आज काल भैरव जयंती (Kaal Bhairav Jayanti) है। इसे काल भैरव अष्टमी भी कहा जाता है। हर साल काल भैरव अष्टमी मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाते हैं। इस विशेष दिन पर भगवान काल भैरव की पूजा होती है जोकि भगवान शिव के ही उग्र रूप हैं। मान्यता है कि काल भैरव अष्टमी (Kaal Bhairav Ashtami) वाले दिन काल भैरव भगवान की अगर विधि-विधान से पूजा की जाए तो जिंदगी से नकारात्मकता दूर भाग जाती है। साथ ही कई तरह के ग्रह दोष भी खत्म होते हैं। इसके अलावा इस दिन काल भैरव बाबा को पूजने से हर तरह का डर भी खत्म होता है।
काल भैरव (Kaal Bhairav) में से काल का मतलब होता है समय और भैरव का मतलब होता है भय या डर को दूर करने वाला। काल भैरव के आगे काल यानी समय भी नतमस्तक हो जाता है। ऐसे में काल भैरव बाबा के भक्तों को हर नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिल जाती है। हालांकि इनकी पूजा के समय में कुछ विशेष ध्यान देना होता है ताकि कुछ गलतियां ना हो जाए, क्योंकि इसका परिणाम गलत भी हो सकता है। नीचे जानें आखिर काल भैरव अष्टमी वाले दिन किन गलतियों को करने से बचना चाहिए?
काल भैरव अष्टमी (Kaal Bhairav Ashtami) पर ना करें ये गलतियां
1. काल भैरव अष्टमी (Kaal Bhairav Ashtami) के दिन बड़े-बुजुर्गों की खूब सेवा करनी चाहिए। मन में उनके प्रति प्रेम लाना चाहिए। इस दिन अपने मन को शांत रखना चाहिए। पूजा करते वक्त किसी के लिए भी बुरा भाव मन में नहीं रखना चाहिए।
2. काल भैरव जयंती वाले दिन मांस और मदिरा का सेवन करने से बचना चाहिए। नॉनवेज समेत हर तरह के तामसिक भोजन से बचना चाहिए। पूजा में इन चीजों को अर्पित कर सकते हैं लेकिन इनका सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
3. इस दिन साफ-सुथरे रहें। वैसे तो हर दिन पवित्र रहना चाहिए लेकिन इस खास दिन पर इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। काल भैरव जयंती पर स्नान करके मन में वासना के विचार तो बिल्कुल भी नहीं लाने चाहिए। अगर खुद के मन पर कंट्रोल कर लेंगे तो आपकी ये पूजा सफल मानी जाएगी और आपको इसके कई फायदे भी मिलेंगे।
4. आपको ये मालूम होना चाहिए कि काल भैरव बाबा का वाहन एक कुत्ता है। उन्हें जानवरों से काफी लगाव हैं। ऐसे में काल भैरव जयंती पर विशेष रूप से जानवरों के प्रति कोई गलत व्यवहार ना करें। अगर आप इस दिन इन्हें भोजन करवाएंगे तो आप पर काल भैरव बाबा की विशेष कृपा होगी।









