24 Ghante Online | Latest Hindi News https://24ghanteonline.com Breakings, Political, National, International News Wed, 29 Jan 2020 05:50:04 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.3.2 केरल विधानसभा में CAA पर हंगामा, विधायकों ने राज्यपाल दिखाए ‘गो बैक’ के पोस्टर https://24ghanteonline.com/uproar-over-caa-in-kerala-assembly-mlas-show-governors-go-back-posters/ https://24ghanteonline.com/uproar-over-caa-in-kerala-assembly-mlas-show-governors-go-back-posters/#respond Wed, 29 Jan 2020 05:48:46 +0000 https://24ghanteonline.com/?p=215087 केरल। केरल विधानसभा में बजट सत्र के दौरान यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के विधायकों ने नागरिकता कानून (CAA) को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को घेरते हुए राज्यपाल वापस जाओ के नारे लगाए और  पोस्टर भी दिखाए। इस दौरान राज्यपाल के साथ मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी थे। विधानसभा के मार्शलों ने राज्यपाल के लिए रास्ता बनाया और उन्हें उनकी सीट तक ले गए।

केरल विधानसभा में तकरीबन 10 मिनट के बाद मार्शलों ने बल प्रयोग कर विपक्षी सदस्यों को हटाया और राज्यपाल के लिए आसन तक रास्ता बनाया। राज्यपाल के आसन तक पहुंचते ही राष्ट्रगान बजाया गया लेकिन विपक्ष के सदस्य आसन के समीप एकत्रित हो गए और राष्ट्रगान पूरा होने के तुरंत बाद उन्होंने ‘राज्यपाल वापस जाओ’ के नारे लगाने शुरू कर दिए।

राज्यपाल ने संबोधन शुरू किया तो विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए विधानसभा से वाकआउट किया। इस दौरान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने विधायकों को समझाते हुए वापस जाने की अपील भी की।

राज्यपाल ने दी सफाई

राज्यपाल ने अभिभाषण में कहा, मैं नागरिकता कानून के खिलाफ इस पैराग्राफ को पढ़ने जा रहा हूं क्योंकि मुख्यमंत्री ऐसा चाहते हैं। हालांकि, मेरा मानना है कि यह नीति या कार्यक्रम के तहत नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह सरकार का दृष्टिकोण है और उनकी इच्छा का सम्मान करने के लिए मैं इस पैरा को पढ़ने जा रहा हूं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की तरह काम कर रहे राज्यपाल: कांग्रेस

विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथाला ने आरोप लगाया कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान सीएए वापल लेने के लिए पारित किए गए प्रस्ताव को लेकर केरल विधानसभा का उपहास कर रहे हैं। वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं। वे आरएसएस और भाजपा के हाथ की कठपुतली हैं। बता दें कि रमेश चेन्नीथाला ने पहले कहा था कि वे राज्यपाल को हटाने की मांग से जुड़ा प्रस्ताव केरल विधानसभा में पेश करेंगे

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निर्भया केस: मुकेश की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, होगी फांसी https://24ghanteonline.com/nirbhaya-case-mukeshs-petition-rejected-by-supreme-court-will-be-hanged/ https://24ghanteonline.com/nirbhaya-case-mukeshs-petition-rejected-by-supreme-court-will-be-hanged/#respond Wed, 29 Jan 2020 05:42:52 +0000 https://24ghanteonline.com/?p=215085 निर्भया मामले के एक दोषी मुकेश की उस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया, जिसमें उसने राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज करने के आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका खारिज होने के साथ ही निर्भया के दोषी मुकेश के पास फांसी से बचने के सभी विकल्प खत्म हो गए हैं। बुधवार को याचिका खारिज करने के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि इस याचिका में कोई मैरिट नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करने के दौरान कहा कि दिल्ली सरकार ने दोषी से जुड़ा सारा रिकॉर्ड राष्ट्रपति को भेजा था। राष्ट्रपति ने रिकॉर्ड देखने के बाद दया याचिका खारिज की है। कोर्ट ने कहा जेल में हुआ शोषण दया याचिका को चुनौती देने का आधार नहीं हो सकता।

वहीं, केंद्र सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए मंगलवार को कहा कि यह याचिका स्वीकार करने लायक नहीं है। राष्ट्रपति द्वारा दोषी को माफी देने के अधिकार की समीक्षा का कोर्ट के पास सीमित अधिकार है। कोर्ट ने मुकेश और सरकार की दलीलें सुनकर बुधवार तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया। उधर, निर्भया का एक अन्य गुनहगार अक्षय बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल करेगा।

