अत्याचारों से तंग आकर 450 दलितों ने अपनाया बौद्धधर्म

दलितों
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अहमदाबाद। साल 2016 में गुजरात में ऊना में दलितों के पिटाई की घटना काफी सुर्ख़ियों में रही है। इस घटना में पीड़ित दलितों ने क्षुब्ध होकर एक बड़ा कदम उठाया है। यहां के 450 दलितों हिंदू समुदाय में अपमानित किए जाने से दुखी होकर बौद्ध धर्म अपना लिया है। वहीं धर्म परिवर्तन के बाद दलित परिवारों ने कहा कि हिंदू धर्म में हमें सम्मान नहीं मिला और हिंदुओं ने हमें नहीं अपनाया इसलिए हमने बौद्ध धर्म अपनाया है। बता दें कि दो साल पहले गिर सोमनाथ जिले की ऊना तहसील में समुदाय के चार लोगों को कथित गोरक्षकों ने बुरी तरह पीटा था।

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दलितों ने रविवार को धारण किया बौद्ध धर्म

जानकारी के मुताबिक रविवार को ऊना में बड़ी संख्या में दलित परिवार इकट्ठा हुए और पूरे रीति रिवाज से बौद्ध धर्म अपना लिया। इन परिवारों ने बौद्ध धर्म अपनाने का फैसला क्यों लिया, इस सवाल पर उनका कहना था कि हिंदुओं ने उन्हें सम्मान नहीं दिया। दलित परिवारों ने कहा, ‘हमें हिंदू नहीं माना जाता और मंदिरों में भी घुसने नहीं दिया जाता। यही वजह है कि हमने बौद्ध धर्म स्वीकार किया है।’ धर्म परिवर्तन के बाद दलित परिवारों ने कहा कि हिंदू धर्म में हमें सम्मान नहीं मिला और हिंदुओं ने हमें नहीं अपनाया इसलिए हमने बौद्ध धर्म अपनाया है। इस मौके पर सौराष्ट्र क्षेत्र के हजारों दलितों ने हिस्सा लिया।

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धर्म परिवर्तन से पहले भी हुआ हमला

गौरतलब हैं कि गुजरात के गिर सोमनाथ जिले की ऊना तहसील में गोरक्षकों द्वारा 2016 में जिस दलित परिवार के चार सदस्यों को कथित रूप से पीटा गया था। उस परिवार ने सैकड़ों लोगों के साथ रविवार को बौद्ध धर्म अपना लिया है। गिर सोमनाथ जिले के मोटा समढियाला गांव में ही परिवार ने धर्म परिवर्तन संस्कार में भाग लिया। ये वही गांव है जहां दो साल पहले इन लोगों को पीटा गया था।

इस धर्म परिवर्तन कार्यक्रम से पहले बीती 25 अप्रैल की शाम को रमेश सरवैया और अशोक सरवैया पर दोबारा हमला हुआ। हमला करने वाला उन्हीं आरोपियों में से एक है, जिन्होंने 2016 में परिवार के चार सदस्यों की सरेआम पिटाई की थी। आरोपी अभी ज़मानत पर बाहर है। बता दें, जुलाई 2016 में वशराम, रमेश, अशोक और बेचर नाम के दलितों को गोरक्षकों ने बेरहमी से पीटा था। घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था और गुजरात में दलित आंदोलन को जन्म दिया था।

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