हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर होलिका दहन किया जाता है। फिर उसकी अगली सुबह रंगों वाली होली खेली जाती है, लेकिन होली के पावन और उल्लास से भरे पर्व से पहले होलाष्टक (Holashtak ) लगते हैं। होलाष्टक वो आठ दिन माने जाते हैं जब जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को मारने के लिए उसके पिता हिरण्यकश्यप के कहने पर यातनाएं दी गईं थीं।
यही कारण है कि ये आठ दिन बहुत अशुभ माने जाते हैं और इन दिनों में शुभ और मांगलिक काम वर्जित होते हैं। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि होलाष्टक वकी अवधि में ग्रह उग्र रहते हैं। इसलिए इस आठ दिनों में शुभ काम किए जाते हैं, तो उसके अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। हालांकि, इस दौरान कुछ विशेष उपाय अवश्य किए जाते हैं, जिससे जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।
होलाष्टक (Holashtak ) के उपाय
घर में गंगाजल छिड़कें: होलाष्टक के दौरान रोज सुबह स्नान करने के बाद घर में गंगाजल छिड़कें। ऐसा करने से घर पावन रहता है और सकारात्मकता रहती है।
धूप या कपूर जलाएं: होलाष्टक के दौरान घर में सुबह-शाम गुग्गुल, लोबान, धूप या कपूर जलाएं। ऐसा करने से भी नकारात्मकता दूर होती है।
प्रमुख द्वार पर हल्दी और कुमकुम छिड़कें: होलाष्टक के दौरान घर के प्रमुख द्वार पर हल्दी और कुमकुम छिड़कें। इससे घर में बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं कर पाती हैं।
रोज हनुमान चालीसा पढ़ें: होलाष्टक के दौरान रोज हनुमान चालीसा पढ़ें। इन दिनों में लगातार 11, 21 या 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।
कब से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक (Holashtak ) ?
पंचांग के अनुसार इस साल होलाष्टक (Holashtak ) की शुरुआत 24 फरवरी 2026 से हो रही है। होलाष्टक 03 मार्च 2026 को समाप्त होंगे। क्योंकि इस साल 03 मार्च को होलिका दहन है। होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक की अशुभ अवधि समाप्त हो जाती है।








