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डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा- एंट्रेंस, सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षाएं ऑनलाइन कराने पर करेंगे विचार

नई दिल्ली। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि वार्षिक एवं सेमेस्टर प्रणाली की परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया पर भी विचार किया जाना उचित होगा। वार्षिक प्रवेश परीक्षा को भी राज्य विश्वविद्यालयवार ऑनलाइन कराए जाने पर विचार किया जाए।

ऑनलाइन क्लास की समय सारिणी बनाएं

डॉ. शर्मा गुरुवार को ‘कोविड-19: शिक्षा की भावी दिशा’ विषय पर राज्य उच्च शिक्षा परिषद के तत्ववाधान में आयोजित वेबिनार में बोल रहे थे। इससे पहले वेबीनार का औपचारिक उद्घाट्न किया। इसकी अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने की।

इसमें जूम ऐप के माध्यम से जहां 500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, वहीं यू-ट्यूब के माध्यम से 12 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने भावी शिक्षा की दिशा की बारीकियों को समझा। डॉ. शर्मा ने कहा कि शिक्षकों द्वारा क्लास रूम में दिए जाने वाले व्याख्यान को विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए।

ऑनलाइन शिक्षा को लगभग 10 गुना बढ़ाना होगा

परिषद के अध्यक्ष प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि आज हमारे सामने जो सबसे बड़ी चुनौतियां है उनमें पाठ्यक्रम को पूरा करना, परीक्षा और परीक्षा परिणाम के साथ-साथ नए सत्र में प्रवेश प्रक्रिया को पूरा करना प्रमुख है। इसमें ऑनलाइन शिक्षा निश्चित तौर पर बेहतर विकल्प है। ऑनलाइन शिक्षा फेस-टू-फेस टीचिंग का पूर्ण विकल्प तो नहीं है लेकिन एक विकल्प अवश्य है।

प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस. गर्ग ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल रणनीति तैयार कर सीमित संसाधनों में उनका उचित क्रियान्वयन करें। इग्नू के पूर्व प्रति कुलपति प्रो. एमएम पंत ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा को लगभग 10 गुना बढ़ाना होगा। भारत में अभी मोबाइल से ज्यादा बड़ी तकनीकी की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है क्योंकि पहले उसको चलाने में पूर्ण रूप से सक्षम बनाना आवश्यक होगा।

नई तकनीकी पर हो शिक्षकों का प्रशिक्षण

आईआईटी कानपुर के पूर्व निदेशक एवं प्रो. संजय जी ढांगे ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए दो कैडरों का निर्माण कराना जरूरी होगा। इसमें पहला एकेडमिक एसोसिएट दूसरा टेक्निकल एसोसिएट। नई तकनीकी पर शिक्षकों का प्रशिक्षण भी कराया जाए। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीपी शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों व उद्योगों के बीच कंसोर्टियम तैयार किया जाए। इस दौरान प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भी अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।

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