 बच्चे की हत्या का मामला, कुर्सी बचाने के लिए दिव्यांग कलाम को बनाया हत्यारोपी!

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लखनऊ। मासूम ऋतिक हत्याकांड का खुलासा सही है या गलत ये बता पाना पुलिस के लिए सिरर्दद बन हुआ है। कई सवालों के जबाब पुलिस को कठघरे में खड़ा कर रहे है। ऊपरी दवाब में कुर्सी बचाने के लिए एसएसपी ने सीएम योगी से सम्मानित दिव्यांग कलाम को हत्यारोपी मात्र इसलिये बता दिया कि घर वालों ने उस पर ही हत्या के आरोप लगाये थे। जबकी इस पूरे प्रकरण पुलिस के पास ऐसे कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि जिसमें उसके हत्यारे होने के सबूत मिल रहे हो। सीसीटीवी फुटेज से लेकर उसकी काल डिटेल में उसके वहां पर होने की पुष्टि भी पुलिस नही कर पा रही है। समाजसेवी संगठनों ने भी इस हत्याकाण्ड़ के खुलासे को लेकर पुलिस अधिकारियों से मिलकर विरोध जताया है।

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कलाम को किस आधार पर बनाया हत्यारोपी

जिस कलाम को पुलिस ने हत्यारोपी बनाया वह लोगों की जान बचाने वाला एक साहसिक युवक था। जिसे पहले कई बार सम्मानित किया जा चुका है। जिससे यह बात तो साफ है कि वह पेशेवर बदमाश नहीं है। इस संबंध में जब पुलिस से जानकारी की गयी कि किस आधार पर उसे हत्यारोपी बनाया गया है तो वह बगले झांकने लगी। उसका तर्क था कि परिजनों समेत मौहल्ले के लोगों ने उसे दबंग बताया था कि वह एक अपराधी प्रवृति था। जो बच्चों को अक्सर बेल्ट से मारता-पीटता था और रूपये की वसूली करता था। हत्याकाण्ड के बाद से लापता होना उसे गुनहगार बनाता है। वही पुलिस ने कलाम पर हत्या के साथ ही उस पर मृतक की बहन से साथ छेडख़ानी तक का आरोप लगा दिया। जबकी उसके खिलाफ कहीं कोई भी मामला दर्ज नहीं है। लखनऊ पुलिस के इसी कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

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खुद पहुंचा था हजरगंज थाने

समाजसेविका प्रिया सक्सेना ने बताया कि वह बीते कई सालों से कलाम का जानती है। उसने उसके साथ बीते कई माह 1090 के पास फुटपाथ पर बच्चों को पढ़ाया है। जिस कलाम पर बच्चों को मारने पीटने का आरोप लग रहा है। वह उन्के बुरी लतों पर डांटता था। नशे के लती हो गये बच्चों को वह फुटपाथ से हटाकर घर भेज देता था। उन्होने बताया कि हत्याकाण्ड़ के दो दिन बाद उसके पास कलाम का फोन आया था जिसमें उसने बताया था कि वह हत्याकाण्ड़ वाले दिन गांव में था। जहां पर मुझे पता चला कि मुझे हत्यारा समझ कर पुलिस मुझे तलाश कर रही है। जिस पर मैने उसे यह कह कर हजरतगंज थाने भेज दिया कि अगर तुम बेगुनाह हो तो पुलिस तुम पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी। लेकिन इसके विपरीत कलाम के वहां पहुचनें पर पुलिस ने उसे जमकर थप्पड़ मारे, उसके दोस्त को धमकाकर भगा दिया और उसे गिर तार कर लिया। जबकी पुलिस उसकी गिर तारी दिलकुशा गार्डन से दिखायी है।

हत्यारोपी कलीम निकला नाबालिग

जेल भेजा गया रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरूस्कार विजेता कलाम नाबलिग है। जिसकी पुष्टि कोर्ट भेजने से पहले कराये गये उसकी मेडिकल रिर्पोट में निकली। जिसका मुकदमा अब जुवेनाइल कोर्ट में चलेगा।

सीएम ने नवाजा था रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार से

कलाम की बहन ने फेसबुक पर लिखा है कि उसका भाई उसके लिए पैसे इकट्ठा करके सबसे बड़ा टेडी बियर लाया था और गि ट किया था। उसका भाई हत्यारा नहीं हो सकता। जिस दिव्यांग मोह मद कलाम को गिर तार कर लखनऊ पुलिस हत्याकांड के खुलासे की आड़ में वाहवाही लूटने के फिराक में थी, वह दिव्यांग एक बहादुर इंसान है। हत्या के आरोप में गिर तार मोह मद कलाम की बहादुरी पर खुद मु यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसे रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से नवाजा और उसकी जांबाजी का स मान किया था। इतना ही नहीं मोह मद कलाम के अच्छा इंसान बनने के लिए पढऩे की ललक देखकर महिला कल्याण विभाग ने पढ़ाने का जि मा तक उठा लिया। गरीबी में जी कर भी बहादुर कलाम ने दिन में पढ़ाई और रात में गुब्बारे बेचकर पेट पालने का रास्ता चुना था। पुलिस ने जब खुलासा किया तो कलाम के पास पहनने के लिये दो जोड़ी सही कपड़े नहीं थे। वह बैग लेकर कहां जाएगा और वह बैग कहां से लाएगा। वाहवाही लूटने के चक्कर में लखनऊ पुलिस की करतूत ने प्रदेश सरकार और खुद सीएम योगी को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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