मनकामेश्वर मठ में इको फ्रेंडली होलिका दहन के साथ मनाया जाएगा फागोत्सव

Please Share This News To Other Peoples....
लखनऊ। डालीगंज के प्राचीन महादेव मंदिर मनकामेश्वर मठ मंदिर में इस बार होली के अवसर पर चार दिवसीय फाघोत्सव 2018 आयोजित किया जाएगा। सोमवार उत्सव के प्रथम दिन 26 फरवरी को सायं 6 बजे मठ-मंदिर प्रांगण फूलों की होली होगी,  इस आयोजन के लिए रविवार से ही मंदिर को अलग-अलग रंग के फूलों से सजाया जा रहा है। साथ ही साथ 101 किलो पुष्पों के साथ फूलों इस होली का मुख्य उद्देश्य समाज से कैमिकल रंगो से उत्पन होने वाले खतरो से लोगो को जागरूक कर इन रंगो का पूर्णतया सामजिक बहिस्कार करना है। पर्व के दूसरे दिन मंगलवार 27 फ़रवरी को प्रदोष व्रत के संयोग पर मंदिर प्रांगण मे विश्व कल्याण के लिए 11 पुरोहितों द्वारा महामृत्युंजय पाठ होगा।

ख़बरों के मुताबिक़…

28 फरवरी बुधवार को अपराह्न 3 बजे  मनकामेश्वर उपवन घाट पर तैयार की गई कंडो की होलिका के समक्ष लोक-गीत कार्यक्रम फाघलेहरी की गूंज सुनाई देगी। इस कार्यक्रम मे देश-प्रदेश के लोक-कलाकार होली गायन की विभिन्न विधाओं को प्रस्तुत कर फागोत्सव को नया आयाम प्रदान करेंगे। गायन कार्यक्रम में रजिस्ट्रेशन हेतु कोई भी कलाकार मठ-मंदिर ऑफिस से संपर्क व 9839132261 पर कॉल कर सकता है।

मठ की श्रीमहंत देव्यागिरि ने रविवार को संवाददाताओं को बताया कि…

सोमवार को अम्माकली एकादशी,मंगलवार प्रदोष व्रत व होली के सुयोग को देखते हुए इस बार चार दिवसीय फागोत्सव-2018 पर्व मनाया जाएगा। वर्तमान में मंदिर का आकर्षक रंगरोगन हो गया है। पूरे मंदिर परिसर को सुन्दर पुष्पों से सजाया जा रहा है हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मनकामेश्वर उपवन घाट पर कंडो से सुसज्जित इको फ्रेंडली होलिका को बनाया गया है, जिसका दहन 1 को मार्च को नमोस्तुते माँ गोमती की महाआरती के बाद किया जाएगा।
देव्यागिरी ने कहा की इस बार की भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिये उत्तम मानी जाती है। यदि भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा का अभाव हो परन्तु भद्रा मध्य रात्रि से पहले ही समाप्त हो जाए तो प्रदोष के पश्चात जब भद्रा समाप्त हो तब होलिका दहन करना चाहिये।
यदि भद्रा मध्य रात्रि तक व्याप्त हो तो ऐसी परिस्थिति में भद्रा पूँछ के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। परन्तु भद्रा मुख में होलिका दहन कदाचित नहीं करना चाहिये। धर्मसिन्धु में भी इस मान्यता का समर्थन किया गया है। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार भद्रा मुख में किया होली दहन अनिष्ट का स्वागत करने के जैसा है। किसी-किसी साल भद्रा पूँछ प्रदोष के बाद और मध्य रात्रि के बीच व्याप्त ही नहीं होती तो ऐसी स्थिति में प्रदोष के समय होलिका दहन किया जा सकता है। कभी दुर्लभ स्थिति में यदि प्रदोष और भद्रा पूँछ दोनों में ही होलिका दहन सम्भव न हो तो प्रदोष के पश्चात होलिका दहन करना चाहिये। इस बार होली दहन के लिए सायंकाल 06 :16 बजे से लेकर 8 :47 का मुहर्त शुभ है।
loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *