भारत के लिए हिंदू-मुस्लिम को साथ चलना होगा : मोहन भागवत

मोहन भागवत
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कोलकाता। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश में हिंदू-मुस्लिम विवाद का समाधान एक दिन जरूर हिंदू तरीके से होगा। यह बात भागवत ने सिस्टर निवेदिता की 150वीं जयंती के मौके पर बुधवार को कोलकाता के साइंस सिटी ऑडिटोरियम में कही। उन्होंने कहा कि हमारे मन अलग हो सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद हम साथ चल सकते हैं।

मोहन भागवत का बड़ा बयान

विचारों में अंतर हो सकता है , लेकिन हमें साथ भारत के लिए चलना होगा। भारत हमारा धर्म है और हमें एक भारत के लिए कोशिश करनी होगी। उन्होंने एक मुस्लिम विद्वान से अपनी बातचीत को याद करते हुए कहा कि वह मुस्लिम विद्वान पूर्व सांसद हैं । एक बार उन्होंने मुझसे पूछा कि मैंने सचर कमेटी का विरोध क्यों किया ? उन्होंने स्वीकार किया कि कई सालों पहले वे सभी हिंदू ही थे। तब वे भजन गाया करते थे। अब उनके भजन कव्वाली में तब्दील हो गए हैं।  ये मैं नहीं कह रहा, उन्होंने मुझसे कहा था।  उन्होंने कहा था कि सचर कमेटी शिक्षा के माध्यम से अपने इतिहास को जानने में हमारी मदद करेगा और इससे विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।  भागवत ने कहा कि मैंने उनसे कहा कि मुझे इस बारे में मालूम है और डॉक्टर केशव राव हेडगेवार ने मुझे 1925 में इस बारे में बताया था। मैंने उन्हें आगे बताया कि समस्या ये है कि जिन लोगों को वह रिप्रेजेंट करते हैं उन्हें ये बातें नहीं मालूम हैं। मैंने उन्हें बताया कि लोगों को इस संबंध में शिक्षा दीजिये मैं सचर कमिटी का विरोध करना बंद कर दूंगा। मैंने उनसे कहा कि हमने पास्ट में हमनें काफी चीजें डाइजेस्ट की थीं, लेकिन कुछ समय पहले हमारा हाजमा खराब हो गया था।

गंगा को भारत की संज्ञा देते हुए उन्होंने कहा कि गंगा में चाहे जितनी नदियां मिल जाएं वह गंगा ही रहती है। सिस्टर निवेदिता ने कहा था कि अगर लोग आपस में ही लड़ते रहे तो राष्ट्रवाद का जन्म नहीं हो सकता।

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