औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती का समावेश कर कमाया जा सकता है लाभ: डॉ. कालरा

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लखनऊ। केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) लखनऊ और झारखंड राज्य आजीविका प्रमोशन सोसाइटी, ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड राज्य सरकार के बीच हुये समझौते के अंतर्गत एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलवार को किया गया। इस दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन सीमैप मुख्य वैज्ञानिक डॉ. आलोक कालरा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में झारखंड राज्य आजीविका प्रमोशन सोसाइटी के कर्मचारी और किसानो ने हिस्सा लिया।

औषधीय एवं सगंध पौधों को लेकर डॉ. कालरा ने साझा की जानकारी

डॉ. कालरा ने एरोमा मिशन की गतिविधियों के बारे में जानकारी साझा करते हुए कहा कि परंपरागत फसलों के फसल चक्र मे औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती का समावेश कर लाभ कमाया जा सकता है जिससे भूमि कि उर्वरता भी बनी रहती है। इस दौरान उन्होंने अपील करते हुए कहा कि औषधीय एवं सगंध फसलों की खेती के साथ-साथ उनके प्रसंस्करण एवं भंडारण की जानकारी भी लेकर जाएं क्योंकि इनका भी उतना ही महत्व है। इससे किसानों के उत्पादन को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता प्राप्त हो सकेगी और उन्हें उसका अधिक लाभ एवं उचित मूल्य मिल सकेगा।

बता दें कि इस मौके पर डॉ. आलोक कालरा, डॉ. संजय कुमार, डॉ. आर के लाल, डॉ. आर के श्रीवास्तव, डॉ. एच पी सिंह, डॉ. राम सुरेश शर्मा, डॉ. राम स्वरूप वर्मा, डॉ. राजेश कुमार वर्मा व श्री राम प्रवेश यादव आदि उपस्थित रहे।

दूसरे दिन का संभावित कार्यक्रम

कार्यक्रम के दूसरे दिन कालमेघ, तुलसी, सतावर एवं सर्पगंधा के उत्पादन की उन्नत कृषि क्रियाओं पर जानकारी दी जायेगी साथ ही प्रतिभागियों को उन्नतशील कृषकों के प्रक्षेत्रों का भ्रमण भी कराया जा सकता है। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम सत्र में औषधीय एवं सगंध पौधों की नर्सरी की विधियों का प्रदर्शन किया जाएगा व सुगंधित तेलों एवं औषधीय पौधों का विपणन विषय पर परिचर्चा की जाएगी। कार्यक्रम का समापन प्रमाण-पत्र वितरण से किया जाएगा।

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