इंजीनियर दिवस: आज देश को जरुरत है मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या जैसे इंजीनियर की

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मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या

नई दिल्ली। आज इंजीनियर दिवस है। देश में इंजीनियर की संख्या तो लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन स्किल की कमी होने के कारण देश-समाज के समग्र विकास में उनका योगदान पूर्ण रूप से नहीं हो पा रहा। हाल ही में एक कार्यक्रम एक दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि युवाओं में प्रतिभा का विकास होना चाहिए। उन्होंने डिग्री के बजाय योग्यता को महत्व देते हुए कहा था कि छात्रों को स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देना चाहिए। आज देश में बड़ी संख्या में इंजीनियर पढ़ लिख कर निकल तो रहे हैं लेकिन उनमें ‘स्किल’ की कमी है, जिससे लाखों इंजीनियर हर साल बेरोजगार रहे जाते हैं। कम्पनी की जरूरतों के हिसाब से उन्हें काम नहीं आता। एक खबर के मुताबिक हर साल देश में लाखों बच्चे इंजीनियर की पढाई पूरी करके निकलते हैं,लेकिन उनमें से महज 15 प्रतिशत को ही अपने काम के अनुरूप नौकरी मिल पाती है। आइये जानते हैं मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या के जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें और किस तरह हुई ‘इंजीनियर दिवस’ की शुरुआत।

मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या की जयंती

असल में इंजीनियर वह नहीं है जो सिर्फ मशीनों के साथ काम करे, बल्कि वह है जो किसी भी क्षेत्र में अपने मौलिक विचारों और तकनीक के माध्यम से मानवता की भलाई के लिए काम करे। इंजीनियरिंग को नई सोच और दिशा देने वाले महान इंजीनियर भारत रत्‍‍‍न मोक्षगुंडम मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या की जयंती (15 सितंबर) को भारत में ‘इंजीनियर दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या अपने समय के सबसे प्रतिभाशाली इंजीनियरों में से एक थे, जिन्होंने बांध और सिंचाई व्यवस्था के लिए नए तरीकों का इजाद किया। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण की तकनीक में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने आधुनिक भारत में सिंचाई की बेहतर व्यवस्था और नवीनतम तकनीक पर आधारित नदी पर बांध बनाए। आज से लगभग 100 साल पहले जब साधन और तकनीक ज्यादा उन्नत नहीं थे, तब उन्होंने आम आदमी की समस्याओं को सुलझाने के लिए इंजीनियरिंग में कई तरह के इनोवेशन किए और व्यावहारिक तकनीक के माध्यम से आम आदमी की जिंदगी को बेहद आसान बनाया।

इंजीनियर की रचनात्मक भूमिका

देश और समाज के निर्माण में एक इंजीनियर की रचनात्मक भूमिका कैसे होनी चाहिए इस बात को मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या के प्रेरणादायक जीवन गाथा से जाना और समझा जा सकता है। वो एक कुशल इंजीनियर के साथ वह देश के श्रेष्ठ शिक्षाविद् और अर्थशास्त्री भी थे। बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स की स्थापना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) द्वारा वर्ष 1928 में तैयार पंचवर्षीय योजना से भी आठ वर्ष पहले 1920 में अपनी पुस्तक ‘रिकंस्ट्रक्टिंग इंडिया’ में उन्होंने भारत में पंचवर्षीय योजना की परिकल्पना प्रस्तुत की थी। 1935 में उनकी एक पुस्तक ‘प्लांड इकॉनामी फॉर इंडिया’ देश के विकास के लिए योजना बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी। ईमानदारी और कर्तव्यों के प्रति वचनबद्धता उनके जीवन की सबसे बड़ी विशेषता थी।

आर्थिक विकास के लिए जरूरी है तकनीकी शिक्षा का ज्ञान

गांधी जी ने कहा था कि देश की समग्र आर्थिक विकास के लिए तकनीकी शिक्षा का गुणवत्तापूर्ण होना जरूरी है। इसे प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने कहा था कि कॉलेज में हाफ-हाफ सिस्टम होना चाहिए मतलब आस्धे समय किताबी ज्ञान दिया जाना चाहिए और वही आधे समय में उसी किताबी ज्ञान को असल जिंदगी में भी प्रयोग किया जाना चाहिए। वास्तव में हम अपने ज्ञान को बहुत ज्यादा व्यावहारिक नहीं बना पाए हैं। नंबर होड़ युक्त शिक्षा प्रणाली ने मौलिकता को खत्म कर दिया। इस तरह की मूल्यांकन और परीक्षा प्रणाली नई सोच और मौलिकता के लिए ठीक नहीं है। आज तकनीकी शिक्षा में खासतौर पर इंजीनियरिंग में इनोवेशन की जरूरत है, सिर्फ किताबी ज्ञान की बदौलत हम विकसित देश बनने का सपना साकार नहीं कर सकते।

ये भी देखें:- इंजीनियर दिवस: इनकी याद में हर साल मनाया जाता है ये दिवस 

देश को जरुरत है मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या जैसे इंजीनियर की

आज देश को मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या जैसे इंजीनियरों की जरूरत है जो देश को एक नई दिशा दिखा सकें। विश्वेश्वरय्या जी को अपने कार्य और समय के प्रति जो लगन, निष्ठा, प्रतिबद्धता थी वो शायद ही अब किसी में देखने को मिलेगी। उनके अन्दर इतनी काबिलियत थी कि वो चाहते तो अपनी कामयाबी के आधार पर विदेशों में भी काम कर सकते थे पर उन्होंने अपने देश के प्रति छल नहीं किया। देश की आजादी के बाद प्रयास रहा है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन भी लाया जाए, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके। इस उद्देश्य में हम सफल भी रहे हैं लेकिन अभी भी इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी को आम जनमानस से पूरी तरह से जोड़ नहीं पाए हैं। इसके लिए देश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई को कौशल विकास से जोड़ना होगा, जिससे इंजीनियर अपने स्किल के साथ काम कर सकें। साथ ही पूरे इंजीनियरिंग क्षेत्र को आकर्षक, व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाने की जरूरत है।

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