अमृतसर रेल हादसा: ड्राईवर अरविन्द कुमार के फांसी लगाने की अफवाहें झूठी

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अमृतसर। जोड़ा फाटक के पास दशहरा वाले दिन हुए अमृतसर रेल हादसा को लेकर अफवाहों का बाजार भी गर्मागर्म है। जनता का कहना है कि ऐसा बेवजह माहौल खराब करने के लिए किया जा रहा है। ख़ास बात तो ये है कि, सोशल मीडिया पर उस ट्रेन के चालक द्वारा आत्‍महत्‍या करने की बात आग की तरह वायरल हो गई। लेकिन जांच पड़ताल के बाद पता चला कि ट्रेन चालक सही सलामत है। दरअसल एक व्‍यक्ति का अमृतसर व तरनतरन के बीच एक पुल पर एक व्‍यक्ति का फंदे से झूलता शव मिला था। इसके बाद किसी ने बिना कोई जांच किए हादसा का कारण बनी ट्रेन के चालक द्वारा आत्‍महत्या करने की बात सोशल मीडिया पर डाल दी।

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आपको बता दें कि पंजाब व रेलवे पुलिस ने शनिवार को अमृतसर में 60 लोगों को कुचलने वाली ट्रेन के ड्राइवर को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पंजाब पुलिस अधिकारियों के मुताबिक डीएमयू (डीजल मल्टीपल यूनिट) के चालक को लुधियाना रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया गया और शुक्रवार रात को हुई इस घटना के संदर्भ में पूछताछ की गई। इस बड़े मामले में ड्राइवर का लिखित बयान सामने आया है। इस नोट में ड्राइवर ने उस रात हुए हादसे की पूरी कहानी को बयां किया है।

ड्राइवर अरविंद कुमार ने अपने नोट में लिखा है, कि जैसे ही मैंने देखा कि ट्रैक पर सैकड़ों लोग की भीड़ मौजूद हैं, मैंने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। इस दौरान मैं लगातार हॉर्न बजाता रहा। लेकिन इसके बावजूद भी कई सारे लोग ट्रेन के नीचे आ गए। जैसे ही ट्रेन रुकी, लोगों ने उस पर पथराव करना शुरू कर दिया। इसके बाद मैंने ट्रेन के यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन को आगे बढ़ा दिया।

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अपने नोट में ट्रेन के ड्राईवर ने ये भी लिखा कि ‘मैंने 19 अक्टूबर को शाम 5 बजे चार्ज लिया। जालंधर से चलकर मैं शाम 6:44 बजे मानांवाला पहुंचा। 6:46 बजे पीला सिग्नल और हरा सिग्नल मिलने पर अमृतसर के लिए ट्रेन रवाना हुई। मानांवाला और अमृतसर के बीच गेट सं। 28 का डिस्टेंट और गेट सिग्नल ग्रीन पास किया। ‘जैसे ही गाड़ी केएम-नं. 508/11 के आसपास पहुंची तो सामने से गाड़ी सं. 13006 डीएन आ रही थी।

उसी दौरान अचानक लोगों का झुण्ड ट्रैक के पास दिखाई दिया तो मैंने तुरंत हॉर्न बजाते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। इमरजेंसी ब्रेक लगाने पर भी मेरी गाड़ी की चपेट में तमाम लोग आ गए। गाड़ी की स्पीड लगभग रुकने के करीब थी तो बड़ी संख्या में लोगों ने मेरी गाड़ी पर पथराव शुरू कर दिया। गाड़ी में बैठी सवारियों की सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन को आगे बढ़ाया और होम सिग्नल की स्थिति में अमृतसर स्टेशन पर आ गया।

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अमृतसर के वॉर्ड नंबर 46 के शैलेंदर सिंह शैली ने ट्रेन ड्राईवर पर सरासर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि ‘मैं घटनास्थल पर मौजूद था। रुकने की तो बात ही छोड़िए, ट्रेन की रफ्तार भी धीमी नहीं हुई। ऐसा लग रहा था कि ड्राइवर हमें कुचलना चाहता था। ट्रेन वहां से चन्द पलों में गुजर गई। क्या यह संभव है कि जब हम लोगों के आस-पास इतने सारे लोग मर रहे हों या घायल हों तो हम ट्रेन पर पत्थर फेंकेंगे। क्या इतने दर्दनाक हादसे के दौरान तेजी से गुजर रही ट्रेन पर पत्थर फेंकना संभव है। ड्राइवर झूठ बोल रहा है।’

मौके पर मौजूद रहे परमजीत सिंह ने कहा है कि ‘उसने ट्रेन धीमी तक नहीं की, रुकने की बात तो छोड़ दीजिए। ट्रेन इतनी स्पीड में थी कि हादसा कुछ ही सेकंडों में हो गया। सैकड़ों वीडियो हैं, जिनसे पता चलता है कि ट्रेन कितनी तेज गति से गुजर रही थी। हम केवल लोगों की चीखें ही सुन सकते थे।

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अधिकारियों के मुताबिक ट्रेन (डीईएमयू) की अधिकतम रफ्तार 96 किमी/घंटा हो सकती है। अगर ब्रेक लगाए जाएं तो ऐसी स्थिति में खाली ट्रेन 300 मीटर चलकर पूरी तरह रुक जाएगी, वहीं सवारियों से भरी होने पर 600 मीटर तक चलने के बाद रुकेगी। डीआरएम फिरोजपुर के मुताबिक ट्रेन की रिकॉर्ड की गई आखिरी रफ्तार 68 किमी/घंटा थी।

 

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