Site icon 24 GhanteOnline | News in Hindi | Latest हिंदी न्यूज़

घर में इस जगह न रखें मंदिर, रिश्तों में बढ़ सकता है तनाव

puja ghar

puja ghar

हिंदू संस्कृति में घर का मंदिर (Temple) केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और ईश्वर से जुड़ाव का केंद्र माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि घर में मंदिर गलत दिशा, गलत स्थान या गलत तरीके से रखा जाए, तो इसका सीधा असर घर के वातावरण, मन की शांति और पारिवारिक सुख पर पड़ सकता है। कई बार अनजाने में की गई छोटी-सी भूल भी तनाव, अशांति और नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन जाती है। आइए जानते हैं घर के मंदिर को रखने की कौन सी दिश शुभ हैं और किन जगहों पर मंदिर को रखने से बचना चाहिए।

मंदिर (Temple) के लिए सबसे शुभ दिशा कौनसी है?

वास्तु शास्त्र में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को देवताओं का स्थान माना गया है। घर का मंदिर हमेशा इसी दिशा में होना चाहिए। इस दिशा में मंदिर होने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यदि उत्तर-पूर्व में जगह न हो, तो आप उत्तर या पूर्व दिशा का चयन भी कर सकते हैं।

भूलकर भी यहां न रखें मंदिर (Temple) !

कई बार अनजाने में हम मंदिर (Temple) ऐसी जगहों पर रख देते हैं जो भारी वास्तु दोष पैदा करते हैं।

बेडरूम में मंदिर: बेडरूम में मंदिर रखना पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव पैदा कर सकता है। यदि मजबूरी में मंदिर वहां रखना पड़े, तो रात को सोते समय मंदिर पर पर्दा जरूर डालें।

रसोई घर में मंदिर: सिंक या चूल्हे के ठीक ऊपर या नीचे मंदिर नहीं होना चाहिए।

सीढ़ियों के नीचे: सीढ़ियों के नीचे मंदिर बनाना परिवार की उन्नति में बाधा उत्पन्न करता है।

बाथरूम के पास: शौचालय के बगल में या उसके ऊपर-नीचे की दीवार से सटा हुआ मंदिर कभी नहीं होना चाहिए।

मूर्तियों को लेकर रखें ये सावधानी!

खंडित मूर्ति: मंदिर में कभी भी टूटी हुई या खंडित मूर्ति न रखें। यह घर में नकारात्मकता लाता है।

मूर्तियों की संख्या: एक ही भगवान की कई मूर्तियां रखने से बचें। साथ ही, मूर्तियों का मुख एक-दूसरे के सामने नहीं होना चाहिए।

रौद्र रूप: घर के मंदिर में कभी भी देवी-देवताओं की क्रोधित मुद्रा वाली तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए।

पूर्वजों की तस्वीर और मंदिर (Temple) 

अक्सर लोग मंदिर (Temple) के अंदर ही अपने पूर्वजों की तस्वीरें रख देते हैं, जो वास्तु के अनुसार गलत है। पूर्वजों का स्थान आदरणीय है, लेकिन उन्हें देवताओं के साथ मंदिर में नहीं रखना चाहिए। उनकी तस्वीरें आप दक्षिण की दीवार पर लगा सकते हैं।

पूजा करते समय आपका मुख

पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना श्रेष्ठ माना जाता है। पूर्व दिशा ज्ञान और उत्तर दिशा धन-समृद्धि का प्रतीक है।

Exit mobile version