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नाश्ते के तौर पर आटे का हलवा और मसालेदार इडली सेहत के लिए है फायदेमंद

लाइफ़स्टाइल। कहते हैं, सुबह का नाश्ता ठीक से हो जाए, तो दिन भर कुछ खाने को न भी मिले तो कोई बात नहीं। इसलिए कई लोग सुबह ही भर पेट भोजन कर लेते हैं। पर नाश्ता ऐसा होना चाहिए, जिससे पेट भी भरे और उसे खाने से आलस न आए, शरीर में फुर्ती बनी रहे, काम करने की ऊर्जा बनी रहे। इसलिए कुछ ऐसे नाश्तों के बारे में बात करते हैं, जिन्हें बनाना भी आसान है और सदियों से परंपरागत रूप में हमारे घरों में बनते रहे हैं।

आटे का हलवा

नाश्ते के तौर पर हलवा को सबसे उत्तम माना गया है। आयुर्वेद भी कहता है कि सुबह अगर नाश्ते में हलवा खाया जाए, तो वह स्वास्थ्य और मन दोनों के लिए सर्वोत्तम आहार है। यहां तक कि हलवा पेट संबंधी कई परेशानियों को भी दूर करता है। इसलिए प्रसाद के रूप में हमेशा हलवा बांटने की परंपरा रही है। मगर आमतौर पर शहरी जीवन में लोग हलवा को मीठे के रूप में खाते हैं।

हलवा खाना हो, तो सूजी के बजाय आटे का बनाएं। आटे का हलवा सूजी की अपेक्षा अधिक अच्छा रहता है। इसे बनाना थोड़ा मुश्किल काम जरूर लगता है, पर स्वाद और सेहत की दृष्टि से इसका कोई जवाब नहीं।

विधि

यों आटे का हलवा बनाने के लिए कहा जाता है कि आटा, घी और चीनी बराबर-बराबर मात्रा में लेनी चाहिए। मगर इससे मीठा और घी अधिक हो जाएगा और बहुत सारे कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए यह मुश्किल पैदा करेगा। इसलिए जितना आटा लें, उसकी आधी मात्रा देसी घी की रखें और इतनी ही मात्रा चीनी की रखें।

आटे का हलवा बनाने में थोड़ा पेचीदा काम है आटे को भूनना। मगर घबराएं नहीं। थोड़ी सावधानी बरतें, तो मुश्किल दूर हो जाएगी। कड़ाही में घी की आधी मात्रा डालें और आटा डाल कर मद्धिम आंच पर चलाते हुए तब तक भूनते रहें, जब तक कि आटे का रंग सुनहरा न हो जाए। चलाते रहना जरूरी है, नहीं तो आटा कड़ाही में चिपक कर जलेगा और हलवे का स्वाद खराब करेगा।

अब एक भगोने में चीनी डालें और उतनी ही मात्रा में पानी डालें। उबाल आने तक गरम करें। चीनी पूरी तरह घुल कर उबल जाए, तो आंच बंद कर दें।

भुने हुए आटे को छन्नी से छानते हुए उसमें पड़ी गाठों को मसल कर दूर करें। फिर एक कड़ाही में बचे हुए घी का आधा हिस्सा डालें और आटे को डाल कर उसे चलाते हुए उसमें घुली हुई चीनी मिलाएं। उसे चलाते रहें। जब आटा पूरी तरह चीनी का रस सोख ले तो उसमें बचा हुआ घी डालें और पलट कर चलाते हुए मिलाएं। ध्यान रखें कि आटे में गुठलियां न पड़ने पाएं। हलवा तैयार है। उस पर कटे हुए काजू और बाजाम डाल कर परोसें।

मसालेदार इडली

डली एक ऐसा व्यंजन है, जिसे कई तरह से परोसा और खाया जाता है। पारंपरिक तरीका तो चटनी और सांभर के साथ खाने का है, पर इसे दूसरे तरीके से भी परोसा और खाया जाता है। उसी में एक तरीका मसालेदार बना कर परोसना है। जब इडली बनाएं और वह बच जाए, तो कड़ी हो जाती है। ठंडी और कड़ी इडली बेस्वाद हो जाती है। इस इडली को नए ढंग से खाया जा सकता है- मसालेदार बना कर। इस तरह यह इडली और ढोकला के बीच की चीज बन जाती है।

मसालेदार इडली बनाने के लिए बासी या फिर ठंडी हो चुकी इडली लें। उसे दो या चार टुकड़ों में या फिर मनचाहे आकार में काट लें।

एक कड़ाही में एक चम्मच तेल गरम करें। उसमें एक से डेढ़ चम्मच राई और कढ़ी पत्ते का तड़का लगाएं। तड़का तैयार हो जाए, तो उसमें एक चम्मच चीनी, एक चम्मच इमली का गूदा, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और चार-पांच चम्मच टोमैटो सॉस डालें। उसमें एक कप पानी डाल कर उबलने तक गरम करें। जब तड़के में उबाल आ जाए तो उसमें कटी हुई इडली डालें। आंच मद्धिम कर दें।

इडली के टुकड़ों को चलाते हुए पकने दें, ताकि तड़के की ग्रेवी पूरी तरह इडली के टुकड़ों पर चिपक जाए। थोड़ी देर के लिए कड़ाही पर ढक्कन लगा कर बंद कर दें। आंच बंद कर दें। पांच-सात मिनट बाद ढक्कन खोलें और एक बार फिर से टुकड़ों को चलाते हुए ग्रेवी को ठीक से चिपका लें। गरमागरम खाने को परोसें। यह मसालेदार इडली बच्चों के स्कूल टिफिन में भी दे सकते हैं, वे बड़े मन से इसे खाते हैं।

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