Site icon 24 GhanteOnline | News in Hindi | Latest हिंदी न्यूज़

हरियाणा शिक्षा समिति ने यूपी के शिक्षा मॉडल को बताया उपयोगी और अनुकरणीय

Haryana Education Committee terms UP's education model useful.

Haryana Education Committee terms UP's education model useful.

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था, शैक्षिक गुणवत्ता, अवस्थापना सुविधाओं और शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों का अध्ययन करने के लिए हरियाणा विधानसभा (Harayana Assembly) की उच्चस्तरीय शिक्षा समिति सोमवार को लखनऊ पहुंची। समिति ने विधानसभा सभागार में विशेष सचिव उच्च शिक्षा निधि श्रीवास्तव सहित उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधारों और नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। हरियाणा विधानसभा की शिक्षा समिति के चेयरपर्सन लक्ष्मण सिंह यादव सहित समिति के अन्य सदस्यगण एवं अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगी सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विस्तार, डिजिटल व्यवस्था, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत की गई। हरियाणा विधानसभा की समिति ने उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे इन प्रयासों की सराहना करते हुए प्रदेश की व्यवस्थाओं और नवाचारों को महत्वपूर्ण एवं उपयोगी बताया।

बैठक में बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 24 राज्य विश्वविद्यालय, 56 निजी विश्वविद्यालय, एक डीम्ड विश्वविद्यालय और एक मुक्त विश्वविद्यालय के साथ-साथ 216 राजकीय महाविद्यालय, 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालय तथा 7,526 स्ववित्तपोषित महाविद्यालय संचालित हैं। प्रदेश में स्थापित किए गए 71 नए राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्य, सहायक आचार्य, पुस्तकालयाध्यक्ष और तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के कुल 1,349 पदों का सृजन किया गया है। इनमें से 46 महाविद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2025-26 से प्रवेश एवं अध्यापन कार्य प्रारंभ हो चुका है।

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और महाविद्यालयों में बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण के लिए प्रदेश के सभी मंडलों में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालयों की स्थापना की गई है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (SLQAC) का गठन कर उसे पूरी तरह सक्रिय किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों के अनुरूप प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम तथा रोजगारपरक वोकेशनल वैल्यू एडेड पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में भी प्रदेश में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय, प्रयागराज में पत्रावलियों का संचालन ई-ऑफिस के माध्यम से किया जा रहा है। वहीं, शैक्षिक सत्र 2024-25 से प्रदेश के सभी राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों में ‘समर्थ’ पोर्टल लागू किया गया है और सत्र 2025-26 से विद्यार्थियों के प्रवेश की प्रक्रिया भी समर्थ पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों का पूर्ण सेवा विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है।

योगी सरकार द्वारा उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों और उनके आश्रितों के लिए मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना का भी शुभारंभ किया गया है। इस योजना के तहत राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों, सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के 1.28 लाख शिक्षकों एवं उनके आश्रितों सहित कुल लगभग 7.5 लाख लोगों को निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त शिक्षणेतर कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों को भी योजना से लाभान्वित किए जाने की कार्रवाई चल रही है।

प्रदेश में विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के अंतर्गत उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को निःशुल्क स्मार्टफोन एवं टैबलेट वितरित किए जा रहे हैं। शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए वर्ष 2026-27 में रिसर्च एंड डेवलपमेंट योजना के अंतर्गत 500 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। राजकीय महाविद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए भी 13.60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बैठक में रोजगारपरक शिक्षा और विद्यार्थियों के कौशल विकास पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत पात्र छात्र-छात्राओं को तकनीकी कार्यों में दक्ष बनाने के लिए प्रतिमाह 1,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा जारी रखने में सहायता प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना, पात्र छात्राओं को निःशुल्क इलेक्ट्रिक स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री भारतीय ज्ञान प्रणाली वैश्विक उत्कृष्टता कोष जैसी महत्वपूर्ण पहलें भी की जा रही हैं।

उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नियुक्ति एवं चयन की प्रक्रियाओं को भी गति दी जा रही है। राजकीय महाविद्यालयों में चयनित प्रवक्ताओं के 840 पदों की ऑनलाइन पदस्थापना की जा चुकी है, जबकि 1,253 पदों का अधियाचन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा गया है। सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में भी प्राचार्य एवं प्रवक्ताओं की नियुक्तियां की गई हैं तथा विभिन्न पदों पर चयन प्रक्रिया जारी है।

हरियाणा विधानसभा की उच्चस्तरीय समिति ने उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे इन सुधारों, डिजिटल तकनीक के उपयोग, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध एवं नवाचार, अवस्थापना विकास तथा छात्र कल्याणकारी योजनाओं की सराहना की। समिति के सदस्यों ने कहा कि उत्तर प्रदेश द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी और अनुकरणीय हैं।

हरियाणा के विधायकों ने ऑपरेशन कायाकल्प, मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय, डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और नवाचारों की सराहना की

हरियाणा विधानसभा की शिक्षा समिति ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, शैक्षिक गुणवत्ता, विद्यालयी अवस्थापना और नवाचारों का अध्ययन करते हुए बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की तथा योगी सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया। बैठक में अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने ऑपरेशन कायाकल्प, मुख्यमंत्री मॉडल एवं अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय, प्रोजेक्ट अलंकार, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, ड्रीम लैब, व्यावसायिक एवं प्री-स्किलिंग शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षक प्रशिक्षण, डायट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डिजिटल निगरानी प्रणाली, विद्या समीक्षा केंद्र, मानव संपदा पोर्टल, निपुण भारत मिशन तथा शोध एवं नवाचार जैसे कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि प्रदेश में विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास, शिक्षक क्षमता निर्माण, छात्र नामांकन, सीखने के परिणाम और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश का शिक्षा मॉडल गुणवत्तापूर्ण, तकनीक-सक्षम और छात्र-केंद्रित शिक्षा का प्रभावी उदाहरण है तथा इससे अन्य राज्यों को भी सीख मिल सकती है।

Exit mobile version