अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

अयोध्या केस की सुनवाई पूरीअयोध्या केस की सुनवाई पूरी
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नई दिल्ली। राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 40 दिन एक घंटे पहले पूरी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा कि वे मोल्ड़िंग ऑफ रिलीफ़ पर तीन दिनों में लिखित जवाब कोर्ट में दें।

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40 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। राजीव धवन ने मशहूर शायर इकबाल की ग़ज़ल पढ़ी- “मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिंदी है हम वतन है, हिंदुस्तान हमारा। राजीव धवन ने कहा कि मैं आखिरी में बस ये कहूंगा कि आप हमें प्रोटेक्ट करें। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

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जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप जो मैप दिखा रहे है उसमें चबूतरा इनर कोर्ट यार्ड में था? राजीव धवन ने कहा चबूतरा भी मस्जिद का हिस्सा है। मस्जिद की दीवार कब्रगाह के पास से शुरू होती है।राजीव धवन ने कहा कि वह मोल्ड़िंग ऑफ रिलीफ़ के तहत बाबरी मस्जिद को फिर से बनाने की मांग कर रहे हैं। मस्जिद को दुबारा बनाने के अधिकार हैं। भले अभी वहां मस्जिद नहीं है, लेकिन अभी भी ये जमीन वक़्फ़ की है। हम बाबरी विध्वंस के पहले की स्थिति चाहते है।

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राजीव धवन ने कहा कि वो पांच मिनटों तक और बहस करेंगे, उसके बाद वो अपनी बहस समाप्त करेंगे। राजीव धवन ने कहा कि हिन्दू महासभा की तरफ से कैसे चार जवाब दिए गए। धवन ने परासरन के बाहर से आए बाबर की ऐतिहासिक गलती को सुधारने की दलील पर कहा हम हिंदू और मुस्लिम शासकों में कैसे अंतर कर सकते हैं? 1206 में सल्तनत शुरू हुई. 1206 के बाद से मुसलमान मौजूद थे। इस्लाम ने उन लोगों के लिए आकर्षण पैदा किया जो छुआछात से परेशान थे बाबर ने लोधी के साथ युद्ध किया जो एक मुस्लिम था। भारत सिर्फ एक नहीं था यह बहुतों का मिश्रण था। मेरी याचिका सिर्फ टाइटल के लिए नहीं है। कई अन्य पहलू हैं। ये घोषणा एक सार्वजनिक वक्फ के लिए है। यह एक सार्वजनिक मस्जिद थी। इसमें मस्जिद, जमीन और कई चीजें शामिल हैं। यदि हिंदू 1855 से पहले टाइटल साबित करने में सक्षम हैं तो मैं इसके जवाब में 2 शताब्दियों से अधिक से पहले ही जगह का मालिक हूं। धवन- सेवायत को हिन्दू धर्म मे सिर्फ पूजा का अधिकार है। इस्लाम की तरह उसे मुतवल्ली जैसे अधिकार नहीं मिल सकते।

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धवन ने आगे कहा लेकिन ये लोग सिर्फ एक खास तरह के लोगों को ही आक्रमणकारी मानते हैं। आर्यों को आक्रमणकारी मानने से उनको परहेज़ है। जब मीर कासिम आया तो भारत एक देश नहीं बल्कि टुकड़ों में था। लोधी को हराकर आया। तब धीरे-धीरे उसने अपना राज बढ़ाया। तब उसकी लड़ाई भारत से नही रजवाड़ो से थी। शिवाजी के समय राष्ट्रवाद की धारणा बढ़ी।

धवन ने कहा कि आक्रमणकारियों की बात हो तो सिर्फ नादिर शाह, तैमूर, चंगेज़ और अंग्रेज ही नहीं बल्कि आर्यों तक जाना होगा।
धवन ने हिन्दू पक्षकारों की दलीलों का जवाब देते हुए कहा कि यात्रियों की किताबों के अलावा इनके पास टाइटल यानी मालिकाना हक का कोई सबूत नहीं। इनकी विक्रमादित्य मन्दिर की बात मान भी लें तो भी ये रामजन्मभूमि मन्दिर की दलील से मेल नहीं खाता। 1886 में फैज़ाबाद कोर्ट कह चुका था कि वहां हिन्दू मन्दिर का कोई सबूत नहीं मिला। हिंदुओं ने उसे चुनौती भी नहीं दी।

पीएन मिश्रा ने अनुवाद को जायज़ और सही ठहराते हुए एक पैरा पढ़ा। धवन ने कहा मिश्रा जी हम आपको सुन चुके हैं। अब कुछ और सुनाने की ज़रूरत नहीं। बाबर के द्वारा मस्जिद के निर्माण के लिए ग्रांट और लगान माफी गांव देने के दस्तावेज हैं। जस्टिस चंद्रचूड़-ग्रांट से आपके मालिकाना हक की पुष्टि कैसे होती है? धवन- जमींदारी और दीवानी ज़माने के कायदे देखें तो जमीन के मालिक को ही ग्रांट मिलती थी। इस पर पीएन मिश्रा ने आपत्ति जताई तो धवन ने कहा कि इनकी दलील मूर्खतापूर्ण है. क्योंकि इनको भूमि कानून की जानकारी नहीं है। मिश्रा ने कहा कि वो लैंड लॉ पर दो-दो किताबें लिख चुके हैं और मेरे काबिल दोस्त कह रहे हैं कि मुझे इसकी जानकारी ही नहीं। इस पर धवन ने कहा- आपकी किताबों को सलाम है आप उन पर पीएचडी भी कर लें।

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