एरोमा मिशन एक ‘जीवन परिवर्तन मिशन’: डॉ आर ए माशेलकर

एरोमा मिशनएरोमा मिशन

लखनऊ। सीएसआईआर-सीमैप द्वारा गुरुवार को अपनी हीरक जयंती एवं एरोमा मिशन के एक वर्ष पूरे होने पर पत्रकार वार्ता एवं पद्म विभूषण-डॉ आर ए माशेलकर, पूर्व महानिदेशक, सीएसआईआर का व्याखयान का आयोजन किया गया। डॉ आलोक कालरा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि एक वर्ष में लगभग 800 हेक्टेयर में सगंध पौधों की खेती देश भर में विशेषकर सूखा-ग्रस्त, ऊसर एवं बाढ़-ग्रस्त क्षेत्रों में किया गया है। इससे लगभग 8 करोड़ मूल्य का सुगंधित तेल किसानों के द्वारा एरोमा उद्योग को दिया गया।

एरोमा मिशन को लेकर किसानों ने साझा किये अनुभव

इस परिचर्चा में बस्तर, कच्छ, बिहार, दुधवा, कडलूर, ऊटी, बुंदेलखण्ड, विदर्भा, मराठवाड़ा एवं उडीसा से आए लगभग 25 प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। किसानों ने सीमैप के द्वारा समय समय पर प्रदान पौध सामग्री, आसवन इकाई एवं तकनीकी सहायता को अपनी सफलता का राज बताया और आशा जतायी कि वे अपने प्रयासों से भारत को पामरोजा, खस तथा जिरेनियम में अग्रणी बनाएंगे। किसानों से डॉ आर ए माशेलकर ने भी बातचीत की तथा विश्वास जताया कि सीमैप के प्रयासों से किसानों की आय कई गुना की जा सकती है। उन्होने सीमैप द्वारा आम किसान के जीविकोपार्जन की सम्भावनाएं बढ़ाने पर संस्थान की भी भूरी –भूरी प्रशंसा की। उन्होने एरोमा मिशन को “जीवन परिवर्तन मिशन” भी बताया।

 

इस अवसर पर डॉ माशेलकर द्वारा “फ्रॉम इंक्रिमेंटल टू डिस्रप्टिव गेम-चेंजिंग इनोवेशन” विषय पर व्याख्यान भी दिया गया। मुख्य कार्यक्रम में डॉ माशेलकर द्वारा अपने व्याख्यान में भारत को गेम-चेंजिंग इनोवेशन के द्वारा ही विकासशील से विकसित देश बन सकता है, जिसके लिए हमे युवा शक्ति को बढावा देना चाहिये।

पढ़ें:- सीमैप की ‘एरोमा मिशन योजना’ किसानों को बना रही है आर्थिक रुप से सशक्त

सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक प्रो. अनिल कु. त्रिपाठी द्वारा डॉ माशेलकर का स्वागत सीमैप प्रांगण में तुलसी का पौधा एवं खस का गुलदस्ता व उससे बनी जैकेट देकर किया गया।  प्रो. त्रिपाठी ने इस अवसर पर कहा कि संस्थान के वैज्ञानिकों का सदैव यही प्रयास रहता है कि वह विज्ञान द्वारा समाज के हित के लिये कार्य करे। आयोजन समिति के अध्यक्ष, डॉ आलोक कालरा ने मुख्य अतिथि का परिचय सभा में उपस्थित लोगों को किया।

इस अवसर पर क्लीन जर्म की टेक्नॉलजी का एमओयू तथा तुलसी की प्रजाती सिम-शिशिर भी रिलीज की गयी। कार्यक्रम में डॉ नित्यानंद, डॉ काम्बोज, डॉ शाहने, डॉ आलोक धवन, डॉ तपस के कुंडु भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रीति श्रीवास्तव द्वारा किया गया।

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