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सीएम योगी का विजन: देश में मॉडल बना गोरखपुर नगर निगम

Writer D by Writer D
07/04/2026
in उत्तर प्रदेश, गोरखपुर, राजनीति
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Gorakhpur Nagar Nigam

Gorakhpur Nagar Nigam

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गोरखपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी और फ्लड मॉडलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जीवन को सुगम बनाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार जोर देते रहे हैं। उनके इसी विजन को धरातल पर उतारते हुए गोरखपुर नगर निगम (Gorakhpur Nagar Nigam) ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। नगर निगम द्वारा विकसित एआई आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम ने मानसूनी जलभराव की समस्या को कम करने में 65 प्रतिशत से अधिक सुधार दर्ज किया है। गोरखपुर में देश का पहला एआई-आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल (यूएफएमसी) स्थापित किया गया है, जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) व नीति आयोग से सराहना मिल रही है।

नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के अनुसार, यूएफएमसी स्थापित करने से 24 घंटे पहले ही वर्षा व जलभराव का पूर्वानुमान 80 प्रतिशत से अधिक सटीक हो गया है। ट्रायल फेज में 250 से अधिक शिकायतों में से 70 प्रतिशत का समाधान कुछ घंटों में हो गया। जबकि समग्र प्रणाली दक्षता में 65 प्रतिशत से अधिक सुधार देखा गया। इस प्रणाली में एआई आधारित वर्षा पूर्वानुमान, सेंसर आधारित जलस्तर मॉनिटरिंग और स्टॉर्म वाटर मॉडलिंग को एकीकृत किया गया है। जैसे ही जलस्तर बढ़ता है, सेंसर अलर्ट भेजते हैं और ऑटोमेटेड पंपिंग सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है, जिससे जलभराव वाले इलाकों में रियल-टाइम समाधान सुनिश्चित होता है।

गोरखपुर मॉडल देशभर के शहरी निकायों के लिए उदाहरण-

नीति आयोग ने अपने मूल्यांकन में पाया कि गोरखपुर मॉडल डेटा-आधारित पूर्वानुमान के जरिए देशभर के शहरी निकायों की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत कर सकता है। इसे प्रतिक्रियात्मक (Reactive) से सक्रिय (Proactive) शहरी प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना गया है। इस अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल (यूएफएमसी) का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 जुलाई 2025 को किया था। यह एक उन्नत अर्बन फ्लड अर्ली वार्निंग और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम है।

दो प्रमुख पहलुओं पर किया गया कार्य-

नगर आयुक्त बताते हैं कि शहरी बाढ़ जोखिम प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत दो प्रमुख पहलुओं पर कार्य किया गया है। पहला, अर्बन फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम, जो नागरिकों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए चेतावनी और वास्तविक समय पर सूचना उपलब्ध कराता है। दूसरा, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, जो शहर के लिए दीर्घकालिक योजना और नीति निर्माण में सहायता प्रदान करता है  ताकि भविष्य में बाढ़ प्रबंधन क्षमताओं को अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाया जा सके।

सभी पंपिंग स्टेशनों का पूर्ण ऑटोमेशन-

गोरखपुर मॉडल का यह समग्र दृष्टिकोण शहर को न केवल वर्तमान आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाता है, बल्कि भविष्य में जनहानि एवं धनहानि के खतरे को भी कम करता है। इस परियोजना के अंतर्गत शहर के सभी महत्त्वपूर्ण नालों, सभी उपकरणों तथा सभी जिम्मेदार अधिकारियों एवं टीमों को उनके संपर्क विवरण सहित मैप किया गया है। शहर में कुल 28 जलभराव हॉटस्पॉट और 85 पॉइंट्स ऑफ इंटरेस्ट चिह्नित किए गए हैं, जो जलभराव की दृष्टि से अधिक संवेदनशील हैं। शहर के सभी पंपिंग स्टेशनों का पूर्ण ऑटोमेशन किया गया है। 24×7 इमरजेंसी कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जो लगातार निगरानी और समन्वय का कार्य करता है। नागरिकों के लिए ग्रीवांस पोर्टल तैयार किया गया है, जिससे किसी भी समस्या की सूचना और उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

