फूलों से निर्मित अगरबत्ती महाराष्ट्र के मन्दिरों में बिखेरगी खुशबु, सीमैप ने तकनीकी की ट्रान्सफर

लखनऊ । सीएसआईआर-केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) द्वारा विकसित फूलों से अगरबत्ती बनाने की तकनीकी बुधवार को मेसर्स ईकोनिर्मिती इनफ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड, औरंगाबाद, महाराष्ट्र हस्तांतरण की गई । ईकोनिर्मिती इस तकनीकी को महाराष्ट्र के प्रमुख मंदिरों तथा अन्य धार्मिक स्थलों से चढ़ाए गए फूलों से अगरबत्ती का निर्माण करेगी। इस तकनीकी को सर्वप्रथम पुणे स्थित सभी धार्मिक स्थलों से एकत्रित पुष्पों द्वारा अगरबत्ती का निर्माण करेगी। इन अगरबत्तियों को मंदिर मे आए हुये भक्तों को तथा आस-पास की दुकानों में विपणन किया जाएगा। इस तकनीकी को स्वच्छ भारत अभियान, कौशल विकास एवं सामाजिक आजीविका अभियान से सीमैप लखनऊ के साथ मिल कर संचालित करेगा। अभी तक तकनीकी का वणिज्यक   स्तर पर उपयोग नहीं हो रहा था इसका उपयोग सीमैप तथा ईकोनिर्मिती द्वारा भविष्य में अन्य जगहों पर भी किया जाएगा। अभी इस तकनीकी का उपयोग बक्शी का तालाब स्थित चंद्रिका देवी मंदिर पर सीमैप द्वारा महिलाओं को प्रशिक्षित कर फूलों का उपयोग किया जा रहा है। सीमैप के कार्यकारी निदेशक डॉ. अशोक शर्मा व श्री रोहित सदाफल मेसर्स ईकोनिर्मिती इनफ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड, औरंगाबाद द्वारा अनुबंध पर हस्तांतरण किए गए। सीमैप के वैज्ञानिकों ने फूलों से निर्मित अगरबत्ती की विशेषताओं के बारे में जानकारी प्रदान की ।

इस अवसर पर  भास्कर ज्योति देवरी, प्रशासनिक नियंत्रक,  बलजीत सिंह, वित्त एवं लेखा नियंत्रक, डॉ. संजय कुमार, डॉ. रमेश श्रीवास्तव, डॉ. राम सुरेश शर्मा, डॉ. अनिल कुमार सिंह, पूर्व मुख्य वैज्ञानिक एवं डॉ. रवि प्रकाश बंसल आदि उपस्थित थे ।

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