हेलीकाप्टर से घाटी और पहाडि़यों की निगरानी बना कौतूहल

ड्रोन कैमराहेलीकाप्टर से घाटी और पहाडि़यों की निगरानी बना कौतूहल
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सोनभद्र। सोनांचल की घाटियों एवं पहाड़ों में इन दिनों हेलीकाप्टर साथ ड्रोन कैमरे का आकाश में विचरण तरह-तरह की आशंकाओं को जन्म दे रहा था। इतना ही नहीं अफवाहों के इस गर्म बाजार के बीच विदेशी शक्ति द्वारा देश की जासूसी अथवा नक्सली या अलगांव-वादी ताकतो पर नजर रखी जाने की बाते चट्टी चौराहा पर आम होती नजर आ रही थी। इस सम्बन्ध में इस संवाददाता द्वारा पड़ताल पर ज्ञात हुआ कि खनिज सम्पत्ति से समृद्ध सोनघाटी की निगरानी ड्रोन कैमरे से इसलिए की जा रही है कि विश्व की सबसे महंगी धातु की यहां प्रचुरता है। इसके पूर्व सोना की प्रचुरता को लेकर सोनभद्र राष्ट्रीय फलक पर उदित हुआ था। जहां सर्वेक्षण के दौरान भारत सरकार खुलदिल रेलवे स्टेशन क्षेत्र में खुदाई शुरू करा दी थी किन्तु लागत अधिक होने के कारण खुदाई रोक देनी पड़ी।

कौतूहल बना आकाश में मडरा रहा हेलीकाप्टर का पटाक्षेप गुरूवार को जिलाधिकारी एस राजलिंगम द्वारा किया गया। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार के लिए राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश के सिंगरौली, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर तथा झारखण्ड के गढ़वा जिले के आंशिक भूभागों में हेलिकॉप्टर वाहित भू-भौतिकीय सर्वेक्षण किया जा रहा है। डीएम के अनुसार इस सर्वेक्षण का उद्देश्य खनिज अन्वेषण के लिए अधोस्थलीय भू-वैज्ञानिक संरचनाओं के अध्ययन के लिए ऑकड़ें एकत्रित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि इस सर्वेक्षण में विद्युती चुम्बकीय एवं स्पैक्ट्रोमीटर उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है। इन उपकरणों के कुछ भाग हेलिकॉप्टर के नीचे लटका रहता है जो कि जमीन की सतह से 60-80 मीटर की ऊंचाई पर उड़ते हुए सर्वेक्षण करता है।

डीएम एस राजलिंगम बोले –

खोज में प्रयोग किये जाने वाले उपकरणों से विभिन्न तत्वों के सांद्रण, प्राकृतिक चुम्बकीय त्रीवता तथा शैलों में उपस्थित चालकता के मान का आंकलन किया जायेगा। उपरोक्त संदर्भित भूभागों में संग्रहीत आंकड़े से खनिज अन्वेषण में मदद मिलेगी। उन्होंने जिले के नागरिकों को आश्वस्त करते हुए बताया कि इस प्रकार के सर्वेक्षण देश के विभिन्न भूभागों में नियमित रूप से किये जाते हैं और इनकी उपयोगिता सिद्ध हो चुकी है। साथ ही यह भी कहा कि हेलिकॉप्टर के नीचे लटकते हुए उपकरण से स्थानीय निवासियों के मन में चिंता एवं भय नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह एक सुरक्षित वैज्ञानिक उपकरण है तथा इसको हवा में उड़ने के लिए सुरक्षा की दृष्टि से विमानन प्राधिकरण द्वारा प्रमाणित किया गया है। यह सर्वेक्षण बहुत ही अनुभवी एवं दक्षता प्राप्त पेशेवर लोगों द्वारा किया जा रहा है।

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