हर 15 मिनट पर मिलती है बारिश से जुड़ी जानकारी-

नगर आयुक्त ने बताया कि शहर में नगर निगम द्वारा दो ऑटोमैटिक रेन गेज भी लगाए गए हैं, जो हर 15 मिनट पर बारिश से जुड़ी जानकारी देते हैं। प्राइमरी व सेकंडरी नालों पर कुल 110 ऑटोमैटिक वाटर लेवल रिकॉर्डर लगाए गए हैं। ये सेंसर हर 2 से 15 मिनट में जलस्तर से संबंधित सूचनाएं भेजते हैं। जब नालों में जलस्तर 80 प्रतिशत से अधिक हो जाता है, तो संबंधित अधिकारियों को ऑटोमेटेड अलर्ट्स पहुंचने लगते हैं। जब सम्प वेल्स में जलस्तर 60 प्रतिशत से अधिक होता है, ऑटोमेटिक सिस्टम के माध्यम से पंप स्वतः चालू हो जाते हैं। ईंधन की कमी और पंप के रखरखाव से संबंधित चेतावनियां भी अधिकारियों को समय रहते मिल जाती हैं।

यूएफएमसी द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीति-

“पूर्वानुमान करें, तैयार रहें, और सुरक्षा सुनिश्चित करें। बारिश से पहले, अर्बन फ्लड मॉडलिंग के माध्यम से यह पूर्वानुमान लगाया जाता है कि अगले दिन शहर के किन क्षेत्रों में जलभराव की संभावना है। इस पूर्वानुमान पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेजी जाती है, ताकि वे समय रहते तैयारी कर सकें। मोबाइल पंपों व सक्शन मशीनों की व्यवस्था पहले से की जाती है। वर्षा की मात्रा और समय को लेकर एक दिन पहले ही वॉकी-टॉकी के माध्यम से सभी अधिकारियों और फील्ड टीमों को चेतावनी भेज दी जाती है। यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि सभी पंप सही ढंग से कार्य कर रहे हों और नालों में कहीं भी रुकावट न हो। जैसे ही वर्षा प्रारंभ होती है, यूएफएमसी का 24×7 आपातकालीन नियंत्रण कक्ष सक्रिय हो जाता है। नियंत्रण कक्ष से यह घोषणा की जाती है कि कौन-कौन से नाले ओवरफ्लो हो रहे हैं, कौन से पॉइंट्स ऑफ इंटरेस्ट उच्च जोखिम में हैं या जलमग्न हो चुके हैं, किन हॉटस्पॉट्स पर मोबाइल पंपों को तुरंत चालू किया जाना चाहिए और किन क्षेत्रों में सक्शन मशीनें तैनात की जानी चाहिए। इससे फील्ड टीमें पूरी तरह सतर्क रहती हैं और उन्हें यह स्पष्ट होता है कि कहां और क्या कार्रवाई करनी है।

जलभराव की शिकायतों पर प्रतिक्रिया का समय अब काफी कम-

शहर के जिन पंपिंग स्टेशनों के सम्प वेल्स में जलस्तर 60 प्रतिशत से अधिक होता है, उन्हें कंट्रोल रूम से स्वचालित रूप से चालू कर दिया जाता है। यह प्रणाली पिछले 4 महीनों से चल रही है और इसके नतीजे बहुत अच्छे रहे हैं। मसलन, जलभराव की शिकायतों पर प्रतिक्रिया का समय काफी कम हुआ है। पहले 10–12 घंटे लगते थे, अब यह समय 1-2 घंटे से कम हो गया है, खासकर उन जगहों पर जहां पर बार-बार जलभराव होता था। 

पंप बंद होने के मामलों में आई 60 फीसदी कमी-

इसी तरह पंप बंद होने की घटनाएं 60 प्रतिशत से कम हो गई हैं, क्योंकि अब पंप अपने आप चलते हैं और समय पर उनका अनुरक्षण हो जाता है। 250 से ज़्यादा लोगों ने शिकायतें दर्ज कीं, जिनमें से 70 प्रतिशत से ज़्यादा शिकायतों का हल तुरंत और सही तरीके से किया गया। रीयल टाइम अलर्ट और जल्दी चेतावनी की वजह से कई पुराने जलभराव वाले इलाकों में इस बार बाढ़ नहीं आई। टेक्नोलॉजी से क्षमता एवं दक्षता की वृद्धि हुई है, जिससे टीमें जल्दी और मिलकर काम कर पा रही हैं। पंपिंग स्टेशन अब ऑटोमैटिक हो गए हैं, जिससे मैनुअल काम कम हुआ है और नतीजे ज़्यादा भरोसेमंद हो गए हैं। इस अभिनव पहल के माध्यम से गोरखपुर नगर निगम ने न केवल जलभराव की समस्या को कम किया है, बल्कि जवाबदेही, त्वरित प्रतिक्रिया और नागरिक संतुष्टि में भी उल्लेखनीय सुधार किया है।

Tags: gorakhpur nagar nigam
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