काले भालू के शिकार में पांच-पांच साल का कारवास, 10 हजार का जुर्माना

- in उत्तराखंड
काले भालू के शिकार का मामला
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विवेक श्रीवास्तव ने काले भालू के शिकार मामले में पांच आरोपियों को पांच-पांच साल का कारावास और दस-दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक वन क्षेत्राधिकारी स्वरूप सिंह राठौर की अगुवाई में टीम ने 19 मई 2007 को दूधली गांव के जंगल से काले भालू के शिकार में सुरेश, कबूल चंद निवासी हल्दूवाला घंघोडा देहरादून, दीवान सिंह, जगत सिंह और सुंदर सिंह निवासी टकराना टिहरी गढ़वाल को गिरफ्तार किया था। इनके पास से काले भालू का पित्त और लिंग बरामद किया गया था। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि 15 मई को काले भालू का शिकार किया था। भालू का शव और पंजे काटकर जंगल में छिपा दिए थे। पित्त और लिंग का एक व्यापारी से सौदा तय कर रखा था। वन विभाग की टीम ने जमीन में दबाए गए भालू के शव और पंजों को बरामद कर लिया था। आरोपियों के बयान के आधार पर छठे आरोपी सोबत सिंह निवासी टकराना की    गिरफ्तारी हुई थी।

इसके बाद काले भालू के शिकार के मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विवेक श्रीवास्तव की अदालत में हुई। अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद अदालत ने सुरेश, कबूल चंद, दीवान सिंह, जगत सिंह और सुंदर सिंह को काले भालू का शिकार का दोषी माना। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत पांचों आरोपियों को पांच-पांच साल के कारावास और 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा न करने पर एक-एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। छठे आरोपी सोबत सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।

 

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