महाराष्ट्र में गवर्नर ने शिवसेना को सरकार बनाने के लिए किया है आमंत्रित

महाराष्ट्र गवर्नर
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नई दिल्ली। केंद्र की एनडीए (नैशनल डेमोक्रैटिक अलायंस) सरकार में शिवसेना के इकलौते मंत्री अरविंद सावंत के इस्तीफे के ऐलान के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। बदले हुए घटनाक्रम के बाद शिवसेना सरकार गठन के लिए एनसीपी और कांग्रेस की मदद ले सकती है। इस नाटकीय घटनाक्रम की शुरुआत रविवार को हुई जब राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शिवसेना को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। गवर्नर ने न्योते पर जवाब देने के लिए आज शाम साढ़े सात बजे तक का वक्त दिया है।

ऐसे में शिवसेना-बीजेपी के बीच महाराष्ट्र में ब्रेकअप होता नजर आ रहा है। एनसीपी ने शिवसेना के सामने बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए से सभी नाते तोड़ने की शर्त रखी है। इससे पहले सरकार गठन को लेकर बीजेपी ने अपने कदम पीछे खींच लिए थे। कार्यवाहक सीएम देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल को जानकारी दी कि उनकी पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्याबल नहीं है। वहीं, महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने शिवसेना को एनसीपी-कांग्रेस के संभावित समर्थन से सरकार बनाने की शुभकामनाएं दी हैं। गवर्नर द्वारा सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी से सरकार गठन पर उसकी इच्छा पूछने के बाद राज्य में सियासत तेजी से बदल रही है।

खबर है कि शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने एनसीपी चीफ शरद पवार से फोन पर बातचीत की है। ऐसे में 30 साल पुराने शिवसेना-बीजेपी गठबंधन का टूटना तय माना जा रहा है। संजय राउत ने कहा है कि शिवसेना और कांग्रेस शत्रु नहीं हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा था कि कांग्रेस भी चाहती है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन न लगने पाए। बिहार में नीतीश कुमार की तर्ज पर पार्टी आगे बढ़ सकती है। वहां जेडीयू ने पहले लालू प्रसाद यादव की अगुआई वाले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से 2015 में गठबंधन किया। लेकिन बाद में दोनों के बीच ब्रेकअप होने के साथ ही 2017 में जेडीयू ने फिर बीजेपी से हाथ मिला लिया। लोकसभा चुनाव से पहले 2013 में जेडीयू ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया था।

एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि एनसीपी और कांग्रेस की मदद से शिवसेना मुख्यमंत्री पद की अपनी डिमांड अभी पूरी कर ले और बाद में एनसीपी-कांग्रेस से संबंध खराब होने की सूरत में एक बार फिर बीजेपी से मिल जाए। शिवसेना-बीजेपी के बीच इससे पहले 2014 में भी अलगाव हुआ था। दोनों ने अलग-अलग विधानसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि चुनाव नतीजों के थोड़े समय बाद ही दोनों ने मिलकर सरकार बनाई थी। उस वक्त भी शिवसेना के मुखपत्र सामना में बीजेपी की अगुआई वाली एनडीए सरकार (केंद्र और महाराष्ट्र दोनों में) को लगातार निशाने पर लिया था। हालांकि इससे गठबंधन पर कोई खास असर नहीं पड़ा था। हालांकि इस बार तस्वीर थोड़ी अलग है।

फडणवीस खुद कह चुके हैं कि मैंने कई बार उद्धव ठाकरे को फोन किया लेकिन उन्होंने उठाया नहीं। ऐसे में दोनों के बीच कड़वाहट जिस स्तर पर जा चुकी है, उसके बाद शिवसेना-बीजेपी का साथ आना फिलहाल तो दूर की कौड़ी दिख रहा है। शिवसेना भले ही सरकार बनाने का दम भरे, लेकिन बहुमत का जादुई आंकड़ा उसके पास भी नहीं है। उसे एनसीपी और कांग्रेस का साथ लेना ही पड़ेगा, जबकि 8 निर्दलीय विधायकों ने शिवसेना को समर्थन दिया है। इन सभी के मिलने के बाद यह संख्या 162 तक पहुंच रही है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े 145 से 17 ज्यादा हैं।

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