महिला आयोग सदस्य की गिरफ्तारी पर उच्चतम न्यायालय ने लगाई रोक

कोर्ट
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लखनऊ। सोशल एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर द्वारा गाजियाबाद की एक महिला पर उन्हें तथा उनके पति आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को फर्जी रेप का आरोप लगा कर फंसाने के मामले में थाना गोमतीनगर, लखनऊ में दर्ज मुकदमे में आरोपी पूर्व महिला आयोग सदस्य अशोक पाण्डेय द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार तथा नूतन को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया है।

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अदालत ने विवेचना में पूरी मदद करने के आदेश दिए…

मालूम हो कि जस्टिस ए के सिकरी तथा जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने अशोक पाण्डेय के महिला आयोग की सदस्य होने के कारण तब तक के लिए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें इस मामले की विवेचना में पूरी मदद करने के आदेश दिए है। आपको बता दें कि यह मामला 22 जून 2015 को दर्ज किया था जिसमे नूतन ने तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति द्वारा महिला आयोग के सदस्यों की सहायता से फर्जी रेप केस में फंसाने के प्रयास का आरोप लगाया गया था।

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पुलिस ने 13 जुलाई 2015 को केस में अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी जिसे सीजेएम ने अपने आदेश 22 दिसंबर 2015 द्वारा खारिज करते हुए पुनर्विवेचना के आदेश दिए थे। पिछले वर्ष अप्रैल 2017 में प्रजापति को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। शेष अभियुक्तों पर विवेचना जारी है। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अशोक पाण्डेय, कथित रेप पीडि़ता तथा उसके पति की याचिका खारिज कर दी थी।

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