न्यायमूर्ति आर भानुमति, अशोक भूषण और एस बोपन्ना की पीठ ने याचिका पर करीब ढाई घंटे तक दोनों पक्षों की बहस सुनी। मुकेश की ओर से वरिष्ठ वकील अंजना प्रकाश ने राष्ट्रपति के दया याचिका खारिज करने के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है। बिना सोच-विचार के जल्दबाजी में आदेश पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को माफी देने का अधिकार एक संवैधानिक जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट कुछ आधारों पर उसकी समीक्षा कर सकता है। अंजना प्रकाश ने कहा कि जेल अथॉरिटी से सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत मिली जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति के समक्ष मुकेश की डीएनए रिपोर्ट पेश नहीं की गई, जिससे साबित होता है कि वह दुष्कर्म में शामिल नहीं था।

जेल में मुकेश के साथ अप्राकृतिक यौनाचार का आरोप

मुकेश के वकील ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता के शरीर में उसके डीएनए नहीं पाए गए। मुकेश उस दिन बस चला रहा था, लेकिन उसने न तो दुष्कर्म किया और न ही पीड़िता को मारने में उसका कोई हाथ था। उसे एकांत कारावास में रखा गया और जेल में उसके साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया गया। इन चीजों पर विचार होना चाहिए था।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, याचिका स्वीकार करने लायक नहीं

केंद्र सरकार की ओर से शीर्ष अदालत में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई मुकेश की यह याचिका स्वीकार किए जाने लायक नहीं है। विडंबना देखिए कि आज कौन जीवन के मूल्यों की बात कर रहा है, जिसने सह अभियुक्तों के साथ मिलकर एक निदरेष छात्र से न सिर्फ सामूहिक दुष्कर्म किया, बल्कि उसके आंतरिक अंगों को भी खींचकर बाहर निकाल दिया। राष्ट्रपति को दया याचिका भेजने में पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है। खुद सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक दया याचिका निपटाने में देरी करना अमानवीय होता है। मेहता ने यह भी कहा कि मुकेश को कभी भी तिहाड़ में एकांत कारावास में नहीं रखा गया।

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निर्भया केस : किस दोषी के पास कानूनन कौन सा विकल्प बचा है, जानिए https://24ghanteonline.com/nirbhaya-case-which-convict-has-the-option-of-remaining-legal-know/ https://24ghanteonline.com/nirbhaya-case-which-convict-has-the-option-of-remaining-legal-know/#respond Wed, 29 Jan 2020 05:32:59 +0000 https://24ghanteonline.com/?p=215082 निर्भया के दोषी फांसी की सजा टालने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। 1 फरवरी को फांसी की तारीख तय है और मंगलवार को दोषियों में से एक अक्षय ठाकुर ने क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल की है। मुकेश कुमार के वकील ने कोर्ट में समलैंगिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किए जाने का नया दावा पेश किया है। केस की मौजूदा स्थिति यह है कि इन चारों को सुप्रीम कोर्ट ने दोषी करार देते हुए फांसी की सजा दी है और चारों की ही रिव्यू पिटिशन खारिज हो चुकी है। यहां जानें कि निर्भया के छह दोषियों में से किसकी आज क्या स्थिति है…

राम सिंह

तिहाड़ में ट्रायल के दौरान 11 मार्च 2013 को आत्महत्या कर ली।

जूवेनाइल दोषी

3 साल बाल सुधार गृह में बिताने के बाद 2015 में उसे रिहा कर दिया गया। जूवेनाइल दोषी की लोकशन जाहिर नहीं की गई है क्योंकि उसकी जान को खतरा है।

मुकेश सिंह

रिव्यू पिटिशन: जुलाई 2018 में खारिज

क्यूरेटिव पिटिशन: इस महीने खारिज

दया याचिका: 17 जनवरी 2020 को राष्ट्रपति ने खारिज की। सुप्रीम कोर्ट में इसके बाद लगाई गुहार। 29 जनवरी को सर्वोच्च अदालत ने खारिज की याचिका, अब कोई विकल्प नहीं बचा।

अक्षय ठाकुर

रिव्यू पिटिशन: दिसंबर 2019 में खारिज

क्यूरेटिव पिटिशन: 28 जनवरी 2020 को दाखिल की

दया याचिका: राष्ट्रपति के पास अभी तक नहीं लगाई गुहार, यह विकल्प बचा है।

दोषियों की मौजूदा कानूनन स्थति

पवन गुप्ता

रिव्यू पिटिशन : जुलाई 2018 में खारिज

क्यूरेटिव पिटिशन : क्यूरेटिव पिटिशन अभी तक नहीं डाली

दया याचिका: यह विकल्प भी अभी बचा है।

विनय शर्मा

रिव्यू पिटिशन: जुलाई 2018 में खारिज

क्यूरेटिव पिटिश: जनवरी 2020 में खारिज

दया याचिका: अभी यह विकल्प बचा है।

दिल्ली जेल कानून क्या कहता है

जेल कानून के तहत दया याचिका खारिज होने के बाद दोषी को फांसी से पहले 14 दिन का वक्त दिया जाता है।

अगर एक ही मामले में कई दोषी करार हैं और सबको फांसी की सजा मुकर्रर है तो फांसी एक साथ ही हो सकती है।

वॉरंट जारी होने के बाद टली फांसी

दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने 22 जनवरी को डेथ वॉरंट जारी किया था। इसके बाद दोषियों ने कानूनी तिकड़म का सहारा लिया और डेथ वॉरंट 1 फरवरी तक टालने में कामयाब रहे।

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बिगड़े दिलीप घोष के बोल, पूछा- ‘शाहीन बाग में क्यों नहीं हो रही कोई मौत’ https://24ghanteonline.com/the-words-of-dilip-ghosh-spoiled-asked-why-is-there-no-death-happening-in-shaheen-bagh/ https://24ghanteonline.com/the-words-of-dilip-ghosh-spoiled-asked-why-is-there-no-death-happening-in-shaheen-bagh/#respond Wed, 29 Jan 2020 05:16:03 +0000 https://24ghanteonline.com/?p=215073 बिगड़े दिलीप घोष के बोल, पूछा- ‘शाहीन बाग में क्यों नहीं हो रही कोई मौत’कोलकाता। पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष मंगलवार को उस वक्त विवाद में घिर गए जब उन्होंने पूछा कि, शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों को कुछ क्यों नहीं हो रहा जबकि वे दिल्ली की भीषण ठंड में खुले में प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं बंगाल में CAA और प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी NRC से घबराए लोग “खुदकुशी कर रहे हैं”। घोष ने इस बात पर हैरानी जताई कि महिलाओं और बच्चों समेत प्रदर्शन में शामिल लोग क्यों बीमार नहीं पड़ रहे या मर क्यों नहीं रहे हैं। जबकि वे हफ्तों से खुले आसमान के नीचे प्रदर्शन कर रहे हैं।  भाजपा सांसद ने यह भी जानना चाहा कि आखिरकार इस प्रदर्शन के लिये रकम कहां से आ रही है।

दक्षिणी दिल्ली के शाहीन बाग में संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ सैकड़ों महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं। यहां करीब एक महीने से भी ज्यादा समय से प्रदर्शन चल रहा है। घोष ने कहा, “हमें पता चला है कि CAA के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाएं और बच्चे दिल्ली की सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे बैठे हैं। मैं हैरान हूं कि उनमें से कोई बीमार क्यों नहीं हुआ? उन्हें कुछ हुआ क्यों नहीं? एक भी प्रदर्शनकारी की मौत क्यों नहीं हुई?” उन्होंने कहा, “यह बेहद चौंकाने वाला है। क्या उन्होंने कोई अमृत पी लिया है कि उन्हें कुछ हो नहीं रहा है। लेकिन बंगाल में कुछ लोगों द्वारा घबराहट में खुदकुशी करने का दावा किया जा रहा है।”

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निर्भया कांड : सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मुकेश की दया याचिका को किया खारिच https://24ghanteonline.com/nirbhaya-scandal-supreme-court-on-dismissed-mukesh-mercy-petition/ https://24ghanteonline.com/nirbhaya-scandal-supreme-court-on-dismissed-mukesh-mercy-petition/#respond Wed, 29 Jan 2020 05:12:00 +0000 https://24ghanteonline.com/?p=215075 नई दिल्ली। निर्भया कांड के दोषी मुकेश की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया है। मुकेश ने राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। वहीं, केंद्र सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए मंगलवार को कहा कि यह याचिका स्वीकार करने लायक नहीं है। राष्ट्रपति द्वारा दोषी को माफी देने के अधिकार की समीक्षा का कोर्ट के पास सीमित अधिकार है।

कोर्ट ने मुकेश और सरकार की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रख लिया, जो बुधवार को सुना दिया है। उधर, निर्भया का एक अन्य गुनहगार अक्षय बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल किया है।

मंगलवार को न्यायमूर्ति आर भानुमति, अशोक भूषण और एस बोपन्ना की पीठ ने याचिका पर करीब ढाई घंटे तक दोनों पक्षों की बहस सुनी। मुकेश की ओर से वरिष्ठ वकील अंजना प्रकाश ने राष्ट्रपति के दया याचिका खारिज करने के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है। बिना सोच-विचार के जल्दबाजी में आदेश पारित किया गया है।

उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को माफी देने का अधिकार एक संवैधानिक जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट कुछ आधारों पर उसकी समीक्षा कर सकता है। अंजना प्रकाश ने कहा कि जेल अथॉरिटी से सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत मिली जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति के समक्ष मुकेश की डीएनए रिपोर्ट पेश नहीं की गई, जिससे साबित होता है कि वह दुष्कर्म में शामिल नहीं था।

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